पेपर पैटर्न में होगा बड़ा बदलाव

छह पेपर पास न करने पर अगले दाखिले पर लगी रहेगी रोक

शिमला — रूसा में वार्षिक सिस्टम के आधार पर परीक्षा प्रणाली में किए जाने वाले बदलाव छात्रों पर भारी पड़ेंगे। वार्षिक सिस्टम के तहत रूसा में होने वाली परीक्षाओं में 75 फीसदी पेपर छात्रों को पास करने अनिवार्य होंगे, जो छात्र 75 फीसदी पेपर पास नहीं कर पाएंगे, उसे अगले वर्ष प्रवेश नहीं मिल पाएगा। वार्षिक आधार पर छात्रों को आठ के करीब पेपर देने होंगे। इससे पहले सेमेस्टर सिस्टम में जहां छात्र छह महीने बाद होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं में मात्र चार पेपर दे रहे थे, वहीं अब वार्षिक प्रणाली के आधार पर छात्रों को आठ पेपर देने होंगे। इन आठ पेपरों में से 75 फीसदी पेपर पास करने की शर्त सरकार की ओर से गठित पुनर्विचार कमेटी ने वार्षिक आधार पर लागू होने वाले रूसा के लिए तैयार परीक्षा पैटर्न के तैयार ड्राफ्ट में शामिल की है। जो खाका पुनर्विचार कमेटी की ओर से तैयार किया गया है, उसमें सात प्वाइंट में यह 75 फीसदी पेपर पास करने का नियम शामिल किया गया है। इस सुझाव के तहत अगर एचपीयू वार्षिक परीक्षा पैटर्न तैयार करता है, तो रूसा में वार्षिक आधार पर होने वाली परीक्षाओं में छात्रों की आठ में से छह पेपर पास करने जरूरी होंगे। जो छात्र छह पेपर पास नहीं करते, तो उसे दूसरे वर्ष में या अगली क्लास में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। छात्र को पहले वर्ष में ही दोबारा बैठना होगा और दोबारा परीक्षाएं देनी होंगी। एचपीयू को रूसा में बदलाव के लिए सरकार की ओर से कमेटी के ही द्वारा तैयार ड्राफ्ट दिए गए हैं। इन तैयार ड्राफ्ट्स को पूरा रूप देकर सिलेबस और परीक्षा प्रणाली में बदलाव एचपीयू प्रशासन को करना होगा।  रूसा वार्षिक सिस्टम में पहले तय क्रेडिट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन पेपर पास करने के लिए तैयार किया गया यह नियम प्रदेश के हजारों छात्रों के लिए खतरा बन सकता है। इससे पहले भी वर्ष 2014 में रूसा के सेमेस्टर सिस्टम के तहत पहले सेमेस्टर में अधिकतर छात्र फेल हो गए थे, जिसके चलते एचपीयू को नियमों में भी बदलाव करना पड़ा था।

पहले नहीं था यह नियम

रूसा के तहत यूजी में लागू सेमेस्टर सिस्टम में होने वाली परीक्षाओं में कितने पेपर क्लीयर होने चाहिए, इसके लिए कोई तय नियम नहीं था। किसी विषय में अनुत्तीर्ण होने पर छात्र अगले सेमेस्टर में प्रवेश लेकर परीक्षाएं देता रहता है, लेकिन अब छात्रों के लिए आगामी वर्ष में प्रवेश का विकल्प ही दो विषयों से अधिक विषयों में अनुत्तीर्ण होने पर समाप्त हो जाएगा।

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