लाहुल-स्पीति से शुरू हुई देश में पहली बार हींग की खेती 

कृषि मंत्री डा. राम लाल मार्कंडेय ने किया शुभारंभ, किसानों-बागबानों को मिलेगी सुविधा

घुमारवीं -ईरान, तुर्की, अफगनिस्तान व कजाकिस्तान की तर्ज पर  हिंदोस्तान में भी हींग की खेती होगी। हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति से देश में पहली बार हींग की खेती शुरू हुई। इसका शुभारंभ कृषि मंत्री डा. राम लाल मार्कंडेय ने किया। डा. विक्रम शर्मा ने बताया कि प्रायोगिक तौर पर हींग के बीज स्थानीय लोगों व कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कृषि विज्ञान केंद्र उदयपुर जिला लाहुल-स्पीति में दिए गए हैं। जिन्हें पौध तैयार होने पर विभिन्न स्थानों पर लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि हींग भारत देश में मसालों में अहम स्थान रखता है। भारत दुनिया के कुल हींग उत्पादन का 40 प्रतिशत अपने घरेलू उपयोग में लाता है। जिसे ईरान, तुर्किस्तान व अफगानिस्तान के अलावा कजाकिस्तान से मंगवाया जाता है। हींग का पौधा शुष्क ठंडी मरु भूमि में पैदा होता है। जो ईरान, तुर्की ,कजाकिस्तान, रूस, सीरिया व अफगानिस्तान के ठंडे क्षेत्रों में उगता है। भारत हींग के लिए पूरी तरह से इन्ही देशों पर निर्भर है। हींग का प्रथम बीज भारत में मंगवाने वाले वाणिज्यिक फसलों पर पिछले 17 वर्षों से शोध में लगे डा. विक्रम शर्मा ने बताया कि हींग के लिए हमारे देश में पर्वतीय क्षेत्रों में हिमालयी क्षेत्र उपयुक्त हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष बहुत मुश्किल से हींग का बीज ईरान से मंगवाया था। इसके बाद तुर्की व अफगानिस्तान से भी उन्होंने बीज मंगवाएं है तथा उसे प्रयोगिक तौर पर लगाने के लिए भारत सरकार व प्रदेश सरकारों से आग्रह कर रहे थे। हींग के उत्पादन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से बातचीत करके इस कार्यक्रम को पूरा सहयोग देने की बात कही थी। जिसके चलते कृषि व जनजातीय विकास मंत्री डा. राम लाल मारकण्डा ने लाहौल स्पीति में हींग का प्रथम परीक्षण करने में सहयोग किया। डा. शर्मा ने बताया कि प्रयोगिक तौर पर हींग के बीज स्थानीय लोगों व कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कृषि विज्ञान केंद्र उदयपुर जिला लाहौल स्पीति में दिए गए। जिन्हें पौध तैयार होने पर विभिन्न स्थानों पर लगाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि मंडी क्षेत्र के जंजैहली तथा ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र चंबा जिला के तीसा, किन्नौर के ऊपरी क्षेत्र को भी चुना हुआ है। इस पर जल्द ही प्रयोगिक तौर पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने कृषि मंत्री डा. राम लाल मार्केंडय के साथ दौरा किया तो कुछेक क्षेत्रों में हींग की मिलती जुलती किस्मों को भी चिन्हित किया। इससे इस क्षेत्र में हींग के वाणिज्यिक उत्तपादन की संभावनाएं और भी प्रबल हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आर्थिक स्वावंलब बन की अपार संभावनाएं हैं। जिन्हें मात्र कृषि बागबानी द्वारा ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को भी हींग की खेती की संभावनाओं से अवगत करवाया है।

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