सफलता का अक्षय योग

हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाई जाती है जिसे आखा तीज भी कहा जाता है। इस वर्ष यह शुभ तिथि 18 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका सुखद परिणाम मिलता है…

आप किसी शुभ काम को शुरू करने की प्रतीक्षा में हैं और चाहते हैं कि इसका परिणाम भी सुखद हो, तो समय निकट है। कहा जाता है कि अक्षय तृतीया को जो भी शुभ काम किए जाते हैं, उनका परिणाम सुखद रहता है। इस बार यह तिथि 18 अप्रैल को आने वाली है। पारंपरिक रूप से अक्षय तृतीया की तिथि भगवान विष्णु के छठे अवतार श्री परशुराम की जन्मतिथि होती है। इस तिथि के साथ पुराणों के अहम वृत्तांत जुड़े हुए हैं, जैसे – सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ, भगवान विष्णु के अवतार नर-नारायण और हयग्रीव का अवतरण, ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव अर्थात उदीयमान, वेद व्यास एवं श्रीगणेश द्वारा महाभारत ग्रंथ के लेखन का प्रारंभ, महाभारत के युद्ध का समापन, द्वापर युग का समापन आदि। कहा जाता है कि वृंदावन के श्री बांके बिहारी जी मंदिर में संपूर्ण वर्ष में केवल एक बार, इसी तिथि में श्री विग्रह के चरणों के दर्शन होते हैं। अक्षय तृतीया एक ऐसी शुभ तिथि है जिसमें कोई भी शुभ कार्य हेतु, कोई नई वस्तु खरीदने हेतु पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ती। विवाह, गृह-प्रवेश जैसे शुभ कार्य भी बिना पंचांग देखे इस तिथि में किए जा सकते हैं। इस दिन पितृ पक्ष में किए गए पिंडदान का अक्षय परिणाम भी मिलता है। अक्षय तृतीया में पूजा-पाठ और हवन इत्यादि भी अत्यधिक सुखद परिणाम देते हैं। यदि सच्चे मन से प्रभु से जाने-अनजाने में किए गए अपराधों के लिए क्षमा-याचना की जाए तो प्रभु अपने भक्तों को क्षमा कर देते हैं और उन्हें सत्य, धर्म और न्याय की राह पर चलने की शक्ति प्रदान करते हैं।

अक्षय तृतीया व्रत एवं पूजा विधि

अक्षय तृतीया सर्वसिद्ध मुहूर्तों में से एक मुहूर्त है। इस दिन भक्तजन भगवान विष्णु की आराधना में विलीन होते हैं। स्त्रियां अपने और परिवार की समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करके श्री विष्णुजी और मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर अक्षत चढ़ाना चाहिए। शांत चित्त से उनकी श्वेत कमल के पुष्प या श्वेत गुलाब, धूप-अगरबत्ती एवं चंदन इत्यादि से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। नैवेद्य के रूप में जौ, गेहूं या सत्तू, ककड़ी, चने की दाल आदि का चढ़ावा करें। इसी दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। साथ ही फल-फूल, बर्तन, वस्त्र, गौ, भूमि, जल से भरे घड़े, कुल्हड़, पंखे, खड़ाऊं, चावल, नमक, घी, खरबूजा, चीनी, साग आदि दान करना पुण्यकारी माना जाता है।

अक्षय तृतीया की पौराणिक कथाएं

एक पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत के काल में जब पांडव वनवास में थे, तब एक दिन श्रीकृष्ण ने उन्हें एक अक्षय पात्र उपहार स्वरूप दिया था। यह ऐसा पात्र था जो कभी भी खाली नहीं होता था और जिसके सहारे पांडवों को कभी भी भोजन की चिंता नहीं हुई और मांग करने पर इस पात्र से असीमित भोजन प्रकट होता था। एक और कथा भी प्रचलित है। कथानुसार श्रीकृष्ण के बालपन के मित्र सुदामा इसी दिन श्रीकृष्ण के द्वार उनसे अपने परिवार के लिए आर्थिक सहायता मांगने गए थे। भेंट के रूप में सुदामा के पास केवल एक मुट्ठीभर पोहा ही था। श्रीकृष्ण से मिलने के उपरांत अपनी भेंट उन्हें देने में सुदामा को संकोच हो रहा था, किंतु भगवान कृष्ण ने मुट्ठीभर पोहा सुदामा के हाथ से लिया और बड़े ही चाव से खाया। चूंकि सुदामा श्रीकृष्ण के अतिथि थे, श्रीकृष्ण ने उनका भव्य रूप से आदर-सत्कार किया। ऐसे सत्कार से सुदामा बहुत ही प्रसन्न हुए, किंतु आर्थिक सहायता के लिए श्रीकृष्ण से कुछ भी कहना उन्होंने उचित नहीं समझा और वह बिना कुछ बोले अपने घर के लिए निकल पड़े। जब सुदामा अपने घर पहुंचे तो दंग रह गए। उनके टूटे-फूटे झोंपड़े के स्थान पर एक भव्य महल था और उनकी गरीब पत्नी और बच्चे नए वस्त्राभूषण से सुसज्जित थे। सुदामा को यह समझते विलंब न हुआ कि यह उनके मित्र और विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का ही आशीर्वाद है। यही कारण है कि अक्षय तृतीया को धन-संपत्ति की लाभ प्राप्ति से भी जोड़ा जाता है।

अक्षय तृतीया शुभ मुहूर्त

वर्ष 2018 में अक्षय तृतीया 18 अप्रैल के दिन होगी। मुहूर्त इस प्रकार है :

अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त – प्रातः 05र्56 से दोपहर 12र्20 तक, 18 अप्रैल 2018

सोना खरीदने का शुभ समय – प्रातर्  05र्56 से मध्य रात्रि के पश्चात 01र्29 बजे तक

तृतीया तिथि प्रारंभ – 03र्45 बजे, 18 अप्रैल 2018

तृतीया तिथि समाप्ति – 01र्29 बजे, 19 अप्रैल 2018

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