इलेक्ट्रिक कार का मुश्किल रास्ता

 

नई दिल्ली— भारतीय कार बाजार में आधी से भी ज्यादा भागीदारी रखने वाली कंपनी मारुति के लिए आने वाला दौर काफी चुनौती भरा हो सकता है। खासकर इलेक्ट्रिक कार के क्षेत्र में। ऑटो एक्सपो में मारुति ने महज एक इलेक्ट्रिक कांसेप्ट ई-सर्वाइवर ही शोकेस किया है, जबकि टाटा व महिंद्रा ने एक दर्जन इलेक्ट्रिक कारों के कांसेप्ट को पेश करते हुए लोगों का ध्यान खींचा। मारुति की पहली इलेक्ट्रिक कार ई-सर्वाइवर के कांसेप्ट मॉडल को एक्सपो में प्रदर्शित किया गया। इसे कंपनी भविष्य की ऑफ रोडिंग इलेक्ट्रिक कार बता रही है। फिलहाल, कांसेप्ट में यह टू सीटर एसयूवी है। इसके जरिए कंपनी अपने चार व्हील ड्राइव हेरिटेज को कायम रखेगी। कंपनी ने इसकी रेंज के बारे में नहीं बताया है। वहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर देश में सबसे बड़ी भूमिका महिंद्रा निभा रही है। कंपनी चार इलेक्ट्रिक वाहनों को बेच रही है, जिनमें तीन पैसेंजर कारें व एक कॉमर्शियल वाहन शामिल है। ऑटो एक्सपो में कंपनी ने छह इलेक्ट्रिक कारों के कांसेप्ट को भी प्रदर्शित किया है। बहुत जल्द कंपनी की ई-एसयूवी केयूवी-100 बाजार में आ जाएगी। टाटा मोटर्स भी जल्द ही अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार की लांचिंग के लिए कमर कस चुकी है। एक्सपो में कंपनी ने छह इलेक्ट्रिक कारों के कांसेप्ट को प्रदर्शित किया है। वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन सियाम की मानें तो 2030 तक हो न हो, लेकिन 2047 तक देश पूरी तरह से इलेक्ट्रिक जरूर हो जाएगा। मारुति के सीनियर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (सेल्स एंड मार्केटिंग) आरएस कलसी कहते हैं कि इलेक्ट्रिक कार को बनाना उतना मुश्किल नहीं है, जितना उसे लोगों से स्वीकार कराना।

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