प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 71 भर्तियों में गड़बड़

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जताई आशंका, हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग के मार्फत नियुक्तियां क्यों नहीं करवाईं

शिमला – हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पूर्व सरकार के समय में हुई भर्तियों को लेकर सरकार ने शंका जताई है। सरकारी भर्तियों के लिए बनाई गई व्यवस्था के विपरीत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नियुक्तियां कीं, जिस पर मौजूदा सरकार ने इसकी पड़ताल की बात कही है। यहां 71 विभिन्न श्रेणियों के खाली पदों को पूर्व सरकार ने भरा है, जिसमें भर्ती प्रक्रिया की अनदेखी कर खुद ही बोर्ड ने भर्तियां कीं। विधायक विक्रम जरयाल द्वारा सदन में पूछे गए एक सवाल पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि बोर्ड में हुई भर्तियों पर शंका है। इन भर्तियों में लगता है कि ये नियमों की परिधि में नहीं की गई हैं। उन्होंने कहा कि 25-07-2013 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बैठक में फैसला लिया गया था कि 71 पदों की भर्तियां जिनमें द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ श्रेणी शामिल है, को बोर्ड खुद करेगा, जबकि नियमों के मुताबिक ये भर्तियां कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के माध्यम से की जानी चाहिए थीं। प्रदूषण बोर्ड ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को इसका काम सौंपा और बाकायदा विश्वविद्यालय को इन भर्तियों के लिए 25 लाख भी दी दिए। इन पदों के लिए 12082 लोगों ने आवेदन किए थे। जयराम ठाकुर ने कहा कि शंका यळ जाहिर होती है कि जब सरकार द्वारा स्थापित व्यवस्था है और भर्तियों के लिए ही कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर का गठन किया गया है तो बोर्ड खुद भर्तियां क्यों कर रहा था और विश्वविद्यालय से उसने भर्तियां क्यों करवाईं। इसके अलावा एक ही जगह सिहुंता से तीन लोगों का चयन किया गया। विधायक और सरकार की शंकाओं के अनुरूप इस मामले की पड़ताल की जाएगी।

बिलासपुर जिला में ग्रीन हाउस की सबसिडी हड़पने पर होगी जांच

बिलासपुर जिला में ग्रीन हाउस के लिए सबसिडी लेकर पैसा हजम करने वालों की खैर नहीं है। सरकार ने ऐसे मामलों की जांच कर उन पर कार्रवाई करने का ऐलान किया है। साथ ही जिन अधिकारियों की मिलीभगत इस मामले में रही होगी उनपर भी कार्रवाई की जाएगी। विधायक रामलाल ठाकुर के एक सवाल के उत्तर में कृषि मंत्री डा.रामलाल मार्कंडेय ने कहा कि वर्ष 2014-15 में  किसानों को ग्रीन हाउस के निर्माण के लिए सब्सिडी की राशि पर अनुदान 85 फीसदी तक किया गया, जिससे पहले यह अनुदान 80 फीसदी प्रदान किया जाता था। विधायक का कहना था कि जो सूचना विभाग से मांगी गई है, वह नहीं दी गई, जिसे छिपाया जा रहा है। उनका आरोप था कि कई लोगों ने ग्रीन हाउस के लिए सबसिडी हासिल की, लेकिन एक साल बाद वे ग्रीन हाउस किसी और को बेच दिए और अनुदान की राशि हजम कर ली।

जल्द भरे जाएंगे डीएफओ के 100 पद

वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि जल्द ही सरकार वन विभाग में 100 डीएफओ के पद भरेगी। इसके लिए हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग जल्द प्रक्रिया शुरू करेगा। विधायक मोहन लाल ठाकुर के सवाल पर उन्होंने कहा कि विभाग में कई पद खाली हैं, जिनको भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पद भरने के बाद जहां भी जरूरत होगी, वहां पर प्राथमिकता के आधार पर नियुक्तियां की जाएंगी। विधायक के सवाल पर उन्होंने कहा कि रोहडू के शील में वन विश्राम गृह का निर्माण जल्द किया जाएगा।

