विदर्भ ने जीती रणजी ट्रॉफी

समसामयिकी

विदर्भ ने गौतम गंभीर और ऋषभ पंत जैसे दिग्गजों से भरी दिल्ली की टीम को हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया। चौथी पारी में विदर्भ की टीम को जीत के लिए 29 रन का टारगेट मिला, जिसे उसने 1 विकेट के नुकसान पर सिर्फ 5 ओवर में ही पा लिया। विदर्भ को ओपनर बल्लेबाज फैज फजल (2) के रूप में सिर्फ एक झटका लगा। हैट्रिक सहित 8 विकेट लेने वाले रजनीश गुरबानी को मैन ऑफ द मैच चुना गया। बता दें कि विदर्भ की टीम पहली बार फाइनल में पहुंची थी। वह इस तरह से रणजी चैंपियन बनने वाली 17वीं टीम बन गई है। विदर्भ ने टॉस जीतकर दिल्ली को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया और फिर उसकी टीम को 295 रन पर आउट कर दिया। रजनीश गुरबानी ने 6 विकेट लिए। इसके जवाब में विदर्भ ने अक्षय वालकर (133) के प्रथम श्रेणी मैचों में पहले शतक के दम पर 547 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। दिल्ली दूसरी पारी में 280 रन पर आउट हो गई। 9वीं बार रणजी फाइनल में खेल रहे मुंबई के पूर्व कप्तान वसीम जाफर ने चौका जड़कर अपने करियर में पहली बार खिताबी मुकाबले में विजयी रन बनाया। विदर्भ ने सोमवार सुबह अपनी पहली पारी 3 विकेट पर 528 रन से आगे बढ़ाई, लेकिन दिल्ली ने उसके बाकी बचे 3 विकेट जल्द ही निकाल दिए। युवा तेज गेंदबाज नवदीप सैनी ने 135 रन देकर 5 विकेट लिए। दिल्ली को विदर्भ की पहली पारी में बाएं हाथ के स्पिनर मनन शर्मा की कमी खली, जो घुटने की चोट के कारण मैदान पर नहीं उतरे। उन्होंने हालांकि दूसरी पारी में बल्लेबाजी की। दूसरी ओर दिल्ली की टीम अपनी दूसरी पारी में भी कमाल नहीं कर पाई और 76 ओवरों में सभी विकेट खोकर सिर्फ 280 रन ही बना सकी। उसके लिए शॉरेय ने 62 और नीतीश राणा ने 64 रन की पारी खेली, जबकि विदर्भ के लिए अक्षय वखरे ने सबसे अधिक 95 रन देकर 4 विकेट लिए। सरवटे ने 30 रन देकर 3 विकेट झटके। उल्लेखनीय है कि विदर्भ की टीम इस साल अपना पहला रणजी फाइनल खेल रही थी। इससे पहले विदर्भ की टीम दो बार सेमीफाइनल में पहुंची थी। 2002-03 और 2011-12 में सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई किया था, लेकिन टूर्नामेंट जीत नहीं सकी। इसके अलावा विदर्भ की टीम दो बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में कामयाब रही थी। पहली बार 1970-71 में इस टूर्नमेंट के क्वार्टर फाइनल में पहुंची थी, जबकि दूसरी बार 1995-96 में पहुंची। रजनीश गुरबानी ने पहली पारी में दिल्ली के विकास मिश्रा (7), नवदीप सैनी (0) और शोरे (0) को बोल्ड कर अपनी हैट्रिक पूरी की। रणजी फाइनल में हैट्रिक लेने वाले वह दूसरे गेंदबाज हैं। उनसे पहले तमिलनाडु के बी. कल्याणसुदंरम ने 1972/73 में बांबे के खिलाफ चेन्नै में हैटट्रिक ली थी।

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