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मजबूत इरादों की महिला सरवीण

सरवीण चौधरी ने कालेज की पढ़ाई चंडीगढ़ से की। क्लासिकल डांस में एमए की तथा इन्हें बेस्ट फोक डांसर भी घोषित किया गया। इसी दौरान दो बार पंजाब की ओर से नृत्य के कार्यक्रमों के तहत विदेश भी गईं व नेहरू युवक केंद्र पंजाब के साथ सहयोग करते हुए कई कार्यक्रमों में अपनी छाप छोड़ी..

नृत्य की भाव-भंगिमा से राजनीति के कठोर मकसद तक पहुंचने की अदाकारी में सफल रहीं सरवीण चौधरी ने अपनी हस्ती को एक मुकाम तक सींचा। 1966 में पिता गुरदेव व माता स्वलता  के घर पंजाब में जन्मी बेटी ने आज बुलदिंयों को छू लिया है। सरवीण के पिता पंजाब सरकार में कार्यरत थे तथा माता अध्यापिका अब दोनों सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सरवीण की प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल चंडीगढ़ में हुई। कालेज की पढ़ाई एमबीएम कालेज चंडीगढ़ से की। क्लासिकल डांस में एमए की। इन्हें बेस्ट फोक डांसर भी घोषित किया गया। इसी दौरान दो बार पंजाब की ओर से नृत्य के कार्यक्रमों के तहत विदेश भी गईं व नेहरू युवक केंद्र पंजाब के साथ सहयोग करते हुए कई कार्यक्रमों में अपनी छाप छोड़ी है। विधानसभा क्षेत्र शाहपुर से चुनाव जीत कर जयराम ठाकुर के नेतृत्व में बनी सरकार में सरवीण चौधरी को शहरी विकास, आवास एवं नगर नियोजन मंत्री का पदभार प्राप्त हुआ है। इससे पूर्व धूमल के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार में एक बार संसदीय सचिव तो एक बार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री रह चुकी हैं। अपने 24 वर्ष  के सक्रिय राजनीतिक सफर में सरवीण चौधरी ने कई उतार-चढ़ाव देखे, परंतु हर बार बुलंद हौसलों के साथ नई इबारत लिखने को जनता के बीच जाकर अपना पक्ष रखते हुए कदम- दर- कदम मंजिल प्राप्त की। सरवीण चौधरी के सुसर जहां आरएसएस में सक्रिय थे, वहीं पहले जनता पार्टी और बाद में बनी भारतीय जनता पार्टी में भी उनकी अच्छी पैठ थीं व 1993 के चुनाव में सरवीण चौधरी को भारतीय जनता पार्टी ने शाहपुर से अपना उम्मीदवार बनाया परंतु सरवीण चौधरी यह चुनाव हार गईं। 1998 में भाजपा ने शाहपुर से पुनः सरवीण चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा। इस बार सरवीण चौधरी कांग्रेस दिग्गज मेजर विजय सिंह मनकोटिया को पटकनी देते हुए पहली बार विधानसभा पहुंचीं व धूमल के नेतृत्व में भाजपा सरकार में संसदीय सचिव बनीं।

2003 में हुए चुनावों में सरवीण चौधरी को हार का सामना करना पड़ा, परंतु 2008 के चुनाव में सरवीण चौधरी ने अपनी विजय पताका  लहराई और पुनः विधानसभा पहुंचीं। उस मर्तबा भी भाजपा की सरकार बनी, जिसका नेतृत्व प्रेम कुमार धूमल ने किया, जिन्होंने अपने मंत्रिमंडल में सरवीण को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री बनाया गया।

इसके बाद 2012 में हुए चुनावों में अपनी जीत का जादू बरकरार रखते हुए सरवीण ने विजय प्राप्त की, परंतु प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। बावजूद इसके  सरवीण चौधरी ने विपक्ष में रहते हुए भी जनता की आवाज को कई बार विधानसभा में उठाया व विधानसभा  क्षेत्र शाहपुर में जनता की सेवा निरंतर जारी रही । इसी का परिणाम है कि 2017 के चुनावों में जीत की हैट्रिक लगाकर शिमला पहुंचीं, जहां इस बार पुनः जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनीं। सरवीण चौधरी की कार्यशैली जनता के साथ तालमेल व लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचना आदि उपलब्धियों के मद्देनजर जयराम ठाकुर के मंत्रिमंडल में एकमात्र महिला विधायक के रूप में सरवीण चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाते हुए शहरी विकास, आवास एवं नगर नियोजन मंत्री पद सौंपा गया। कांगड़ा जिला की हॉट सीट से चौथी बार विधायक बन जयराम ठाकुर के मंत्रिमंडल में शामिल सरवीण चौधरी हिमाचल में ओबीसी वर्ग से सबसे ताकतवर नेत्री बनकर उभरी हैं। उनका मानना है कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए विभाग उनके लिए चैलेंज हैं, जिसमें वह नई ऊर्जा व विश्वास से कार्य करते हुए जनता के साथ किए वादों को पूरा करेंगी।

मुलाकात

ईमानदारी और पारदर्शिता को काम में अहमियत…

आपके भीतर के कलाकार के मन को कितनी भा गई सियासत?

