पेयजल योजनाओं की आउट सोर्सिंग पर होगा पुनर्विचार

आईपीएच मंत्री बोले, ठेकेदारी प्रथा से नहीं सुधरे हालात

शिमला – आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा है कि पेयजल स्कीमों की आउट सोर्सिंग पर सरकार पुर्नविचार करेगी। उन्होंने कहा कि पेयजल स्कीमों को आउट सोर्स पर देने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो रहा है। ठेकेदारों को काम सौंपने से अच्छा विभाग अपने कर्मचारी वहां पर लगाए,जिससे खर्चा भी कम होगा। सदन में विधायक बलबीर वर्मा के मूल प्रश्न के उत्तर में कई विधायकों ने अनुपूरक सवाल किए जिनके जवाब देते हुए महंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि विभागीय कर्मचारियों का एक डाइंग कॉडर है, जिसमें लगातार पद समाप्त हो रहे हैं। कई स्कीमों में कर्मचारी हैं ही नहीं, जिस कारण योजनाएं बंद हो चुकी हैं और लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा। कई पेयजल स्कीमों को ठेकेदारों के हवाले किया गया है, जिनके पास अकुशल लोग लगे हैं। उनकी वजह से आज स्कीमों की मशीनरी जल गई या बंद हो चुकी है। इस कारण से आज बिजली बिल भी 500 करोड़ तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि विचार चल रहा है कि ठेकेदारों को स्कीमें दें या नहीं। पुरानी मशनरी को ठीक करना जरूरी है और मैन पावर को बढ़ाया जाना अति आवश्यक है। विधायक रामलाल ठाकुर ने अपने क्षेत्र की सात  स्कीमों का जिक्र किया और कहा कि उनमें पंप जल चुके हैं। ठेकेदार फोन नहीं उठाता, ऐसे में यहां टेंपरेरी कर्मचारी नियुक्त किए जाने चाहिए क्योंकि आने वाले समय में सूखा बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। इस पर महेंद्र सिंह ने कहा कि सूखा सरकार की बड़ी चिंता है, जिस पर चिंतन हो रहा है।  सुखराम चौधरी के अनुपूरक सवाल और विधानसभा अध्यक्ष डा.राजीव बिंदल के हस्तक्षेप पर उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी योजना का प्राक्कलन तैयार करने के साथ उसको चलाने की भी योजना होगी। वर्तमान में जो व्यवस्था है वो बेहद खर्चीली है। राकेश पठानिया ने जलरक्षकों की नियुक्ति का मामला उठाया। विधायक बलबीर वर्मा का कहना था कि विभाग में 674 पंप आप्रेटरों के पद खाली हैं जबकि 645 फिटरों, 208 हेल्परों, 160 चौकीदारों के पद भी खाली पड़े हैं। इस कारण से पेयजल स्कीमें पूरी तरह से बंद पड़ चुकी हैं। सिंचाई जनस्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह ने विधायक इंद्र सिंह के सवाल के जवाब में बताया कि सीर खड्ड के तटीकरण पर अब 160 करोड़ 88 लाख रूपए से अधिक की राशि खर्च होगी। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट नए सिरे से तैयार की गई है, जिससे योजना का प्राक्कलन बढ़ गया है।

किहार अस्पताल को 50 लाख का प्रावधान

विधायक आशा कुमारी के सवाल के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि किहार सिविल अस्पताल के निर्माण के लिए सरकार ने बजट में 50 लाख रुपए का प्रावधान रखा है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे काम बढ़ेगा तो धन की उपलब्ता पर इसे बजट देते रहेंगे। इस पर कुल 5 करोड़ 45 लाख रुपए खर्च होने हैं, जिसमें से एक करोड़ 48 लाख खर्च कर दिए गए हैं। शेष राशि चरणबद्ध ढंग से मिलेगी। विधायक का कहना था कि पैसा जल्द दिया जाए।

करोड़ों खर्चने के बाद भी नयनादेवी को पानी नहीं

श्रीनयना देवी क्षेत्र के लिए बनी उठाऊ पेयजल योजनाओं से पानी नहीं मिलने का मुद्दा खूब गर्माया।  विधायक रामलाल ठाकुर ने  गड़बडि़यों का अंदेशा जाहिर करते हुए कहा कि विभाग के अधिकारी सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी पानी नहीं आया, जिसकी जांच होनी चाहिए। सिंचाई मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार  गलत सूचनाएं देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाएंगे। राम लाल ठाकुर का कहना था कि कंफारा गांव के लिए एक योजना का शिलान्यास सांसद ने किया था जहां पर पांच पेयजल टैंक बनाए गए, लेकिन खर्चा करने के बाद इन टैंकों तक पानी नहीं पहुंच पाया। फोरलेन के कारण भी यहां पर पेयजल स्त्रोत सूख चुके हैं लेकिन कंपनी  ने पानी उठाने के लिए मोटरें तक नहीं लगा पाई। भाखड़ा से जगातखाना तक की स्कीमों का हाल खराब है।

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