चिकित्सा के पर्याय प्रणव पांड्या

पेशे से डाक्टर और गायत्री परिवार के मुखिया डाक्टर प्रणव पांड्या का जन्म 8 नवंबर, 1950 को हुआ। वह गायत्री परिवार के संस्थापक श्रीराम शर्मा आचार्य के दामाद हैं।

शिक्षा और करियर

प्रणव पांड्या ने एमजीएम मेडिकल कालेज इंदौर से 1972 में एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। सन् 1975 में यहीं से उन्होंने एमडी की उपाधि हासिल की। एमजीएम मेडिकल कालेज की स्थापना सन् 1948 में हुई। अमरीका से कई आकर्षक प्रस्ताव आए, पर उन्होंने भारत में ही अपनी सेवाएं देने को प्राथमिकता दी। विद्यार्थी जीवन से ही न्यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजी के प्रख्यात विशेषज्ञों के साथ जुड़कर मार्गदर्शन प्राप्त किया। जून, 1976 से सितंबर, 1978 तक भारत हैवी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड हरिद्वार तथा भोपाल के अस्पतालों के इंटेंसिव केयर यूनिट के प्रभारी रहे। वह भारतीय चिकित्सा संघ के सदस्य भी बने। उन्होंने समय-समय पर रिसर्च पेपर पढ़े व कई कार्यशालाओं व सेमिनारों का आयोजन भी किया। वह युग निर्माण योजना मिशन से 1963 में संपर्क में आए। सन् 1969 से 1977 के बीच गायत्री तपो भूमि मथुरा तथा शांति कुंज हरिद्वार में लगे कई शिविरों में भाग लिया। सितंबर, 1978 में नौकरी से त्यागपत्र देकर स्थायी रूप से हरिद्वार में आकर रहने लगे।

कई महत्त्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं पांड्या

डाक्टर प्रणव पांड्या गायत्री परिवार के संचालक होने के साथ ही हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैं। वह गायत्री परिवार की पत्रिका अखंड ज्योति के संपादक हैं। इसके अलावा पांड्या स्वामी विवेकानंद योगविद्या महापीठम के अध्यक्ष भी हैं।

गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं प्रणव

डाक्टर प्रणव पांड्या गोल्ड मेडलिस्ट एमडी इन मेडिसिन हैं। उन्होंने 1976 में यूएस मेडिकल सर्विसेज के लिए भी क्वालिफाई कर लिया था, लेकिन अपने गुरु पंडित श्रीराम शर्मा के कहने पर प्रणव ने यह मौका छोड़ दिया और भारत में ही रहने का फैसला लिया।

राज्यसभा में नामित होने के दो दिन बाद किया मना

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने डाक्टर प्रणव पांड्या को राज्यसभा के लिए नामित किया था, लेकिन नामित होने के दो दिन बाद ही पांड्या ने राज्यसभा सदस्य बनने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि मैंने अंतरात्मा की आवाज सुनी कि राज्यसभा में बहस का स्तर मेरे लायक नहीं है।

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