गीयू ममी का रहस्य बताने में दुनिया भर के विज्ञानी नाकाम

रहस्य : 565 सालों से साधना में लीन स्पीति घाटी का बौद्ध भिक्षु अमरीका-इंग्लैंड के लिए बना चुनौती

केलांग— स्पीति घाटी स्थित बौद्ध भिक्षु की ममी का रहस्य दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक भी उजागर नहीं कर पाए हैं। लंबे शोध के बाद अमरीका और इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने भी इस चमत्कारी लामा की साधना और जीवन के रहस्य को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं। हालांकि शोध रिपोर्ट में किए गए सनसनीखेज खुलासों से यह सपष्ट है कि हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में 1453 ई. से साधना में लीन बौद्ध लामा अब भी जिंदा है। चीन सीमा से सटे गीयू गांव में अवतारी लामा सांगा तेंजिन 565 वर्षों से तपस्या कर रहे हैं। इस करिश्माई लामा की ममी को लेकर जारी इंग्लैंड और अमरीका की रिपोर्ट भी चौंकाने वाली है। रिपोर्ट में मृत शरीर के जीवित होने के कई पुख्ता प्रमाण दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह दुनिया की एकमात्र ऐसी ममी है, जो बिना रासायनिक प्रयोग के सुरक्षित है। इसके शरीर पर आज भी प्राकृतिक बाल और नाखून मौजूद हैं। दांत के जबड़े पूरी तरह से जीवित इनसान की तरह हैं। एक्स-रे रिपोर्ट में कहा गया है कि शरीर की हड्डियों के ज्वाइंट पूरी तरह जुड़े हैं। सॉफ्ट टिश्यू जिंदा हैं। चेहरे पर भवें और पलकें अब भी मौजूद हैं। वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट में दावा किया है कि सांगा तेंजिन ने अंतिम सांस 1453 ई. में ली थी। करीब 49 वर्ष की आयु में लगातार तीन माह तक भूखे-प्यासे तपस्या करने के कारण उनकी मृत्यु हुई थी। वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह शोध का विषय है कि 565 साल पहले मृत लामा का शरीर अब भी प्राकृतिक रूप से कैसे सुरक्षित है। जाहिर है कि उपमंडल काजा के अंतिम छोर में बसे गीयू गांव की रहस्यमयी ममी पर बौद्ध समाज की अलग-अलग राय है। वैज्ञानिकों को चुनौती देने वाली यह ममी बौद्ध समाज की आस्था में जीवित लामा हैं। गीयू गांव में चाय का छोटा सा स्टॉल चला रहे सूरज प्रकाश का कहना है कि दुनिया इसे बेशक ममी का दर्जा देती है, लेकिन यह हमारे भगवान हैं। सूरज प्रकाश की मानें तो टुल्कू सांगा तेंजिन ने गीयू गांव को श्राप से बचाया था। इस गांव में सूखे की सबसे बड़ी मार थी। इसके अलावा गांव में बिच्छू इतनी अधिक संख्या में थे कि यहां रहना मुश्किल हो गया था। लिहाजा शापित गांव को बचाने के लिए सांगा तेंजिन सैकड़ों साल पहले तपस्या पर बैठ गए। उनकी घोर अराधना के बाद गीयू गांव में जीवन संभव हो पाया। सूरज प्रकाश का दावा है कि सांगा तेंजिन अब भी मानव जीवन की भलाई के लिए साधना में लीन हैं। मेडिकल की पढ़ाई कर रहे इसी गांव के छेरिंग का कहना है कि दुनिया में एकमात्र प्राकृतिक ममी इसी गांव में मौजूद हैं। तपस्वी सांगा तेंजिंन के बाल और नाखून अब भी बढ़ रहे हैं। चोट लगने पर शरीर से खून निकलना शुरू हो जाता है। छेरिंग का दावा है कि ऐसे में लामा के शरीर को कैसे मृत घोषित किया जा सकता है। सांगा तेंजिन पर लंबा शोध कर चुके स्थानीय थोब्जंग का कहना है कि अब विज्ञान ने भी इसकी पुष्टि कर दी है कि लामा में जीवित होने के कई प्रमाण हैं। हमने देखा है कि उनके बाल तथा नाखून लगातार बढ़ते हैं। बाहर से आने वाले पर्यटक उनके बालों और नाखूनों को काटकर ले जाते थे। इस कारण लामा को शीशे के मंदिर में रखा गया है।

1975 में आईटीबीपी को मिले थे लामा

गांव के लोगों का दावा है कि वर्षों पहले गांव को श्राप से बचाने के लिए तपस्या में लीन सांगा तेंजिन मठ के भीतर साधना करते रहे। वर्ष 1975 के भूकंप से गीयू गांव तहस-नहस हो गया। इस दौरान आईटीबीपी ने बंकर स्थापित करने के लिए अभियान शुरू किया। खुदाई में जुटे आईटीबीपी के जवानों ने मलवे में दबे लामा को देख लिया। कहा जाता है कि इस दौरान ममी के एक हिस्से में कुदाल लगने से खून निकल आया। इसके बाद ममी को गांव से ऊपर ले जाकर मंदिर में रखा गया।

सिर्फ स्पीति में सुरक्षित है जीवित ममी   

वर्ष 2002 में अमरीका तथा इंग्लैंड के वैज्ञानिकों का दल स्पीति पहुंचा था। इनकी रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि मृत लामा का शरीर चमत्कारी है, लिहाजा कई वैज्ञानिकों के घाटी आकर शोध में जुटने की संभावना है। जाहिर है कि सबसे ज्यादा ममी तिब्बत में थीं। चाइना ने असहिष्णुता के चलते सभी बौद्ध ममियों को आग के हवाले कर दिया। इसके चलते अब स्पीति में एकमात्र जीवित प्राकृतिक ममी मौजूद है।

You might also like