30 साल पुराने रोडरेज मामले में सिद्धू बरी

नई दिल्ली— उच्चतम न्यायालय ने 30 साल पुराने पटियाला रोडरेज मामले में पंजाब के कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को गैर इरादतन हत्या के आरोप से मंगलवार को बरी कर दिया। न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने 1988 के इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को निरस्त कर दिया तथा श्री सिद्धू को आईपीसी की धारा 304 के तहत गैर-इरादतन हत्या के आरोप से बरी कर दिया। न्यायालय ने, हालांकि उन्हें धारा 323 (चोट  पहुंचाने) का दोषी ठहराया और इसके लिए केवल एक हजार रुपए जुर्माना लगाया। श्री सिद्धू के मित्र रुपिंदर सिंह संधू को दोनों ही धाराओं में बरी कर दिया गया है। पीठ ने गत 18 अप्रैल को इस मामले में सभी संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने खंडपीठ की ओर से 46 पन्नों के फैसले में लिखा है कि ॑एक तो यह मामला 30 साल पुराना है, दूसरा आरोपी और मृतक के बीच न तो पहले से कोई दुश्मनी थी, न ही इस घटना में किसी हथियार का इस्तेमाल किया गया। इन तथ्यों की पृष्ठभूमि में हमारा मानना है कि (सिद्धू पर) एक हजार रुपए का जुर्माना न्यायसंगत होगा। गौर हो कि वर्ष 1988 में श्री सिद्धू का पटियाला में कार से जाते समय गुरनाम सिंह नामक बुजर्ग व्यक्ति से झगड़ा हो गया था। आरोप है कि उनके बीच हाथापाई भी हुई और बाद में गुरनाम सिंह की मौत हो गइ्र। इसके बाद पुलिस ने श्री सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया। बाद में निचली अदालत ने श्री सिद्धू को बरी कर दिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने उन्हें तीन साल कैद की सजा सुनाईथी।

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