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हमीरपुर मेडिकल कालेज को 165 कनाल जमीन

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय का फाइनल अप्रूवल

हिमाचल सरकार ने मांगी थी 8.82…

हमीरपुर— केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने हमीरपुर मेडिकल कालेज के लिए साढ़े छह हेक्टेयर जमीन मंजूर की है। इसके तहत रंगस के जोलसप्पड़ में 165 कनाल भूमि में मेडिकल कालेज परिसर की स्थापना करनी होगी। हिमाचल सरकार ने मेडिकल कालेज के लिए 14.54 हेक्टेयर जमीन चिन्हित कर मंत्रालय से स्वीकृति मांगी थी। मिनिस्ट्री की आब्जर्वेशन के बाद राज्य सरकार ने कटौती के साथ 8.82 हेक्टेयर का दूसरा प्रोपोजल भेजा था। बावजूद इसके केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सिर्फ 6.54 हेक्टेयर वन भूमि की मेडिकल कालेज के लिए स्वीकृत की है। मंत्रालय से प्राप्त फाइनल अप्रूवल के बाद अब रंगस के जोलसप्पड़ में सिर्फ मेडिकल कालेज के होस्टल और क्लासरूम ही बनेंगे। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के निर्धारित मापदंडों के तहत मेडिकल कालेज का निर्माण 14 हेक्टेयर भूखंड पर होगा। इन नियमों का हवाला देते हुए एमसीआई ने हिमाचल सरकार को सबसे पहले जमीन चिन्हित करने के आदेश दिए थे। इसके चलते वीरभद्र सरकार के कार्यकाल में चार साल पहले कई जगह संभावित स्थल तलाशने के बाद रंगस के जोलसप्पड़ में जमीन फाइनल की थी। इस प्रक्रिया में पता चला था कि चिन्हित की गई भूमि बंजर दरख्तान है। फोरेस्ट लैंड के पेंच के चलते जमीन का यह मामला करीब तीन साल तक लटका रहा है। इसी बीच केंद्रीय मंत्रालय को राज्य सरकार ने 14.54 हेक्टेयर वन भूमि का प्रोपोजल भी मंजूरी के लिए भेज दिया। इस पर कड़ी आपत्ति लगाते हुए मंत्रालय ने कहा कि एक साथ इतनी ज्यादा फोरेस्ट लैंड किसी भी संस्थान के लिए नहीं दी जा सकती। आपत्तियों के साथ लौटाए गए प्रस्ताव में कहा था कि मेडिकल कालेज में भवनों के निर्माण के लिए कम से कम जमीन ली जाए। इसके विपरीत पार्क तथा पर्यावरण के उद्देश्य से ज्यादा भूखंड पर निर्माण न हो। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की इसी चिट्ठी का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने एमसीआई को पत्र लिखकर कहा था कि पहाड़ी राज्यों के मद्देनजर हमीरपुर के मेडिकल कालेज के लिए जमीन की शर्त में राहत दी जाए।

दूसरा प्रोपोजल

प्रयास सिरे न चढ़ने पर राज्य सरकार ने दूसरा प्रस्ताव भेजते हुए जोलसप्पड़ में होस्टल, डाक्टर आवासीय परिसर, लैब, क्लासरूम तथा दूसरे प्रशासनिक भवनों के निर्माण के लिए ही 8.82 हेक्टेयर वन भूमि की मांग की। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया। हालांकि इसी दौरान मंत्रालय ने फोरेस्ट लैंड पर मेडिकल कालेज के निर्माण के लिए कंडीशनल सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी। अब यूजर एजेंसी ने एनओसी की तमाम औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इसके चलते केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से फोरेस्ट लैंड पर मेडिकल कालेज के निर्माण की फाइनल मंजूरी मिल गई है। अहम है कि मंत्रालय ने 6.54 हेक्टेयर भूखंड ही स्वीकृत किया है। इसके चलते अब क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर भी मेडिकल कालेज का अहम हिस्सा होगा। एमसीआई के निर्धारित मापदंडों में जमीन की शर्त पूरा करने के लिए अब क्षेत्रीय अस्पताल परिसर की जमीन को भी मेडिकल कालेज के खाते से जोड़ा जाएगा।

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