देश के पहले मशरूम सेंटर को निगल जाएगा फोरलेन

सोलन – देश में मशरूम उगाने की शुरुआत करने वाला सोलन का मशरूम सेंटर फोरलेन की जद में आ जाने से मटियामेट हो जाएगा। इस ऐतिहासिक सेंटर के साथ-साथ देश के एकमात्र मशरूम निदेशालय का अग्रिम भाग, यहां पर स्थापित मंदिर, चंबाघाट की पूरी ऑटो मार्केट  भी उजड़ जाएगी। परवाणु-शिमला फोरलेन के द्वितीय चरण में ऐतिहासिक मशरूम सेंटर का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। देश में खुंब उत्पादन इसी केंद्र से शुरू हुआ था। यह इमारत हालांकि पुरानी है, किंतु अपने आगोश में स्वर्णिम इतिहास को समेटे अब यह फोरलेन के घेरे में आ जाएगी। देश में मशरूम का उत्पादन सर्वप्रथम इसी केंद्र से आरंभ होने के कारण सोलन को मशरूम सिटी ऑफ इंडिया के नाम से जाना जाता है। बाद में मशरूम उत्पादन की बढ़ती लोकप्रियता के कारण इस दिशा में व्यापक शोध शुरू हुआ तथा इसी केंद्र के साथ ही देश का एकमात्र मशरूम निदेशालाय भी यहीं स्थापित किया गया। ऐतिहासिक मशरूम सेंटर के मटियामेट हो जाने के साथ-साथ खुंब निदेशालय को जाने वाली मुख्य सड़क व अग्रिम कुछ भाग पर भी पीला पंजा चलेगा। फोरलेन के द्वितीय चरण का कार्य चंबाघाट से कैथलीघाट तक किया जाना प्रस्तावित है। इसी निर्माण में चंबाघाट की पूरी ऑटो वर्कशाप मार्केट का भी अस्तित्व भी मिट जाएगा। रेलवे लाइन को चंबाघाट में फ्लाई ओवर के निर्माण से बचाया जा रहा है। जिस मशरूम सेंटर की इमारत को गिराया जाएगा, वह उद्यान विभाग के अधीन है। यहां पर वर्ष 1961 से मशीनरी स्थापित है तथा देश में खुंब उत्पादन की शुरुआत भी इसी केंद्र से उस दौरान हुई थी। इस केंद्र में प्रदेश के शिमला, सिरमौर, बिलासपुर, सोलन व किन्नौर जिला के किसानों को समय-समय पर मशरूम उगाने, खाद बनाने व अन्य प्रकार की नवीनतम जानकारी व प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक यहां अभी तक करीब 10 हजार किसानों को मशरूम उगाने के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। विभाग इस बात की भनक लगते ही हरकत में आ गया है तथा मशरूम केंद्र को अश्वनी खड्ड के किनारे बेकार पड़ी विभागीय 25 बीघा भूमि पर स्थानांतरित करने के लिए उच्च स्तर पर पत्राचार कर रहा है। इस संदर्भ में उद्यान विभाग के उपनिदेशक बीएस गुलेरिया ने कहा कि पुराना ऐतिहासिक मशरूम केंद्र फोरलेन की जद में आने से मिट जाएगा तथा अब नई व्यवस्था करने के लिए सरकार को लिखा जा रहा है।

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