नशे पर काम करने वाली सस्थाएं होगी सम्मानित

चंडीगढ़— हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री  कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि युवाओं में नशे के प्रति बढ़ रहे प्रचलन को देखते हुए विभाग ने नशे के खिलाफ  विशेषकर पंजाब राज्य की सीमा से लगते जिलों में एक विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है और इसे विभाग के फ्लैगशीप कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। बेदी सरकार की उपलब्धियों पर आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत नशे की बिक्री रोकना, पीडि़त का उपचार व लोगों को नशे के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव से जागरूक करना शामिल है। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर संबंधित जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में टास्क फोर्स पहले ही गठित है। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है, जिसमें स्वास्थ्य, गृह, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा अन्य विभागों को शामिल किया गया है। श्री बेदी ने बताया कि प्रदेश में गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से 60 नशा मुक्ति केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा सभी जिला अस्पतालों में भी ऐसे केंद्र संचालित हैं। उन्होंने बताया कि नशा मुक्ति के खिलाफ  कार्य कर रहे गैर-सरकारी संस्थाओं को एक राज्य स्तरीय समारोह में सम्मानित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री या केंद्रीय मंत्री को मुख्यातिथी के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। विभाग ने 14 अगस्त, 2018 तक गैर सरकारी संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए हैं और सितंबर या अक्तूबर माह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। श्री बेदी ने बताया कि ऐसी स्वेच्छिक संस्थाओं को विभाग की ओर से अनुदान दिया जाता है। वर्ष 2017-18 के दौरान 22 स्वैच्छिक संस्थाओं को 217.17 लाख रुपए की राशि वितरित की गई है। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष में 230.11 लाख रुपए की राशि का प्रावधान किया गया है। बेदी ने बताया कि नौ श्रेणियों में स्वेच्छिक संस्थाओं को नशे के खिलाफ मुहिम चलाने के लिए सम्मानित किया जाएगा और हर श्रेणी में 3.3 संस्थानों को शामिल किया जाएगा। इस प्रकार कुल 27 संस्थानों सम्मानित होंगे। उन्होंने बताया कि विभाग का वर्ष 2018-19 के लिए बजट 4912 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 6077 करोड़ रुपए किया गया है। उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशनों में बुढ़ापा सम्मान भत्ता, विधवा एवं बेसहारा महिला पेंशन, दिव्यांग पेंशन, निराश्रित बच्चों को वित्तीय सहायता, लाड़ली पेंशन योजना, बौना भत्ता, किन्नर भत्ता एवं 18 वर्ष की आयु तक के स्कूल न जा सकने वाले मंदबुद्धि-दिव्यांग बच्चे, विस्थापित कश्मीरी परिवारों को वित्तीय सहायता आदि सम्मिलित हैं।

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