नगरोटा में ‘सुपणा इक सुनाणा मैं भी’

पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम की जयंती पर कवियों ने बांधा समां

नगरोटा बगवां— हिमाचल प्रदेश कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी शिमला के सौजन्य से नगरोटा बगवां में पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम की 136वीं जयंती पर साहित्य संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। राज्य स्तरीय समारोह में सभी जिलों के लेखकों, कवियों व साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्थानीय विधायक अरुण मेहरा ने किया। कार्यक्रम में हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग के सचिव डा. कर्म सिंह भी मौजूद रहे। इस दौरान रामपुर की आशा शैली की ‘हुण मैं लिखा करणी पहाड़ी’ काव्य संग्रह तथा ‘चीड़ के वनों में लगी आग’ संस्मरण का विमोचन भी किया गया। समारोह में नीलम शर्मा के हिंदी काव्य संग्रह ‘दस्तक स्मृतियों की’ तथा राज कुमार, सिद्धार्थ व मनीष तन्हा के गजल संग्रह ‘सिसकियां’ और अंजना छलोत्रे के हिंदी काव्य संग्रह ‘मन का भांगड़ा’ का भी विमोचन किया गया। इस दौरान वीरेंद्र शर्मा वीर ने पहाड़ी गांधी पर शोध पत्र पढ़ा। शैली किरण और चंद्र रेखा डढवाल ने कहानी पाठ तथा अशोक दर्द व देवराज ने लघुकथा पाठ किया।  कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कविता पाठ करते हुए नीलम शर्मा ने ‘मैं मंदसौर की निर्भया का इंसाफ  मांगने आई हूं, कवि हृदय पर चोट लगी है, तुम्हें दिखाने आई हूं’ कविता पढ़ी, जबकि गोपाल शर्मा ने ‘सुपणा इक सुनाणा मैं भी, कौड़ा किछ गलाणा मैं भी’ सुनाई। शिमला की साक्षी शर्मा ने ‘गाते-गाते जो जन-जन में देशभक्ति का अलख जगा गए’ तथा नवीन हल्दुनवी ने ‘पहाड़ी गांधी बाबा जी, मुक्का धंधा छाब्बा जी’ कविता के माध्यम से बाबा को श्रद्धांजलि दी। डा. कंवर करतार ने ‘पहलू में भी अपने तो आकर देखिए’, आशा शैली ने ‘मेरे सजदों में बंदगी होती’, अंजना छलोत्रे ने ‘इश्क क्या-क्या आफतें लाता रहा’, विजयी भरत ने ‘अज्ज मुन्नूए दा जन्मदिन, असां गीत गुआणे’ तथा हरिकृष्ण मुरारी ने ‘करदेयां-करदेयां मता किछ गुआई दित्ता’ कविता पाठ कर श्रोताओं की तालियां बटोरी। इसके अतिरिक्त जगजीत आजाद, सोनिया दत्त, सुभाष साहिल, देवराज, आशीष बहल, मोनिका शर्मा, कविता कटोच, भूपेंद्र भूपि, किरण गुलेरिया, रूपेश्वरी शर्मा, अनुजा शर्मा, डा. गौतम व्यथित, द्विजेंद्र द्विज, सुभाष साहिल, प्रकाश चंद, ओमप्रकाश प्रभाकर, रमेश मस्ताना,  कमल हमीरपुरी,  सतपाल घृतवंशी,  मदन हिमाचली आदि ने भी अपने सुरों की महफिल में भाग लिया। इस बीच पहाड़ी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग एक बार फिर दोहराई गई, जबकि बाबा कांशी राम के पैतृक मकान को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की भी मांग उठी।

 

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