मीनाक्षी लेखन में ही नहीं पहचान खास बेसहारा की भी सबसे बड़ी आस

किताबें लिखने के साथ चला रहीं सेवा ट्रस्ट

नाम : मीनाक्षी चौधरी

पेशाः लेखक

स्थानः शिमला

पति : राकेश कंवर

शिमला— जीवन के कई संघर्ष पार कर सामाजिक क्षेत्र में अनूठी पहचान बना चुकीं मीनाक्षी चौधरी कंवर बेसहारा लोगों के लिए सबसे बड़ी आस हैं। अपनी लेखनी से प्रभावित करने वाली साहित्यकार मीनाक्षी चौधरी कंवर हिमाचल के आईएएस अधिकारी राकेश कंवर की धर्मपत्नी हैं। ब्यूरोक्रेसी के ठाठ-बाठ से कोसो मील दूर इस महान लेखिका का उद्देश्य मानव सेवा और लेखन है। ओजस सेंटर फॉर आर्ट एंड रीडिंग डिवेलपमेंट (ओकार्ड इंडिया) द्वारा हिमाचल की मशहूर लेखिका मीनाक्षी को ‘सृजन सम्मान-2018’ से सम्मानित किया है। विख्यात लेखक स्व. खुशवंत सिंह ने अपने कॉलम में मीनाक्षी चौधरी की छह किताबों के बारे में प्रशंसनात्मक टिप्पणी की थी। उन्होंने उनकी पांगी पर लिखी पुस्तक को बहुत महत्त्वपूर्ण बताया और घोस्ट स्टोरीज की भी बहुत सराहना की थी। घोस्ट स्टोरीज ऑफ शिमला हिल्स, मोर घोस्ट स्टोरीज ऑफ शिमला हिल्स, लव स्टोरीज ऑफ शिमला हिल्स जैसी पुस्तकों के अलावा उन्होंने एक्सप्लोरिंग पांगी हिमालया-ए वर्ल्ड बियांड सिविलाइजेशन जैसी कबायली संस्कृति पर आधारित शोधपरक पुस्तकें और सनशाइन-माय एनकाउंटर विद कैंसर जैसी अपने संघर्ष और अद्भुत जीजिविषा की अंतर्कथा भी लिखी है। सेवा ट्रस्ट सोलन में वरिष्ठ महिलाओं के लिए गत तीन वर्षों से ‘खुशी, डे केयर सेंटर चला रहा है। मीनाक्षी चौधरी ने अब तक अठारह पुस्तकें लिखी हैं।

लेखक के रूप में गर्व का पल

मीनाक्षी बताती हैं कि लेखक के रूप में तब गर्व का समय था, जब उन्होंने लिखी किताब ‘डेस्टिनेशन हिमाचल-ओवर 132 ऑफ बीट एंड 14 पॉपुलर गेटवेज’ पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम को और ‘अ वर्ल्ड विद इन-रिमार्केबल स्टोरी ऑफ अ डॉटर कोपिंग विद अ पेरेंट्स डिमेंशिया’ प्रणब मुखर्जी को भेंट की थी।

शालिनी हिमाचल रेडियो एफएम  की पहली महिला आर जे

मनोरंजन के साथ महिला उत्थान को उठा रहीं आवाज

नाम : शालिनी शर्मा

आयुः 38 वर्ष

पेशाः आरजे

स्थान : भराड़ी

शिमला — ‘मेरी आवाज ही मेरी पहचान है’ ये पक्तियां हिमाचल की पहली आरजे शालिनी शर्मा पर सही बैठती हैं। शालिनी किसी तरह की परिचय की मोहताज नहीं हैं। 11 साल से 95.4 बिग एफएम पर आवाज दे रहीं शालिनी को उनके अलग अंदाज से ही लोग जानते हैं। शालिनी प्रदेश के रेडियो एफएम की पहली महिला आरजे हैं। वह रेडियो से सिर्फ मनोरंजन ही नहीं कर रहीं, बल्कि महिलाओं के उत्थान के लिए भी एक अलग ही कार्य कर रही हैं। शिमला के भराड़ी में रहने वाली शालिनी को कालेज के बाद तक पता नहीं था कि वह एक आरजे केरूप में करियर शुरू करेंगी। शिमला के अलग-अलग स्कूलों में प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद कोटशेरा कालेज से ही बैचलर इन टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री हासिल की। शालिनी ने होटल लाइन में भी कुछ दिन काम किया, पर फील्ड उन्हें अच्छी नहीं लगी। इसी बीच आल इंडिया रेडियो पर वर्ष 2001 के लिए साक्षात्कार हुए, जिसमें इन्होंने माता प्रतिभा शर्मा के कहने पर साक्षात्कार दिया और जब उन्होंने रेडियो पर अपनी आवाज दी, तो उन्हें लगा कि वह इसी लिए बनी हैं। शालिनी को चुनाव आयोग की ब्रांड एंबेसडर बनाने के साथ ही राज्यपाल आचार्य देवव्रत और पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल से भी पुरस्कार मिल चुके हैं। वूमन अचीवमेंट पुरस्कार भी शालिनी को महिलाओं से जुड़े मुद्दों को भी उठाने के लिए दिया गया है। शालिनी का कहना है कि जो भी करियर हम अपनाते हैं, उसे पूरे जज़्बे के साथ अपनाना जरूरी है।

रेडियो पर उठा चुकी हैं कई मुद्दे

आरजे के रूप में शालिनी ने महिला उत्पीड़न चाहे कि वह कोटखाई छात्रा गैंगरेप और मर्डर मामले से जुड़े हो या फिर शिक्षा, सुरक्षा, आत्मरक्षा, हरेक मुद्दे को रेडियो के माध्यम से उठाया है। उन्होंने प्रदेश के पर्यटन से जुड़े मुद्दों को भी एफएम के अपनी आवाज के माध्यम से उठाया है।

‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता’ संस्कृत के इस दिव्य श्लोक में निहित अर्थपूर्ण संदेश को शिरोधार्य करते हुए ‘दिव्य हिमाचल मीडिया समूह’ देवभूमि हिमाचल की नारी शक्ति को सादर प्रणाम करता है। साथ ही बीड़ा उठाता है प्रदेश की उन जागृत महिलाओं को सम्मानित करने का, जो समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता की नई ऊंचाइयां छू रही हैं। ‘दिव्य हिमाचल मीडिया’ ग्रुप हिमाचल की कुछ ऐसी ही वीरांगनाओं को अपने मेगा इवेंट ‘मिसेज हिमाचल’ के ग्रैंड फिनाले में ‘दिव्य हिमाचल’ नारी शक्ति सम्मान से नवाजेगा। कार्यक्रम 20 जुलाई को शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में आयोजित होगा, जहां मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बतौर मुख्यातिथि उपस्थित रहेंगे। पहली कड़ी में आइए नजर डालते हैं सम्मानित होने वाली कुछ हिमाचली महिलाओं की उपलब्धियों पर…

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