शक्तिपीठों में लाखों की पुरानी करंसी बेकार

नहीं बदले 500-1000 के नोट, न सरकार कुछ कर रही और न ही प्रशासन

ऊना— हिमाचल के शक्तिपीठों में नोटबंदी खत्म होने के बाद चढ़ावे के तौर पर मिली लाखों रुपए की राशि बेकार पड़ी हुई है। मंदिर न्यास के स्ट्रांग रूम में यह राशि है, जिसका अभी तक इस्तेमाल नहीं हो पाया है। अब यह राशि मंदिर न्यासों के लिए सिरदर्द बन गई है। हालांकि इस राशि को लेकर मंदिर न्यास की ओर से जिला प्रशासन व सरकार से भी पत्राचार किया गया था, बावजूद इसके यह राशि मंदिर न्यास के कोनों में ही पड़ी है। अब इस राशि को मंदिर न्यास न ही खर्च पा रहे हैं, न ही कहीं पर प्रयोग कर पा रहे हैं, क्योंकि 500 और 1000 रुपए के नोटों की यह कंरसी बंद हो चुकी है। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी, श्रीनयनादेवी व ज्वालाजी में करीब सात लाख की राशि पुरानी करंसी की है। इस राशि का कोई भी प्रयोग नहीं हो पा रहा है। सरकार के ध्यान में भी यह मसला है, बावजूद इसके यह राशि इस्तेमाल नहीं हो पाई है। सरकार को इस राशि को ट्रेजरी या फिर आरबीआई में जमा करवाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए थे। चिंतपूर्णी में करीब पांच से छह लाख, श्रीनयनादेवी में चालीस से पचास हजार और ज्वालाजी में करीब 20 से 25 हजार रुपए की राशि है। बताया जा रहा है कि प्रदेश के अन्य शक्तिपीठों में भी इस तरह की पुरानी करंसी की राशि पड़ी हुई है, जो बेकार पड़ी हुइ है। मंदिर न्यास की ओर से इस राशि को एक्सचेंज करवाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन समयसीमा निकल चुकी थी। बहरहाल प्रदेश के कई शाक्तिपीठों में पुरानी करंसी के लाखों रुपए की करंसी बेकार पड़ी है।

वर्ष 2016 में बंद हुए थे नोट

आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा हुई थी। इसके बाद 30 दिसंबर तक पुराने नोट जमा करवा सकते थे। सरकार की ओर से 31 मार्च, 2017 तक पुरानी कंरसी बदलने के लिए तारीख तय की। चंडीगढ़ में यह राशि बदली जानी चाहिए थी, लेकिन मंदिर न्यास को बाद में भी कुछ राशि चढ़ावे के तौर मिली। इसके जमा करवाने के लिए बाकायदा घोषणा पत्र भी देना पड़ना था।

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