पंद्रह दिन में दो सिक्योरिटी फंड

शिमला— प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थानों पर छात्रों से लिए गए सिक्योरिटी फंड सालों से वापस न देने पर अब सख्त कार्रवाई होगी। प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने निर्देश दिए हैं कि छात्रों से सालों से विकास और सिक्योरिटी के नाम से जो भी फंड वसूला गया है, उसे वापस किया जाए। नियामक आयोग ने छात्रों को फंड लौटाने के लिए शिक्षण संस्थानों को पंद्रह दिन का समय दिया है। पंद्रह दिन के भीतर निजी शिक्षण संस्थानों ने छात्रों के फंड को वापस नहीं किया, तो आयोग की ओर से सख्त कार्रवाई संस्थान के खिलाफ की जाएगी। बताया जा रहा है कि छात्रों का सालों से फंड न देने की रिपोर्ट में प्रदेश के कई निजी विवि भी लिस्ट में हैं। ऐसे में इन संस्थानों के खिलाफ नियामक आयोग सख्त कार्रवाई के मूड में है। आयोग की ओर से निजी संस्थानों को चेताया गया है कि समय अवधि  पर छात्रों से वसूले गए सिक्योरिटी फंड न देने वाले शिक्षण संस्थानों से जुर्माना भी वसूला जाएगा। विभागीय जानकारी के अनुसार फंड न देने वाले शिक्षण संस्थानों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है। नियामक आयोग की ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार निजी शिक्षण संस्थानों को कक्षा वाइज और छात्रों के एफेडेबिट के साथ आयोग को फंड देने के बाद रिपोर्ट देनी होगी। निजी शिक्षण संस्थान और विवि को आयोग को रिपोर्ट सौंपनी होगी कि उन्होंने कितने छात्रों को उनका फंड वापस किया है। जानकारी के अनुसार राज्य के अधिकतर निजी संस्थानों ने सालों से छात्रों से विकास फंड और सिक्योरिटी फंड के नाम से जमा किया हुआ फंड वापस नहीं किया है। इसके साथ ही इस फंड का इस्तेमाल निजी शिक्षण संस्थानों ने किन कार्यों में इस्तेमाल किया, इसकी भी कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने निजी शिक्षण संस्थानों की ही नहीं, बल्कि सरकारी कालेजों की भी रिपोर्ट तलब की है, जिन्होंने छात्रों से लिए गए विकास फंड का कोई इस्तेमाल नहीं किया है। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से अब सरकारी कालेजों पर भी गाज गिरेगी, जो अभी तक लाखों के बजट को खर्च नहीं कर पा रहे हैं।

संस्थानों में हड़कंप

अभी निजी शिक्षण संस्थानों पर नियामक आयोग की ओर से सिक्योरिटी फंड के बारे में बड़ी कार्रवाई की गई है। ऐसे में अब उम्मीद जताई जा रही है कि आयोग की इस सख्त कार्रवाई के बाद निजी शिक्षण संस्थान पर नकेल कसेगी। आयोग के इस फैसले के बाद निजी शिक्षण संस्थानों में हड़कंप मच गया है।

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