कारगिल में कै. रामलाल ने सबसे पहले देखे थे दुश्मन

बिलासपुर — पांच मई, 1999 की रात को सबसे पहले दुश्मनों ने दि नाला बटालिग सेक्टर से घुसपैठ की थी, जिन्हें रोकने के लिए सबसे पहले बिलासपुर के हरलोग निवासी कैप्टन रामलाल सामने आए थे। उन्होंने अपनी टीम के साथ दुश्मनों के हैड अली को भी गिरफ्तार कर लिया था। कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य पर बिलासपुर पहुंचे कैप्टन रामलाल ने बताया कि वह कारगिल युद्ध के सबसे पहले ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने दुश्मनों को घुसपैठ करते हुए देखा था। इसकी सूचना उन्होंने अपने हैडक्वाटर दी थी। फिर वहां से फौज पहुंची थी। जहां पर उन दुश्मनों का सर्जिकल स्ट्राइक कर उनके हैड अली को गिरफ्तार किया था। कैप्टन ने बताया कि कारगिल युद्ध 14 मई, 1999 में शुरू हो गया था, लेकिन सच्चाई यह है कि पांच मई की रात को ही जंग छिड़ गई थी। दुश्मनों ने दि नाला में सबसे पहले अपनी घुसपैठ की थी। क्योंकि दि नाला एक ऐसा स्थान था, जहां पर न तो पाकिस्तान और न ही हिंदोस्तान की आर्मी मौजूद थी। इसके चलते दुश्मन वहां पर अपना डेरा जमाने की कगार में थे, लेकिन उन्होंने दुश्मनों के मंसूबे नाकाम कर दिए थे। सच्चाई यह थी कि दुश्मन एक साल से गुफा बना रहे थे, जिसके चलते वह एक साल बाद दि नाला सेक्टर के पास पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने गुफा के रास्ते को भी बंद करने की सोची, लेकिन तब तक जंग छिड़ गई थी। यह गुफा उन्होंने कई किलोमीटर तक खोद दी थी। जंग के दौरान दुश्मनों ने टाइगर हिल की तरफ से भी घुसपैठ करना शुरू कर दी थी, जिसके चलते वह दोनों तरफ से घेर लिए गए थे, लेकिन सभी जवानों ने उन घुसपैठियों को ज्यादा समय तक भारतीय सीमा के भीतर रुकने नहीं दिया।

कोरिया पाक के साथ

कैप्टन ने बताया कि कारगिल युद्ध खत्म होने के बाद 20 जून, 2000 को फ्लैग-डे का आयोजन किया गया। कारगिल में भारत व पाकिस्तान की सेना मौजूद थी। इस दौरान पाकिस्तान के पास कोरिया की खाद्य सामग्री बरामद की गई थी।

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