बस योग्य भी नहीं बनी सतौन-पोका सड़क

पांवटा साहिब —देश को आजाद हुए 71 साल हो गए, आजादी के बाद से ही देश के विकास की उम्मीदें बलवान हुई, तभी से विकास की योजनाएं पूरे देश में चल रही हैं। इन योजनाओं में ग्रामीण क्षेत्रों को मूलभूत सुविधाएं देने की प्राथमिकताएं भी कागजों में दी जाती हैं, लेकिन धरातल पर अभी भी कुछ वैसा देखने को नहीं मिलता जैसा आजादी के परवानों ने देश की आजादी के लिए अपनी जान न्यौछावर करने के समय सोचा होगा। कई ग्रामीण क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। हिमाचल प्रदेश के पिछड़े जिला में शुमार सिरमौर जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में भी वैसा ही नजारा कई स्थानों पर देखने को मिलता है। किसी भी स्थान की भाग्य रेखा, वहां की सड़क को कहा जाता है, लेकिन जिला सिरमौर के दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई सड़कें ऐसी हैं, जो बस तो क्या बरसात के दौरान छोटे वाहनों के चलने के लायक भी नहीं रहती। कई सड़कें बरसात में तीन से चार माह के लिए बंद रहती है। ऐसी ही सड़क पांवटा उपमंडल के सतौन कस्बे से पोका-बाहरक्षेत्र को जाने वाली सड़क है। यहां पर बरसात के दौरान तीन-चार माह तक वाहन नहीं जा सकते। मुख्य कारण सड़क का जगह-जगह से टूटना है। पहले पुल की दिक्कत थी, तीन माह पूर्व सतौन के पास खड्ड में पुल तो बन गया, लेकिन पुल का क्या करें जब आगे की सड़क ठीक नहीं है। बरसात के दौरान स्थानीय वाहन चालक रिस्क लेकर किसी तरह से पोका तक तो छोटी गाडि़यां ले जाते हैं, लेकिन उससे आगे की बारहक्षेत्र तक की तीन किलोमीटर सड़क पैदल चलने लायक भी नहीं है। यह सड़क नाबार्ड के तहत 19 साल पहले बननी शुरू हुई। उसके बाद पीएमजीएसवाई में भी यह सड़क लगभग 14 साल पूर्व आ चुकी है। बावजूद इसके यह सड़क अभी तक बस योग्य नहीं बन पाई है। बरसात के दौरान यदि पोका, कोटगा, भीतरकुई, बाहरक्षेत्र आदि के लोग बीमार पड़ जाएं या किसी गर्भवती महिला को आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचाना पड़े तो ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन जाती है। ग्रामीण डंडे पर कंबल में मरीज को बांधकर करीब 10 से 12 किलोमीटर तक पैदल चलकर सतौन पहुंचते हैं तब कहीं जाकर आगे वाहन मिलता है। क्षेत्र के निवासी बीडीसी पांवटा के पूर्व उपाध्यक्ष कुलदीप शर्मा, प्रेम चौहान, मुंश राम, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र शर्मा, दया राम शर्मा, नरेश चौहान, मदन तोमर व जगदेव तोमर आदि का कहना है कि पीडब्ल्यूडी की लेटलतीफी व लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। बीडीसी पांवटा के पूर्व उपाध्यक्ष कुलदीप शर्मा बताते हैं कि उक्त क्षेत्र के लोगों को अब पता है कि बरसात में उनकी सड़क बहाल नहीं होती इसलिए लोग अब तीन महीने का राशन पहले ही अपने घरों में स्टॉक कर लेते हैं। एक तरह से यह पूरा इलाका अन्य क्षेत्रों से कट जाता है।

पोका तक बहाल की सड़क

उधर इस बारे में लोक निर्माण विभाग शिलाई मंडल के अधिशाषी अभियंता प्रमोद उप्रेती ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर पोका तक का सड़क मार्ग मशीन भेजकर बहाल करवा दिया गया है। वहां छोटे वाहन जा रहे हैं। बारहक्षेत्र तक की सड़क को भी ठीक करवाया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न हो। उन्होंने बताया कि लगातार बारिश के कारण सड़कें फिर से बंद हो रही है, लेकिन विभाग के प्रयास जारी हैं।

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