इटली से मंगवाएसेब के पौधों में वायरस

शिमला— विश्व बैंक की 1127 करोड़ की परियोजना के क्रियान्वयन को कठघरे में खड़ा करने वाली वर्तमान सरकार को सीआईडी की रिपोर्ट भी मिल गई है। सरकार ने सत्ता में आने के बाद इटली से खरीदे गए सेब पौधों की गुणवत्ता व आबंटन को लेकर सीआईडी को भी जांच सौंपी थी, जिसकी रिपोर्ट सरकार को मिल गई है। सूत्रों के अनुसार सीआईडी ने इन सेब पौधों में वायरस होने की पुष्टि करते हुए इनके आबंटन में पूर्व सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और इसे गलत करार दिया है। अब सरकार इस पर क्या कार्रवाई करेगी, यह देखना होगा। पूर्व सरकार के समय इसके लिए जिम्मेदार लोग शिकंजे में आ सकते हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद से ही यह मामला सुर्खियों में है, जिस पर बागबानी मंत्री महेंद्र सिंह ने पहले ही कई सवाल उठाए थे। उनके सवालों की पुष्टि अब सीआईडी ने भी कर दी है। सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक की ओर से इस संबंध में रिपोर्ट छह अधिकारियों को भेजी गई है, जिसमें उनसे मुख्यमंत्री को इससे अवगत कराने के लिए कहा गया है। सीआईडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पहाड़ी राज्य होने के नाते हिमाचल में बागबानी महत्त्वपूर्ण है, जहां पर सेब उत्पादन का अत्यधिक महत्त्व रहा है। सेब राज्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए सेब की गुणवत्ता बनाने के लिए इटली से दो प्रजातियों के सेब के पौधे मंगवाए गए थे, जिनमें जेरामाइन व रेड विलोक्स शामिल थे। इन पौधों का आयात करने के बाद इनको लाहुल- स्पीति, शिमला, कुल्लू, किन्नौर, सिरमौर व मंडी जिलों का आबंटित किया गया था। गुप्तचर विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि शिमला जिला के चौपाल तथा रोहडू क्षेत्रों में इटली से आयात किए गए पौधों में वायरस होने की सूचना है, वहीं इन पौधों का सही तरह से वितरण भी नहीं किया गया है। इन पौधों की सैंपलिंग हरियाणा स्थित प्रयोगशाला से भी करवाई गई है, वहीं वाणिकी विश्वविद्यालय ने इसका एलिसा टेस्ट करवाया है, जिसके मुताबिक सेब पौधों में वायरस व पेस्ट पाया गया है। इसके अतिरिक्त इन आयात किए गए पौधों के निरीक्षण के लिए भारत सरकार की एक टीम ने भी इसका निरीक्षण किया था, जिसके अनुसार भी इन पौधों में वायरस पाया गया था और बगरोधक स्थलों पर सही मापदंड नहीं अपनाए गए थे। बेशक विश्व बैंक पोषित बागबानी विकास परियोजना पर कई अन्य सवाल भी खड़े हैं, लेकिन सीआईडी से इसकी रिपोर्ट मांगा जाना कुछ और भी संकेत करता है। यह रिपोर्ट आने से पूर्व सरकार के जिम्मेदार लोगों पर मामले भी दर्ज हो सकते हैं, जिसकी पूरी संभावना है। इस मामले को लेकर जयराम सरकार तत्कालीन बागबानी मंत्री व संबंधित दूसरे अधिकारियों की कानूनी तरीके से घेराबंदी कर सकती है। जल्दी ही इस मुद्दे पर सरकार कोई न कोई फैसला लेगी। कोल्ड स्टोर में पड़े हैं तीन लाख पौधे : यहां जानने योग्य यह भी है कि अब भी तीन लाख के करीब और पौधे बागबानी विभाग के पास पड़े हैं, जोकि इटली से आयात किए गए हैं। ये पौधे बद्दी के कोल्ड स्टोर में रखे गए हैं। बागबानों को जो पौधे बांटे गए हैं, उनकी संख्या भी तीन से चार लाख है। ये पौधे पूर्व सरकार के समय ही वितरित कर दिए गए थे, जिनकी ज्यादा कीमत पर भी सवाल उठाए जा चुके हैं। बागबानी मंत्री पौधों की गुणवत्ता से निराश : वर्तमान बागबानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने पौधों की गुणवत्ता के साथ पूर्व सरकार द्वारा बनाए गए कलस्टर पर प्रश्नचिन्ह लगाया था। इसकी गाज कुछ अधिकारियों पर भी गिर चुकी है। यहां इस प्रोजेक्ट के कलस्टर बदलने की भी बात की जा रही है, जिसमें पूरे प्रदेश को शामिल करना है। इसके साथ बागवानी प्रोजेक्ट में सिंचाई की व्यवस्था के लिए भी प्रयास किया जा रहा है जिसके बाद नए सिरे से ये प्रोजेक्ट यहां लागू होगा।

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