मेहनत और जुनून के दम पर बंजर भूमि में सफलता के अंकुर

22 साल की उम्र में इस युवा उद्यमी ने फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का सपना देखा और आज नामचीन खाद्य पदार्थ निर्माता कंपनियां इस युवा उद्यमी के कंधे पर पांव रख कर आसमान छू रही हैं। आज शिबांबू इंटरनेशनल के बीडीएम ब्रांड के खाद्य उत्पाद सफलता की वह गाथा लिख रहे हैं कि देश के साथ-साथ विदेश में भी यह ब्रांड खूब सराहा जा रहा है…

कुछ कर गुजरने की तमन्ना के साथ अगर जुनून मिल जाए, तो बंजर भूमि में भी पसीने की बूंदें मिलकर अंकुर पैदा कर सकती हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है महेश नगर टटेहड़ा के युवा उद्यमी अथर्व चड्डा ने। महज 22 साल की उम्र में इस युवा उद्यमी ने फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का सपना देखा और आज नामचीन खाद्य पदार्थ निर्माता कंपनियां इस युवा उद्यमी के कंधे पर पांव रख कर आसमान छू रही हैं। आज शिबांबू इंटरनेशनल के बीडीएम ब्रांड के खाद्य उत्पाद सफलता की वह गाथा लिख रहे हैं कि देश के साथ-साथ विदेश में भी यह ब्रांड खूब सराहा जा रहा है। यहां तक कि इंग्लैंड व यूएई में ये उत्पाद खास पहचान बना चुके हैं।

शिबांबू इंटरनेशनल के एमडी अथर्व चड्डा ऐसे परिवार में पैदा हुए, जिनकी रगों में ही व्यापार दौड़ता है। कहावत भी है कि मां के पूत पिता पे थोड़ा बहुत नहीं तो थोड़ा-थोड़ा … बस फिर क्या था 22 वर्ष की आयु में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की ऐसी ललक जगी कि वर्ष 1992 में एचपीएमसी का जड़ोल सुंदरनगर में स्थापित यूनिट लीज पर ले लिया और जूस, जैम, शरबत निर्माण शुरू कर दिया। दो साल तक यहां अनुभव हासिल करने के बाद अथर्व चड्डा ने अपने नाना प्रख्यात समाजसेवी व चिंतक विष्णुदास मेहता के सहयोग से शिबांबू इंटरनेशनल फूड प्रोसेसिंग यूनिट की नींव रखी। अथर्व चड्डा की अथाह मेहनत की बदौलत यहां निर्मित बीडीएम ब्रांड के उत्पाद सेना को जाने वाली सप्लाई के साथ यूएई में धूम मचाने लगे। बीडीएम ब्रांड की सफलता के चलते कई नामचीन कंपिनयां इनके पास जॉब वर्क लेकर आने लगीं। आज शिबांबू इंटरनेशनल हिंदोस्तान यूनीलीवर, पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड, डाबर, नेस्ले इंडिया लिमिटेड, आईटीसी, आर्मी पर्चेज आर्गेनाइजेशन जैसी नामचीन कंपनियों को उनके उत्पाद तैयार करके देता है। यही नहीं बल्कि शिबांबू इंटरनेशनल द्वारा डिब्बा बंद फल उत्पाद, डिब्बा बंद सब्जियां, अचार व मसाले इंग्लैंड व यूएई में निर्यात किए जा रहे हैं।

यह उद्योग मौजूदा समय  में करीब दो सौ लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी उपलब्ध करवा रहा है। बकौल अथर्व चड्डा दृढ़ निश्चय के साथ की गई मेहनत कभी बेकार  नहीं जाती। इसे ही वह सफलता का मूलमंत्र मानते हैं।

  अजय ठाकुर, गगरेट

जीवन परिचय

नाम : अथर्व चड्डा

पिता : सुरेश कुमार चड्डा

माता  : मीना चड्डा

शैक्षणिक योग्यता : एमबीए फाइनांस

जन्म तिथि : सात अगस्त, 1974 शिबांबू इंटरनेशनल व एमयू के संचालक सदस्य।

जब रू-ब-रू हुए…

फूड-फ्रूट प्रोसेसिंग को चाहिए विशेष प्रोत्साहन…

कब पता चला कि आपका भविष्य केवल व्यापार के लिए तय है?

व्यापारिक पृष्ठभूमि के परिवार से संबंधित हूं, इसलिए यह तय था कि व्यापार ही करना है। कुछ अलग करने की तमन्ना में वर्ष 1992 में एचपीएमसी का एक यूनिट लीज पर लिया। बस वहीं से रास्ता निकल गया।

अपनी उद्यमशीलता को आप किस तरह देखते हैं और ऐसे कौन से उद्योगपति हैं जो आपके आदर्श हैं?

कड़ी मेहनत के साथ सपने साकार करने की शक्ति ही उद्यमशीलता है। मैं अपने नाना जी श्री विष्णुदास मेहता से बेहद प्रभावित रहा, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में भी सफलता के आयाम स्थापित किए।  व्यापार में मेरे आदर्श मेरे नाना श्री विष्णुदास मेहता ही हैं। साथ ही साथ पिता  सुरेश कुमार चड्डा मेरे आदर्श हैं।

जीवन के सिद्धांत और व्यापार के लक्ष्यों को कैसे संबोधित करेंगे?

