फिल्मों में आना बचपन का शौक

जाह्नवी

फिल्म ‘धड़क’  की प्रोमोशन में  जी जान से लगी जाह्नवी से  प्रोफेशनल इंटरव्यू में हुई बातचीत के कुछ अंश…

आपकी ‘धड़क’ का लोगों को बेसब्री से इंतजार है। प्रेशर फील कर रही हैं आप?

मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे फिल्मों में आने का ‘धड़क’ जैसी फिल्म करने का मौका मिला। यही मेरे लिए सबसे अहम बात है। देखिए, प्रेशर तो होगा। तुलना भी होगी लेकिन मैं अच्छी चीज पर फोकस करना चाहती हूं। मुझे जितना बड़ा अवसर मिला है, उसका अनुभव लेकर मैं कुछ अच्छा काम करना चाहती हूं। मैं उम्मीद करती हूं कि मुझे आगे भी फिल्में मिलें और बेहतरीन काम करने का मौका मिले।

आपने उस दिन निर्देशक शशांक खेतान को पापा खेतान कहकर संबोधित किया था। किस तरह की बॉन्डिंग है, अपने डायरेक्टर के साथ?

मैं उन्हें अपनी जिंदगी में एक आशीर्वाद की तरह देखती हूं। मैं खुशकिस्मत हूं, जो मुझे अपनी पहली फिल्म में उन जैसा निर्देशक मिला। उससे भी बढ़कर एक ऐसा उम्दा इनसान मिला, जिनसे आपको लगातार सकारात्मक ऊर्जा मिलती रहती है। अभिनय के बारे में मुझे जितना भी पता है, मैंने उनसे सीखा है। उन्होंने न केवल मुझे प्रेरणा दी बल्कि लगातार मेरा सपॉर्ट सिस्टम भी बने रहे।

आपने कब तय किया कि आपको अभिनेत्री बनना है?

मुझे बचपन से ही फिल्मों का जबरदस्त शौक था। मैं बचपन में मजे के लिए बहुत झूठ बोलती थी। कहानियां तो मैं यूं बनाती थी कि पूछो मत। मैं स्कूल में बहुत मोटी हुआ करती थी और एक डांस परफार्मेंस में मुझे नहीं लिया जा रहा था, तो मैंने एक ट्रिक की। मैं वहां जाकर उछलने लगी और मेरा पेट हिलने लगा। टीचर ने जब मुझसे पूछा कि मैं यह क्या कर रही हूं, तो मैंने सफेद झूठ बोलते हुए कहा, ममी-पापा ने शकीरा को बुलाया था, मुझे बेली डांस सिखाने। उन लोगों को मेरी बात पर यकीन आ गया, तो उन्होंने ममी को कॉल करके पूछा शकीरा आई थी, जाह्नवी को बेली डांस सिखाने। हमारे यहां भी भेज सकते हैं क्या। मेरे झूठ से कई बार ममी परेशान हो जाया करती थीं। सच कहूं, तो जीवन को लेकर मेरा नजरिया है, वह मैंने सिनेमा से ही अपनाया है।

आपकी मॉम ने बताया था कि वह आपको लेकर इतनी प्रोटेक्टिव थीं कि नहीं चाहती थीं कि आप फिल्मों में आएं?

यह सच है कि वह नहीं चाहती थीं कि मैं फिल्मों में आऊं, मगर उनका विरोध नहीं था। कहीं न कहीं उन्हें अंदाजा था कि यह घूम-फिरकर यहीं आएगी। वह भी कहीं न कहीं इस हकीकत से भागने की कोशिश कर रही थीं। मैंने जब उनसे अपनी इच्छा जाहिर की, तो वह बोलीं, थोड़ा सोचो, खुद को वक्त दो। फिल्मी दुनिया इतनी आसान नहीं होती। वहां जाकर आपको सिर्फ  लाइन्स नहीं बोलनी होतीं। असल में उनका कहना था कि मैंने पूरी जिंदगी इतनी मेहनत इसलिए की कि मैं अपने बच्चों को आसान जिंदगी दे सकूं । मुझे आसान जिंदगी नहीं चाहिए। मॉम और डैड ने मुझे बहुत कुछ दिया है, मगर मैं अपनी जिंदगी का संघर्ष खुद करना चाहती हूं। अपना हक कमाना चाहती हूं।

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