स्कूल बसों ने ज्यादा वसूली की तो एक्शन

प्रदेश परिवहन निगम ने दिए सख्त निर्देश; आरटीओ, एसडीएम करेंगे सख्त कार्रवाई, सोया प्रशासन एकदम आया हरकत में, थौंपी नई प्रणाली

धर्मशाला-पालमपुर – लंबे समय से लंबी तान कर सोए सरकार व प्रशासन ने रातोंरात प्रदेश के हजारों अभिभावकों को आफत में डाल दिया है। स्कूल बसों-टैक्सियों में ओवरलोडिंग पर शिकंजा कस दिया, चालान शुरू कर दिए, नई व्यवस्था थोंप दी, पर उसके दुष्परिणाम किस वर्ग पर पड़े या पड़ रहे हैं, कभी सोचने-समझने की कोशिश ही नहीं की। आज स्थिति यह है कि स्कूलों को सेवाएं दे रहे हजारों ट्रांसपोर्टर्स ने बच्चों की संख्या कम करने पर सारा बोझ अभिभावकों  के सिर पर डाल दिया है। पालमपुर, कांगड़ा में रातोंरात स्कूल बस-टैक्सी किराए तीन से चार गुना बढ़ा दिए हैं। जो अभिभावक अपने एक बच्चे को स्कूल लाने- ले जाने के 500 रुपए दे रहे थे, उसको 1500 से 2000 रुपए प्रतिमाह देने का फरमान जारी कर दिए हैं। जिसके दो बच्चे पढ़ रहे हैं, उस परिवार की क्या स्थिति बन रही है वह तो मां-बाप को पता चल रहा है। पर इस सारी किचकिच से सरकार, प्रशासन, पुलिस, स्कूल, बस-टैक्सी आपरेटर से तो चुपचाप निकल कर सारा बोझ, तनाव अभिभावकों पर डाल दिया। अभिभावक पूछ रहे हैं कि क्या यही लोकतंत्र है? क्या आज पेरेंट्स के पास ऐसे लोकतांत्रिक अधिकार ही नहीं हैं कि वे कहीं भी अपनी व्यथा नहीं सुना सकते? मतलब आज अच्छी शिक्षा देना अभिशाप बन गया, क्योंकि अगर आप अच्छे स्कूल में बच्चा भेजना चाहते हैं, तो सरकार के थोंपे ऐसे नियमों से आपको दो-चार होना पड़ेगा, जिसका प्रथम और अंतिम प्रभाव सिर्फ और सिर्फ अभिभावकों पर पड़ेगा। प्रभावित अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल अपनी बस सेवा देगा नहीं, एचआरटीसी के पास निजी स्कूलों को सेवाएं देना शान के खिलाफ है और बस-टैक्सी आपरेटर अपने सारे खर्च पेरेंट्स से वसूलेंगे। हालांकि सरकार ने ये फरमान जरूरी जारी कर दिए हैं कि कोई स्कूल बस-टैक्सी मनमाने दाम वसूलेगी तो उस पर कार्रवाई होगी। एसडीएम-आरटीओ को ऐसी वसूली के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और ऑन स्पॉट छापामारी के आदेश दिए हैं, पर ऐसे निर्देश अमल में कितने लाए जाते हैं और उनका पेरेंट्स को क्या लाभ मिलता है, इसका इंतजार रहेगा।

मनमाने पैसे न दें पेरेंट्स

सरकार निजी स्कूलों से न करे भेदभाव अब तक मासूम बच्चों को स्कूल ले जाने के नाम पर मोटी कमाई कर चुके स्कूल बस-टैक्सी आपरेटरों को अभिभावक मुंह मांगे पैसे न दें। अभिभावक पुराने किराए से दो गुने-तीन गुना पैसे वसूलने पर एसडीएम, आरटीओ व जिलाधीश को शिकायत करें। सरकार ने वसूली के आदेश भी जारी कर दिए हैं। अब तक जो भी नीतियां बनती हैं, उसमें निजी स्कूलों को लाभ देने के नाम पर कुछ नहीं होता। जो भी फायदा पहुंचाया जाता है, वह सिर्फ सरकारी स्कूलों को ही। मुफ्त यूनिफार्म, मिड-डे मील, मुफ्त किताबें, बस पास, फीस आदि जैसी सुविधाएं अगर सरकारी स्कूलों को दी जा रही हैं तो कम से कम सरकारी बसें तो निजी स्कूलों को दें और नियमानुसार किराया वसूलें।

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