प्रेत दशा : विक्षुब्ध जीवात्मा की दयनीय स्थिति

इस घर में पति-पत्नी और उनके दो बच्चे, कुल चार ही व्यक्ति रहते थे। चारों तब घर में ही उपस्थित थे। घर की स्त्री श्री विलियम्स को एक अलमारी के पास ले गई। यहीं पर वह भूत था, जो दिखाई तो नहीं दे रहा था, पर पूछे गए किसी भी प्रश्न का उत्तर दे रहा था…

-गतांक से आगे…

संन्यास-दीक्षा के बाद तो वह सब कुछ त्यागकर अपने आपको उस तरह अनुभव करता था जैसे मकड़ी अपने बने-बनाए जाले को स्वयं खाकर संतोष अनुभव करती है। तब जिसके पीछे बेटे होते थे, वह उनकी आवश्यकता की संपत्ति उन्हें देकर शेष लोक कल्याण में लगाकर घर छोड़ देते थे और आत्म-कल्याण की साधना में जुट जाते थे। मोहांध व्यक्तियों के प्रेत-योनि में जाने का कोई वैज्ञानिक आधार तो अभी समझ में नहीं आता, किंतु बौद्धिक और प्रामाणिक आधार अवश्य हैं। हम में से अनेक को भूत का सामना करना पड़ जाता है, पर यदि सामान्य लोगों की बात को भ्रम या अंधविश्वास मानें जैसा कि अनेक लोग किसी स्वार्थवश या किसी को धोखा देने के लिए भी भूत-प्रेत की बात कहकर डरा देते हैं, तो भी संसार में कई ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिनमें इस विश्वास को विचारशील लोगों का भी समर्थन मिला है।यह घटना ऐसी ही है और उसे स्वयं श्री जेडी विलियम्स ने स्वीकार भी किया है। मैनचेस्टर के दुल्ली स्ट्रीट के अनेक लोगों ने इस घटना को अपनी आंखों से देखा। श्री विलियम्स महोदय ने इस घटना को तीन नवंबर, 1968 के इंदौर से छपने वाले दैनिक अखबार नई दुनिया में छपाया भी। उनका यह लेख विश्व के अनेक अखबारों में छपा और बहुत समय तक लोगों की चर्चा का विषय भी बना रहा। मैनचेस्टर की दुल्ली स्ट्रीट पर स्थित छोटे से मकान के पास जैसे ही प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री डा. जेडी विलियम्स पहुंचे, घर के लोगों ने उनका स्वागत किया। इस घर में पति-पत्नी और उनके दो बच्चे, कुल चार ही व्यक्ति रहते थे। चारों तब घर में ही उपस्थित थे। घर की स्त्री श्री विलियम्स को एक अलमारी के पास ले गई। यहीं पर वह भूत था, जो दिखाई तो नहीं दे रहा था, पर पूछे गए किसी भी प्रश्न और अपनी उपस्थिति का प्रमाण एक विशेष प्रकार की खट-खट के जरिए दे रहा था। उसके संकेत बड़े ही शिक्षित व्यक्तियों जैसे थे। अंग्रेजी वर्णमाला के प्रथम अक्षर ‘ए’ के लिए वह एक बार (खट-खट) की आवाज करता था और ‘बी’ के लिए दो बार (खट-खट) की आवाज करता था। इसके आगे जो अक्षर जितने नंबर पर पड़ता, उस अक्षर के लिए उतने ही बार बिना रुके खट-खट का उसने संकेत बना लिया था। उसी के माध्यम से वह पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी देता था। यह खेल सारे दिन चलता रहा। घर के दूसरी ओर ऐसी कोई वस्तु नहीं थी कि वहां से खट-खट की आवाज आ रही होती। लोगों ने सारी संभावनाएं पहले ही छानबीन ली थीं। श्री विलियम्स को तो बहुत देर के बाद बुलाया गया था। उनकी पराविद्या में रुचि होने के कारण ही उन्हें सूचना दी गई थी। उन्होंने सब जांच-पड़ताल कर ली, पर उन्हें भौतिक कारण न मिला, जिससे खट-खट का सूत्र समझ में आता। स्त्री ने सर्वप्रथम श्री विलियम्स का परिचय कराया, फिर पूछा-क्या तुम यहां उपस्थित हो? तो भूत ने जवाब में सर्वप्रथम बिना रुके 24 बार खट-खट की (इससे अंग्रेजी के वाई अक्षर की सूचना मिलती है।) फिर थोड़ा रुककर पांच बार (ई), फिर रुककर 19 बार (एस) खट-खट की। इस तरह उसने अंगे्रजी में यस कहकर अपने वहां होने की सूचना दी। इसके बाद श्री विलियम्स ने उससे अनेक  प्रश्न पूछे। भूत ने उनमें से अनेक प्रश्नों के उत्तर दिए। पर ऐसे किसी भी प्रश्न से सहमति प्रकट नहीं की, न ही उनके उत्तर बताए, जो मनुष्य जाति के लिए हितकर नहीं होते। उदाहरण के लिए जुए, शराब व सट्टे संबंधी प्रश्न उसने नहीं बताए। भूत का कहना था कि जिन बातों से वह स्वयं दुखी है, वह बात नहीं बताएगा। पर इससे एक बात स्पष्ट हो गई है कि मनुष्य को मृत्यु के बाद जीवन की अनेक घटनाओं की ही नहीं, भाषा आदि की भी जानकारी रहती है और उनमें भविष्य को भी जानने की क्षमता आ जाती है, जो आत्मा के गुण का ही परिचायक है।

 (यह अंश श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा लिखित पुस्तक ‘भूत कैसे होते हैं, क्या करते हैं?’ से लिए गए हैं।)

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