पांवटा बस अड्डे की हालत खराब

पांवटा के विधायक सुखराम चौधरी ने सदन में वहां के बस अड्डे की दुर्दशा का बखान करते हुए सरकार से इसकी हालत को सुधारने की मांग की। परिवहन ने कहा कि बस अड्डों के लिए सरकार ने एक करोड़ 36 लाख रुपए की राशि रखी है। विधायक जैसा कहेंगे, उनका बस अड्डा वैसा तैयार कर दिया जाएगा।

ड्रेनेज सिस्टम पर ध्यान दें

मुख्यमंत्री से सदन में विधानसभा अध्यक्ष डा. बिंदल ने भी आग्रह किया कि सड़कों के डे्रनेज सिस्टम को मजबूत बनाया जाए। जो नालियां बनाई जा रही हैं, उनके नीचे पक्का गटका डाला जाए। उनके संज्ञान में आया है कि नालियों की मिट्टी पर कंकरीट डाला जा रहा है, जो दो महीने के बाद ही निकल जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

बीएडीएफ के खर्च की सूचना देंगे

बार्डर एरिया डिवेलपमेंट फंड के तहत खर्च की जाने वाली का ब्यौरा विधायक जगत सिंह नेगी ने मांगा, जिस पर जनजातीय विकास मंत्री डा. रामलाल मार्कंडेय ने कहा कि उन्हें सूचना उपलब्ध करवा दी जाएगी। विधायक का कहना था कि जानबूझकर सूचना नहीं दी जा रही है।

अकेले ही वाकआउट कर गए किन्नौर के विधायक जगत नेगी

किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी ने जनजातीय सलाहकार समिति का अध्यक्ष विधायक के बजाय कैबिनेट मंत्री को बनाने और लाडा (लोकल एरिया डिवेलपमेंट अथारिटी) का अध्यक्ष विधायक के बजाय डीसी को बनाने के विरोध स्वरूप मंगलवार को सदन से अकेले ही वाकआउट कर दिया। इससे पूर्व उन्होंने बजट चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि बजट में कुछ विशेष नया नहीं है। सरकारी क्षेत्र में नौकरियों के लिए बजट मौन है। भाजपा को गोवंश की बड़ी चिंता है, जबकि जंगली जानवरों से फसलों व लोगों को जो नुकसान हो रहा है, उसकी चिंता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए ये ऐलान किए गए हैं। बजट में रूसा पर भाजपा अब मौन क्यों है, जबकि विपक्ष में रहते हुए इस पर खूब हो-हल्ला करती रही। सरकार नीति बनाए कि अध्यापक, विधायक व राजनेताओं के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ें। हालांकि उन्होंने रेजीडेंशियल स्कूल खोलने पर सरकार को बधाई भी दी। उन्होंने यह भी कहा कि इटली का रूट स्टॉक सबसे बेहतर है।

इस साल सौ करोड़ से सुधारेंगे सड़कें

शिमला – मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि सड़कों की मरम्मत के लिए 100 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायक अनिरूद्ध सिंह के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अढ़ाई लाख किलोमीटर सड़कों की ऐनुअल मेंटेनेंस का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रदेश में आने वाले सैलानियों को कनेक्टिविटी के लिहाज से प्रमुख सड़कों में आवाजाही के लिए किसी तरह की दिक्कतें न आएं, लिहाजा पर्यटन क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़कों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करना पहला कार्य होगा, जिन क्षेत्रों में सड़कों की हालत ज्यादा दयनीय है, वहां मरम्मत सबसे पहले शुरू होगी। उल्लेखनीय रहेगा प्रदेश के कई हिस्सों में सड़कों में पड़े गड्ढे व टूटी-फूटी सड़कें विधानसभा चुनावों में भी मुद्दा बनती रही हैं। प्रदेश के अधिकांश क्षेत्र, क्योंकि धार्मिक व सामान्य पर्यटन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, लिहाजा सड़कों की मरम्मत के लिए कारगर कदम उठाने की जरूरत थी, जिसका सरकार ने संज्ञान लेते हुए मंगलवार को सदन में ऐलान भी कर दिया है।

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