पूर्व सरकार पर एक और जांच

शिमला— पूर्व सरकार के खिलाफ वर्तमान सरकार एक और जांच खोलने जा रही है। बागबानी विकास परियोजना में बागबानों को पूर्व सरकार द्वारा बांटे गए पौधों के मामले की जांच होगी। इस बारे में बागबानी विभाग ने कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है और जिन लोगों को पौधे बांटे गए हैं, उनका रिकार्ड खंगालने का काम शुरू हो गया है। बताया जाता है कि पूर्व सरकार में कलस्टर से बाहर बागवानों को पौधे बांटे गए और इसी की जांच वर्तमान सरकार करने जा रही है। कांग्रेस के समय में वर्ल्ड बैंक से 1134 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट मंजूर हुआ था, जिसे शुरू हुए लगभग दो साल का समय हो गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश में बागबानों को देने के लिए सेब के पौधे इटली से मंगवाए जा रहे हैं। पूर्व सरकार ने दो साल में करीब तीन से चार लाख पौधे मंगवाए, जिनमें से कुछ पौधों को यहां अपनी नर्सरियों में तैयार किया जा रहा है, वहीं अधिकांश पौधों की बिक्री बागबानों को कर दी गई है। हर साल इटली से पौधे मंगवाए जाते हैं, जिनको यहां पर 350 से 400 रुपए प्रति पौधे की दर  से बेचा जा रहा है। इसकी अधिक कीमत को लेकर बागबान कई दफा सवाल भी उठा चुके हैं, जोकि इनकी कीमत कम चाहते हैं। मामला यह है कि प्रोजेक्ट के तहत जो कलस्टर बने, क्या उससे बाहर भी लोगों को पौधों का वितरण किया गया। ये पौधे केवल तय कलस्टर के तहत ही बागबानों को दिए जाने थे। यह भी साफ नहीं है कि यहां पर कितने प्लांट्स तैयार किए जा रहे हैं और कितने तैयार करके लोगों को आबंटित किए गए। इस मामले की जांच के साथ सरकार ने इटली से पौधों की खेप कम मात्रा में मंगवाने की सोची है। हालांकि अभी इसे पूरी तरह से बंद नहीं किया जा रहा है, लेकिन चरणबद्ध ढंग से इटली के पौधों को मंगवाने का सिलसिला बंद कर दिया जाएगा। इसमें भी सरकार एक मत नहीं है, जिसे लगता है कि इटली से बेहतर न्यूजीलैंड के पौधे हैं। लिहाजा हो सकता है कि आगामी समय में न्यूजीलैंड से सेब व नींबू प्रजाति के पौधे मंगवाए जाएं। इस प्रोजेक्ट को लेकर पूर्व सरकार द्वारा किए गए प्रत्येक कार्य की जांच करवाई जा रही है और धीरे-धीरे इस पर से परतें उठने लगेंगी। नियमों से बाहर कुछ भी इस प्रोजेक्ट में हुआ होगा तो इस पर कई लोग लपेटे में आएंगे।

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