जीवन का सिद्धांत बिलकुल सीधा है। बिना परिश्रम आप जीवन में कुछ नहीं पा सकते और व्यापार का लक्ष्य भी यही है कि एक बार आपकी  विश्वसनीयता खत्म हुई तो लक्ष्य भी गया।

इनके बीच सामंजस्य कैसे बैठाते हैं?

परिश्रम करने से ही विश्वसनीयता बनती है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

क्या हिमाचल में स्वरोजगार संभव है?

हिमाचल में सबसे बड़ी समस्या बाजार की है। कई लोग स्वरोजगार के रूप में ऐसे उद्योग शुरू करते हैं, जिनके लिए कच्चा माल भी बाहर से लाना पड़ता है और तैयार माल भी आपको बाहर ही बेचना पड़ेगा। अगर यहां फूड व फू्रट प्रोसेसिंग यूनिट लगाए जाएं, तो इसके बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं। स्वरोजगार अपनाना है तो थोड़ा दिमाग भी लगाना होगा और दिमाग लगाकर स्वरोजगार करना संभव है।

युवाओं को इस संदर्भ में आपके तीन प्रमुख सुझाव?

कड़ा परिश्रम, अर्जुन की तरह बस मछली की आंख पर निशाना और विश्वसनीयता। अगर यह कायम हो गए तो आपको मंजिल पर पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता।

निजी क्षेत्र को हिमाचल सरकार से आशाएं?

उद्योग मित्र माहौल के साथ उद्योगपतियों की समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार को उद्योगपतियों से भी संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि उद्योगपतियों में भी सरकार के प्रति दृढ़ विश्वास पैदा हो सके कि उनकी भी कोई सुनने वाला है।

हिमाचल की उद्योग नीति में आपके तीन सुझाव?

नई इकाइयों के लिए विशेष पैकेज, फूड व फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए युवा उद्यमियों को प्रेरित करने के लिए विशेष नीति, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवा उद्यमियों का कार्य सराहे जाने के लिए भी कदम उठाए जाएं।

सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्वहन में आपकी कंपनी क्या कर रही है और इसे कैसे आगे बढ़ाना चाहेंगे?

जिस ग्रामीण क्षेत्र में मैं बैठा हूं वहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी सबसे बड़ी समस्या है। विशेषज्ञ डाक्टर नहीं हैं। हम यहां एक चैरिटेबल अस्पताल का संचालन कर रहे हैं। यहां बाहर से विशेषज्ञ डाक्टर समय-समय पर बुलाए जाते हैं, ताकि ग्रामीण परिवेश की जनता को भी बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। इसके अतिरिक्त वेद विद्यालयों का संचालन कर संस्कृत को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इन वेद विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। भगवान ने चाहा तो यहां  कुछ करने की तमन्ना है।

हिमाचल की ब्रांडिंग में फू्रट प्रोसेसिंग के वर्तमान ढर्रे को किस तरह सशक्त किया जा सकता है। इस दिशा में आधारभूत परिवर्तन कहां देखते हैं?

फू्रट प्रोसेसिंग हिमाचल की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हो सकता है। बशर्ते सरकार भी फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट को बढ़ावा देने के लिए प्रयत्न करे। हालांकि हिमाचल में उद्योग लगाने के लिए सरकार द्वारा दूसरे राज्यों में जाकर भी ब्रांडिंग की जाती है, लेकिन यह कभी किसी ने नहीं किया कि वहां जाकर बताया जाए कि प्रदेश में सेब, आम व लीची बहुतायात में होते हैं और उद्यमी थोड़े से प्रयास से ही इन्हें हासिल कर अपना उद्यम बेहतर ढंग से चला सकते हैं। इसके लिए सरकार ही अगर बिचौलिए की भूमिका निभाए तो ज्यादा बेहतर हो सकता है।

हिमाचली  शिक्षा और अभिभावकों की दीक्षा में युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्या बदलाव लाने होंगे?

दरअसल हिमाचल में सरकारी नौकरी को ही प्राथमिकता दी जाती है। अभिभावक बच्चों को बचपन से ही सरकारी नौकरी का सपना दिखाते हैं और उन्हें शिक्षा भी यह बता कर दिलाई जाती है कि नौकरी पाने का साधन शिक्षा है। बच्चों को स्वयं सपने देखने दें ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

एक उद्यमी के रूप में आप हिमाचल का भविष्य किन क्षेत्रों में देखते हैं। कहां हिमाचल पीछे देखते हैं?

हिमाचल में पर्यटन, पनविद्युत व फूड प्रोसेसिंग यूनिट में अपार संभावनाएं हैं। शायद इन क्षेत्रों को विकसित करने के लिए शिद्दत से प्रयास नहीं हुआ। पर्यटन इंडस्ट्री को बढ़ावा देना समय की मांग है।

अब तक का अति कटु अनुभव या सबसे सुखद क्षण?

हंसते हुए, शिबांबू इंटरनेशनल की नींव रखना ही सबसे सुखद क्षण रहा है।

सफलता को किन पैमानों पर तोलते हैं या प्रतिस्पर्धी युग में खुद को किस तरह तत्पर रखते हैं?

सफलता का एक ही पैमाना है कड़ी मेहनत, प्रतिस्पर्धी युग में वही आगे बढ़ सकता है जो अपडेट रहेगा।

आपके लिए सुकून या मनोरंजन क्या है?

परिवार के साथ समय बिताना ही सुकून भरा है।

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