ट्रांसफर एक्ट सिर्फ टीचर्स के लिए!

अनुबंध शिक्षक संघ ने किया सरकार की नई नीति का विरोध

शिमला – हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षकों के लिए बनाए जाने वाले ट्रांसफर एक्ट का विरोध शुरू होने लगा है। ट्रासंफर एक्ट अभी फाइनल भी नहीं हुआ है कि प्रदेश अनुबंध शिक्षक संघ ने भी इस एक्ट पर नाराजगी जताई है। अनुबंध शिक्षक संघ के पूर्व राज्य अध्यक्ष भूपेंद्र ठाकुर ने कहा कि ट्रांसफर एक्ट सिर्फ अध्यापकों पर ही क्यों थोपा जा रहा है, बाकि विभागों में क्यों लागू नहीं किया जा रहा है। शिक्षक संघ ने मांग की है कि दूसरे सरकारी विभागों के मुलाजिमों के लिए भी ऐसी नीति लागू होनी चाहिए। अनुबंध शिक्षक संघ ने सरकार से मांग उठाई है कि शिक्षक संगठनों को विश्वास में लेकर ही ट्रांसफर एक्ट पर कोई फैसला लिया जाए, ताकि किसी तरह का कोई असंमजस और असुरक्षा की भावना शिक्षकों के बीच न रहे। इसके साथ ही शिक्षकों ने सरकार से मांग उठाई है कि 2003 के बाद नियुक्त अध्यापकों को पुरानी पेंशन बहाल की जानी चाहिए और नई पेंशन योजना बंद कि जानी चाहिए और अनुबंध से नियमित अध्यापकों को उनकी नियुक्त तिथि से नियमित लाभ सहित अनुबंध सेवाकाल का पद वरिष्ठता लाभ दिया जाए। नई ग्रेड-पे के लिए दो वर्ष कि शर्त खत्म की जाए व अनुबंध प्रथा को खत्म कर नई अध्यापक नियुक्तियां नियमित रूप से ही की जाएं।

सभी के लिए बने पालिसी

नगरोटा सूरियां – तबादला नीति सबके लिए बननी चाहिए सभी को पता है। कई विभागों में नियुक्त कर्मचारी वर्षों से घरों के नजदीक डेरा जमाए बैठे हैं। यह बात हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सरदार  जीएस बेदी ने कही। उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों में कई ऐसे कर्मचारी हैं, जो 10-10 साल से एक ही जगह डटे हुए हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि शिक्षकों ही नहीं, बल्कि सभी कर्मचारियों के लिए तबादला नीति लागू हो। सभी कर्मचवारियों एक समान पालिसी बने। उन्होंने शिक्षा मंत्री के उस कथन की तारीफ की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह तबादला मंत्री नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्री के नाम से ही पहचान बनाना चाहते हैं। इसलिए अब प्राथमिक शिक्षक संघ ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों के साथ अन्य कर्मचारियों पर भी तबादला नीति लागू हो।

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