सुकमा नक्सली हमले में नौ जवान शहीद

सीआरपीएफ का एंटी लैंडमाइन्स व्हीकल बारूदी विस्फोट से उड़ाया, छह जवान घायल

सुकमा – छत्तीसगढ़ के सुकमा में मंगलवार को सर्च ऑपरेशन में जुटे सीआरपीएफ के जवानों पर घात लगाकर किए गए नक्सलियों के हमले में नौ जवान शहीद हो गए। इस घातक हमले में छह जवान घायल भी हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है। जवानों को पहले आईईडी ब्लास्ट से निशाना बनाया गया, फिर फायरिंग की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में करीब 100 माओवादी शामिल थे। नक्सल प्रभावित सुकमा के किस्तराम इलाके में मंगलवार दोपहर साढ़े 12 बजे सीआरपीएफ की 212वीं बटालियन पर यह हमला हुआ। क्रिस्टारम थाने से सीआरपीएफ के जवान ‘एंटी लैंडमाइंस व्हीकल’ में सवार होकर सड़क निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों की सुरक्षा के लिए पालोदी गांव की ओर रवाना हुए थे। जंगल में घात लगाए बैठे नक्सलियों ने वाहन को लक्ष्य करते हुए बारूदी सुरंग विस्फोट कर दिया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि वाहन के परखचे उड़ गए और वाहन में सवार आठ जवान मौके पर ही शहीद हो गए। एक अन्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। खबरों के मुताबिक नक्सलियों को जवानों के मूवमेंट की जानकारी हो गई थी और यह पूर्व नियोजित हमला था। सूत्रों के मुताबिक पीपल्स लिबरेशन ग्रुप का इस हमले के पीछे हाथ माना जा रहा है। शहीदों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के सहायक उप निरीक्षक आर के एस तोमर, और प्रधान आरक्षक लक्ष्मण, मनोज सिंह तथा धर्मेंद्र सिंह शामिल हैं। इसके अलावा आरक्षक अजय यादव, मनोरंजन लकड़ा, जितेंद्र सिंह और शोभित शर्मा तथा वाहन चालक चंद्र एच एस शहीद हुए हैं। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सुकमा नक्सली हमले के शहीदों के परिजनों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने हमले में घायल जवानों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। राजनाथ ने कहा कि मैंने डीजी सीआरपीएफ से सुकमा हमले पर बात की है और उन्हें छत्तीसगढ़ जाने को कहा है। उधर, छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (नक्सल आपरेशन) डीएम अवस्थी ने सुकमा जिला में नक्सलियों द्वारा एंटी लैंड माइंस वाहन को विस्फोट से उड़ा देने की घटना में फिलहाल सुरक्षा बलों की किसी चूक से इनकार किया है। श्री अवस्थी ने स्वीकार किया कि गुप्तचर ब्यूरो (आईबी) का अलर्ट मिला था, लेकिन इस इलाके में जहां हर क्षण सुरक्षा बलों एवं नक्सलियों के बीच सामना होता रहता है और फायरिंग होती रहती है, ऐसे में अलर्ट का खास मायने नहीं रह जाता। यह नक्सलियों का कोर इलाका है। इलाके में तैनात सुरक्षा बलों को किसी खुफिया सूचना से कहीं अधिक जानकारी होती है। इससे पहले पिछले साल अप्रैल महीने में सुकमा में नक्सलियों के घात लगाकर किए गए हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए थे। ये सभी जवान सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के थे। जवानों की टीम रोड ओपनिंग के लिए जा रही थी। सीआरपीएफ जवान जब खाना खाने वाले थे, तभी घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने जवानों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी।

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