श्मशान बने कोटला में फिर लौटी जान, सपनों का गांव बसा

ग्रामीणों ने कड़ी मेहनत-बुलंद हौसलों से लिखी नई इबारत, दो साल पहले भीषण अग्निकांड ने मचाया था तांडव

सैंज – पहाड़ों से भी ऊंचा कोटला के ग्रामीणों का हौसला है। श्मशान बने गांव में कोटला के लोगों ने नई इबारत लिख दी है। 15 नवंबर, 2015 की रात को भीषण अग्निकांड में तबाह हुआ कुल्लू जिला का कोटला गांव फिर नए रूप में बस गया है। पहाड़ी संघर्ष के पर्याय बने कोटला के तमाम ग्रामीणों ने हाड़तोड़ मेहनत कर दुखों के पहाड़ से टक्कर लेकर एक मिसाल पेश की है और हू-ब-हू वैसा ही सपनों का गांव स्थापित किया है। ‘दिव्य हिमाचल’ ने कोटला गांव का दौरा कर अपनी आंखों से हर नजारा देखा। ग्रामीणों को अभी भी सरकार व प्रशासन से रंज है। हालांकि नब्बे फीसदी मकानों को अंतिम मूर्तरूप दे रहे हैं  फिर भी प्रभावित परिवार सरकार से अपनी मांगों को लेकर आस लगाए बैठे हैं। कोटला गांव के प्रभावित परिवारों के सदस्य दलीप सिंह नंबरदार, चंद्रादेवी, यशपाल, नीरत सिंह, दिवान सिंह, गुलाब सिंह, पूर्व प्रधान सोहन सिंह, वेद राम व शेर सिंह महंत ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि अग्निकांड उन्हें उम्र भर का जख्म दे गया है, परंतु प्रदेश का प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘दिव्य हिमाचल’ कोटला गांव का हमराही बना और कंधे से कंधा मिलाकर इस दिशा में कदम बढ़ाया। ग्रामीणों ने बताया कि अग्निकांड के दौरान विभिन्न संगठनों ने दान के जरिए जो 29 लाख रुपए रेडक्रास में जमा किए हैं, उन्हें प्रभावित परिवारों में ही बांटा जाए। गांव के समाजसेवी शेर सिंह कारदार ने बताया कि वे इस संबंध में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से लारजी में मिले और मुख्यमंत्री ने उपायुक्त को इस बारे में उचित दिशा निर्देश भी दिए हैं। उल्लेखनीय है कि 15 नवंबर, 2015 को कुल्लू के कोटला गांव में वर्षों पुराना इतिहास देवी-देवताओं के प्रमुख निशान और कई दुर्लभ वस्तुएं आग में तबाह हो गई थीं। सरकार, प्रशासन, दिव्य हिमाचल व ग्रामीणों की अपनी ऐच्छिक निधि से फिर कोटला गांव इसी मूर्तरूप में स्थापित हुआ। बहरहाल ,कोटला के ग्रामीणों ने श्मशान बनी भूमि पर गांव स्थापित कर नई इबारत लिखी है।

You might also like