कम लागत से शुरू बड़ा व्यवसाय

डा. संजय पंडित

सहायक निदेशक पोल्ट्री फार्म, सुंदरनगर

मुर्गीपालन में करियर से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने संजय पंडित से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश…

युवाओं के लिए मुर्गीपालन में करियर का क्या स्कोप है?

युवा उद्योग के रूप में इस क्षेत्र में काम कर सकते हैं और बेरोजगार युवाओं के लिए यह एक बहुत अच्छा अवसर है।  स्वरोजगार के  रूप में अपनाने के साथ ही अतिरिक्त आय का साधन है, जिसे बेकार जमीन या फिर बिना ऊपजाऊ  वाली भूमि पर भी शुरू किया जा सकता है।

इस फील्ड में आने के लिए शैक्षणिक योग्यता क्या होनी चाहिए?

इस फील्ड में काम करने वालों को विभाग की ओर से प्रशिक्षण दिया जाता है, जोकि युवा 15 दिन के प्रशिक्षण के बाद यह काम शुरू कर सकते हैं। यह प्रशिक्षण हर माह की पहली से 15 और 16 से 30 तारीख तक  दिया जाता है। कुल मिलाकर एक माह में दो बैच प्रशिक्षण के बैठते हैं। जिसके लिए साधारण पेपर पर आवेदन करने के साथ ही फोटो वाले पहचान पत्र की छायाप्रति सलंग्न करना अनिवार्य है। प्रशिक्षण के बाद ट्रेनी को प्रमाण पत्र भी दिया जाता है। इतना ही नहीं, बल्कि पोल्ट्री फार्म खोलने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी विभाग स्वयं बनाकर देता है।

रोजगार के अवसर या स्वरोजगार के अवसरों बारे बताएं कि कहां उपलब्ध हैं?

स्वरोजगार के लिए एक अतिरिक्त आय का साधन है। किसानों के लिए पोल्ट्री अंडे उत्पादन के लिए होता है। फुल टाइम व्यवसाय के रूप में भी कर सकते हैं। विभाग व सरकार इसमें पूरी सहायता कर रही है। फार्म खोलने के लिए सरकारी अनुदान लाभार्थी को पांच हजार बॉयलर पालन को देंगे। 60 प्रतिशत अनुदान सरकार देती है। एक लाख 48 हजार पोल्ट्री शैड बनाने को और 80 हजार रुपए एक हजार अलौट के लिए दिए जाते हैं। विभाग की ओर से इस दिशा में कुल पांच अलौट दिए जाते हैं। 80 हजार रुपए एक अलौट को पालन के लिए सरकार की ओर से मदद भी दी जाती है।

आमदनी इस फील्ड में कितनी होती है?

यह रेट पर भी निर्भर करता है। वर्तमान में 20 से 30 बर्ड प्रति बर्ड के हिसाब से बचत होती है।

किन उपायों से इस करियर में लाभ कमाया जा सकता है?

अच्छे ढंग से चूजों को पालेंगे और वैज्ञानिक तरीके से काम करें, तो करियर में लाभ कमाया जा सकता है।

मुर्गीपालन में युवाओं को क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

कोई भी काम शुरू करने से पहले प्रशिक्षण अवश्य प्राप्त करें। वैज्ञानिक तरीके से पोल्ट्री का काम शुरू करें। बीड कितनी मात्रा में देनी है, दवाइयां, टीकाकरण समेत अन्य अहम बातों पर गौर करना बहुत ही जरूरी है। वहीं अच्छी नस्ल के चूजे लेने चाहिए, जोकि विभागों की ओर से दिए जाते हैं। सरकारी चैब्रो नस्ल के चूजे ही प्रदेश में वितरित किए जाते हैं। इसका दोहरा लाभ होता है। अंडा मंहगा होता है, रेट 10 से 12 रुपए तक है। वैसे भी यह चूजा 42 से 45 दिनों में डेढ़ किलोग्राम के भार का हो जाता है।

क्या हिमाचल में इससे संबद्ध कहीं पाठ्यक्रम चलता है?

पाठयक्रम विभागीय स्तर पर आधारित है, सुंदरनगर व नाहन हैचरी में पीपी प्रशिक्षण होता है। शिक्षा विभाग के क्षेत्र में पाठयक्रम इस दिशा में अलग से व्यावहारिक और थ्योरी तौर पर नहीं है। अगर ऐसा हो तो युवा और भी ज्यादा जागरूक होंगे।

जो युवा इस करियर में पदार्पण करना चाहते हैं, उन्हें कोई प्रेरणा संदेश दें?

कई ऐसे किसान हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र में 100 चूजों के पालन से शुरुआत की थी और आज वर्तमान में उनके द्वारा चूजों को पालने की संख्या हजारों में हो गई है। यह कम बलागत अच्छा व्यवसाय व बड़ी आमदनी का साधन है।

— जसवीर ठाकुर, सुंदरनगर

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