थर्मोकॉल प्रतिबंध पर हाई कोर्ट का संज्ञान

शिमला— हिमाचल प्रदेश में थर्मोकोल के इस्तेमाल पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाए जाने की गुहार पर हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने धर्मशाला निवासी अंजन कालिया द्वारा मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लिया है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि थर्मोकोल कई वर्षो तक सड़ता-गलता नहीं है। पत्र के माध्यम से अदालत को बताया गया कि वर्ष 1998 में प्रदेश में प्लास्टिक पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया गया था और हिमाचल पूरे भारतवर्ष में प्लास्टिक बंद करने वाला पहला राज्य बना था, लेकिन प्रदेश में थर्मोकोल के इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया। पत्र में आरोप लगाया गया है कि थर्मोकोल कटलरी का इस्तेमाल आजकल हर जगह देखने को मिलता है। इससे न केवल पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ता है, बल्कि इसके इस्तेमाल से हमारे स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रतिकूल असर पड़ता है। प्रार्थी ने दलील दी है कि प्रदेश में थर्मोकोल पर प्रतिबंध लगाने के बारे में शांता कुमार ने भी राज्य सरकार को प्रतिवेदन किया है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा इस बारे को प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। प्रार्थी ने प्रदेश भर में थर्मोकोल के इस्तेमाल पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है। हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को आदेश दिए थे कि इस मामले में विस्तृत शपथपत्र दायर करे। साथ ही हाई कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई 15 जून को निर्धारित की गई है।

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