बच्चों में अनुशासन की भावना

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे में अच्छे गुण हों। चिल्लाने, डांटने-फटकारने, डराने या लालच देने से बच्चे सीखते कम हैं, उल्टा जवाब ज्यादा देने लगते हैं। यहां जानें बच्चों को अनुशासन सिखाने के तरीके…

विकल्प तलाशें :

ज्यादातर समय अभिभावक बच्चों को यह बताते हैं कि उन्होंने क्या गलत किया, लेकिन बजाय इसके उन्हें यह बताना चाहिए कि वे कैसे इसे सही कर सकते थे। बच्चों को स्थितियों को ठीक करने के विकल्प देने से उनकी सोच और समझ विकसित होती है।

सीखने को प्रोत्साहित करें :

 रजनी बख्शी, साइकोलॉजिस्ट, मुंबई का कहना है, बच्चों को डांट-फटकारकर मना करने से वे मान जाते हैं, लेकिन इस तरह से वे हार मानना सीखते हैं, न कि स्वीकार करना। उन्हें गलतियों से सीखने के लिए प्रेरित करें।

अच्छे कामों की प्रशंसा करें :

 उनकी छोटी-छोटी अच्छी आदतों, जैसे लाइट बंद करना या चीजों को सही जगह रखना, को सराहने से उन्हें अच्छी आदतों को अपनाने में मदद मिलती है। वे अगली बार उस काम को करने के लिए प्रोत्साहित महसूस करते हैं।

नियमित रहें :  

 आप किस मामले में उनसे क्या उम्मीद करती हैं, यह पहले ही स्पष्ट कर दें। यह बताने के अपने तरीकों पर कायम रहें। अपनी उम्मीदों और अनुशासनों के प्रति एक समान रवैय्या रखें।

न मारें, न लालच दें :

 रजनी के मुताबिकडांट लगाने से गुरेज नहीं करना चाहिए, लेकिन हाथ उठाना किसी भी उम्र के बच्चे के लिए सही नहीं है। डांटते वक्त भी माहौल और शब्दों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है।

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