टनल के काम में बाधा बना सेरीनाला

मनाली – एशिया की सबसे ऊंची नौ किलोमीटर रोहतांग टनल को सेरीनाला के पानी ने ब्रेक लगा दी है। टनल के मध्य सेरी नाला का पानी चारों तरफ  फैल गया है और 600 मीटर के दायरे में टनल के अंदर ही चश्मे फूट गए हैं, जिस कारण रोहतांग टनल लक्ष्य से चार साल लेट हो गई है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने टनल का निरीक्षण किया। इसका निरीक्षण करने के लिए केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी व राज्य केंद्रीय रक्षा मंत्री ने आना था, लेकिन मौसम ने केंद्रीय मंत्रियों के उड़नेखटोले को बीच रास्ते में ही रोक दिया, जिस कारण वह शुक्रवार को रोहतांग टनल का निरीक्षण करने नहीं पहुंच पाए। इसके बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्वयं टनल का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर,कृषि मंत्री रामलाल मार्कंडेय भी उपस्थित रहे। केंद्र सरकार चुनाव से पहले रोहतांग टनल का उद्घाटन करना चाहती थी और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन करना था। चुनाव में भी इसका श्रेय भाजपा सरकार लेना चाहती थी, लेकिन सेरी नाला के पानी ने भाजपा सरकार की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। शुक्रवार को टनल के विशेषज्ञों ने निरिक्षण के बाद मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि जिस हिसाब से सेरी नाला के पानी को रोकने के लिए समय लग रहा है, उस हिसाब से नवंबर, 2019 से पहले टनल पूरी नहीं होने वाली है। गौर रहे कि रोहतांग टनल के निर्माण का लक्ष्य 2015 रखा गया था।  4083 करोड़ रपुए की लागत से निर्मित होने वाली इस सामरिक दृष्टि से बनने वाली परियोजना के बाद बारालाचा सहित 3 अन्य टनलों का भी निर्माण होना है। जिसके चलते लेह और कारगिल की दूरी 100 किलोमीटर कम होनी है, लेकिन टनल निर्माण के दौरान टनल के मध्य में सेरी नाला का सारा पानी रिस कर टनल के अंदर आ गया है। जिसके बीआरओ ने काफी प्रयास किए, लेकिन पानी नहीं रूक रहा है जिस कारण टनल का निर्माण चार वर्ष लेट हुआ है और अभी भी लोकसभा के चुनाव से पहले टनल का काम पूरा नहीं होगा।

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