मिड हिमालयन-2 प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में

धर्मशाला— मिड हिमालयन प्रोजेक्ट के द्वितीय चरण एकीकृत विकास परियोजना को पिछले वर्ष ही सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी। बावजूद इसके डेढ़ साल बाद भी परियोजना का काम शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि प्रदेश सरकार करोड़ों रुपए अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन व अन्य कार्यों पर खर्च कर चुकी है। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना को राज्य के 10 जिलों में क्रियान्वित करना प्रस्तावित है। इसी परियोजना का प्रथम चरण 31 मार्च 2017 को पूरा किया जा चुका है। यहां तक कि प्रथम प्रक्रिया के अंतर्गत पंचायतों का चुनाव भी किया जा चुका है। विश्व बैंक की टीम भी फरवरी 2018 में प्रदेश के उच्च अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री तथा मंत्री से बैठक कर गए हैं और इसमें यह तय हुआ है कि इस प्रोजेक्ट को अप्रैल के प्रथम सप्ताह से चालू कर दिया जाएगा। इसके अनुरूप कार्यालय भी स्थापित कर दिए गए हैं। मुख्य परियोजना निदेशक सोलन तथा क्षेत्रीय परियोजना निदेशक धर्मशाला एवं बिलासपुर तथा मंडलीय कार्यालय 10 जिलों में स्टाफ की तैनाती भी हो गई है। अब अचानक इसी माह प्रोजेक्ट को बंद करने  की सूचना मिलने से परियोजना में कार्यरत कर्मचारियों को विस्थापित होने का डर सताने लगा है। कर्मचारियों को इधर-उधर करने के साथ ही कार्यालयों को बंद करने की कवायद शुरू की जा रही है। ऐसे में छोटे कर्मचारियों, जिनकी संख्या सैकड़ों में हैं, उन पर मुसीबत का पहाड़ टूट चुका है। कर्मचारियों को अन्य विभागों में भेजे जाने के चलते भारी रोष पनपने लगा है तथा प्रदेश सरकार के मंत्रियों व विधायकों से मिलकर गुहार लगा रहे हैं। बावजूद इसके इस गंभीर मामले पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

चुनावी वर्ष में सरकार को उठाना पड़ सकता है नुकसान

मंजूरी मिलने के बावजूद मिड हिमालयन प्रोजेक्ट को बंद करने और उसके बाद अस्तित्व में आई परियोजनाआें को मंजूर करवाने से व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। नए मंजूर प्रोजेक्टों में एक बागबानी और दूसरा वनों से सबंधित हैं, लेकिन दोनों ही परियोजनाएं कांगड़ा व चंबा में नहीं चलेंगी, जिसके चलते प्रदेश के इस बड़े संसदीय क्षेत्र के किसान और बागबान भी प्रभावित होंगे। चुनावी वर्ष में सरकार के इस ढुलमुल रवैये से नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

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