खनन के खिलाफ फिर बोला जोरदार हल्ला

जुखाला – एसीसी के खनन क्षेत्र में विस्थापितों व प्रभावितों लोगों का आंदोलन शुक्रवार को दूसरे दिन प्रवेश कर गया। इस आंदोलन में सैकड़ों लोग पंजगाईं, धौनकोठी व बरमाणा पंचायत के भाग ले रहे है। विस्थापितों व प्रभावितों द्वारा आयोजित यह आंदोलन दूसरे दिन भी अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। आंदोलन का नेतृत्व इंटक के प्रदेश उपाध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने किया और बरमाणा एसीसी मैनेजमेंट से आगाह किया कि खनन क्षेत्र में भारी व गैर वैज्ञानिक तरीके से विस्फोट बंद किए जाए व माइनिंग के चारों ओर नजदीक लगती रिहायशी बस्तियों का तुरंत अधिग्रहण किया जाए। एसीसी मैनेजमेंट पर यह भी आरोप लगाया कि वो स्थानीय लोगों की बजाय बाहरी लोगों को चोर दरवाजे से नौकरियां दे रही है। जहां तक विकास का प्रश्न है, सीएसआर का करोड़ों रुपए स्थानीय विकास की बजाय चुनिंदा ब्यूरो क्रेट्स व बड़े राज नेताओं के कहने पर खर्च किया जा रहा है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनील गौतम ने भी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हम एडीएम के आश्वासन पर एसीसी के खिलाफ चल रहे आंदोलन को खत्म नहीं, बल्कि स्थगित कर रहे हैं। अगस्त के पहले सप्ताह में जो त्रिपक्षीय वार्ता रखी है, उसमें अगर लोगों की समस्याओं का निवारण नहीं हुआ तो बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। आंदोलन में विस्थापित प्रभावित समिति के अलावा मानव सेवा संस्थान व धौन कोठी लोक विकास समिति के अध्यक्ष अमरजीत व रमेश ठाकुर हैं, ने भी आंदोलन का समर्थन किया। आंदोलन में प्रमुख तौर पर विस्थापित व प्रभावित सभा के पदाधिकारी मोहित गौतम,शिव गौतम, शिव कुमार सिमर, पुरुषोत्तम दत्त, सुंदर लाल सिमर, श्याम लाल गौतम, पवन कुमार सांख्यान, कश्मीरी लाल शास्त्री, श्रवण सिंह सांख्यान, रमेश चंद ठाकुर, सोनू ठाकुर, जगदीश ठाकुर सुनील ठाकुर, बालक राम ठाकुर, गोपी ठाकुर, रतन लाल शर्मा, बाबू राम, मनभरी देवी, संजु देवी, अंजु देवी व हरदेई देवी आदि शामिल थे। भगत सिंह वर्मा ने कहा एसीसी मैनेजमेंट ने पिछले 35 वर्षों में कई 100 करोड़ का मुनाफा कमाया है। मगर उसके बदले में स्थानीय लोगों को रोजगार व दूसरी बुनियादी सुविधाओं से महरूम रखा है। आज भी विस्थापित व प्रभावित परिवारों के सैकड़ों नौजवान रोजगार की तलाश में हैं। मगर एसीसी मैनेजमेंट उनके बजाय बाहरी राज्यों से भिन्न-भिन्न ट्रेड के लिए व इंजीनियर के पदों के लिए भर्तियां कर रही है, जिसका हमारा आंदोलन पूरजोर विरोध करता है।

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