कलात्मक पक्ष लोगों के काम करने की प्ररेणा देता है। कलाकार मन तो तभी प्रसन्न होता है जब परिणाम शत-प्रतिशत आएं।

क्या मूल प्रवृत्ति के अनुरूप कभी नृत्य की तरफ लौटने का मन नहीं करता?

कलात्मक पक्ष तो हमेशा बना रहता है, पर वर्तमान में जहां पर हूं उसी काम को दक्षता देना चाहती हूं।

आपकी पसंद के कलाकार, विशेष तौर पर कोई नर्तक या नृत्यांगना ?

विरजू महाराज जी।

राजनीति में प्रेरणा या वजह जिसके कारण कूद गईं?

अपने ससुर जी से,उनका समाज के प्रति  निष्ठा का भाव तथा कुछ न कुछ अच्छा करने की इच्छा ने ही मेरे मन में राजनीति में आने की वजह बना दी।

राजनीति में औरत होना आपके लिए सहायक रहा या कभी दिक्कतें बेशुमार रहीं?

राजनीति में संघर्ष तो करना ही पड़ता है। जहां तक औरत होने की बात है, तो मुझे कभी महसूस ही नहीं हुआ। सभी कार्य समांतर चलते रहे।

कभी कठोर सतह पर होती राजनीति से आहत नहीं होतीं?

आहत होने का प्रश्न नहीं है, लेकिन जब राजनीति में आए तो कार्य तो करना ही पड़ेगा।

हार का कटु अनुभव आपको किस तरह सशक्त करता है?

 निश्चित रूप से कुछ करने की प्ररेणा देता है, जिसमें जीत सुनिश्चित बनी रहे।

जीवन में पाने के लिए संघर्ष, साधन, साहस या भाग्य में से कौन आपके पक्ष में ज्यादा रहा?

 निश्चित रूप से अपना योगदान है, ये सब एक दूसरे के पूरक हैं।

नृत्य परंपरा में गुरु, साधना और रियाज का महत्त्व है,तो राजनीति में ?

राजनीति में भी इन सबका विशेष रूप से योगदान है।

हिमाचली गीत-संगीत व लोकनृत्य के प्रति आपका कोई सपना?

हिमाचली गीत-संगीत को राष्ट्रीय- अतंरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त होगी, तो मुझे बहुत खुशी होगी।

हिमाचली कलाकारों में आपकी पसंद?

वैसे तो सभी कलाकार ठीक हैं और सभी कलाकार अपने- अपने क्षेत्र में निपुण हैं। इस लिए विशेष पसंद का प्रश्न  ही नहीं है।

विभागीय जिम्मेदारियों के बीच जहां केवल आप ही होती हैं?

 विभागीय जिम्मेदारियों में अकेले एकाग्र मन से खुद से निपटाने का प्रयास करती हूं।

शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी में आपका कलात्मक पक्ष, प्रशासनिक सोच व भविष्य का विजन?

 प्रत्येक विषय को सूक्षमता से समझना  व उसे  सकारात्मक तरीके से लागू करवाना।  प्रशासनिक  सोच के रूप में प्रत्येक विषय को पारदर्शिता से लागू करवाना। स्मार्ट सिटी को अतंरराष्ट्रीय स्तर का बनाना व स्थानीय निकाय को आधुनिक व लोक हितकारी बनाना।

अगर राजनीति यहां तक न ले जाती, तो आप क्या कर रही होतीं?

 निश्चित रूप से समाज में कुछ न कुछ रचानात्मक कार्य कर रही होती, जिसमें समाज का भला हो।

जीवन का सिद्धांत, काम की लय और सुकून का पल?

 ईमानदारी और पारदर्शिता से कार्य करना और चैन की नींद सोना। जो भी कार्य शुरू किया उसे उसके अंजाम तक पहुंचाना और परिवार के साथ कुछ  समय बिताना यह सब मेरे लिए सुकून के पल हैं।

— विजय लगवाल, शाहपुर

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