मिडल स्कूलों में बहाल होगा टीजीटी साइंस पद

हिमाचल प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ की शिक्षा मंत्री के साथ हुई चर्चा में लिया फैसला

पांवटा साहिब— प्रदेश के मिडल स्कूल में पहले की तरह टीजीटी विज्ञान अध्यापक का पद होगा। यह निर्णय शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के साथ हुई हिमाचल प्रदेश विज्ञानाध्यापक संघ की बैठक में लिया गया। बैठक में संघ ने मांग रखी कि पहले की तरह मिडल स्कूलों में टीजीटी विज्ञान का पद होना चाहिए, जिस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस पद को फिर से बहाल कर दिया जाएगा। अब स्थानांतरण या प्रोमोशन पर मिडल स्कूलों में सिर्फ नॉन मेडिकल टीजीटी ही नहीं, बल्कि टीजीटी साइंस टीचर भी तैनाती ले सकेगा। शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रधान शिक्षा सचिव अरुण शर्मा सहित शिक्षा निदेशक एलिमेंटरी, उच्च, प्रदेश परियोजना निदेशक, ओएसडी शिक्षा मंत्री मामराज पुंडीर सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। संघ का नेतृत्व प्रदेश प्रधान अजय शर्मा ने किया तथा उनके साथ राज्य व जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। सबसे पहले संघ के प्रदेश प्रधान ने शिक्षा मंत्री को सम्मानित किया तथा उसके बाद मांग पत्र सौंपा। मांग पत्र पर विस्तार से चर्चा करने के बाद कई मुद्दों पर सहमति प्रदान की गई, जिसमें मिडल स्कूलों में टीजीटी साइंस का पद बहाल करने, 31 जुलाई तक मुख्याध्यापक, प्रधानाचार्य व अन्य पदों पर संभावित पदोन्नति करने, प्रधानाचार्य पद हेतु 1992 के भर्ती व पदोन्नति नियमों में कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। प्रशिक्षित स्नात्तक अध्यापक वर्ग को 15 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करने पर दो अग्रिम वेतन वृद्धियां प्रदान करना, जनजातीय जिलों किन्नौर और लाहुल-स्पीति में विज्ञान पर्यवेक्षक पदों को उपलब्ध करवाने, सेवारत विज्ञानाध्यापकों को एमएससी सीटों की संख्या में बढ़ोतरी तथा एमएससी आईटी एवं एमसीए विषयों को शामिल करने का निर्णय लिया गया।

प्रायोगिक भत्ता बढ़ाने को सहमति

बैठक में तय हुआ कि हिमाचल प्रदेश के अध्यापकों व कर्मचारियों को पंजाब वेतन आयोग के स्थान पर केंद्रीय सरकार द्वारा जारी सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर वित्तीय लाभ प्रदान करने की मांग जेसीसी के माध्यम से सरकार के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इसके साथ ही इस बैठक में विज्ञान अध्यापकों को देय प्रायोगिक भत्ता बढ़ोतरी करने बारे सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई।

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