श्रीरेणुकाजी में बताया गुरु-शिष्य का महत्त्व

ददाहू, श्रीरेणुकाजी – तीर्थ श्रीरेणुकाजी में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर यहां स्थित तीनों अखाड़ा आश्रम में बाहरी राज्यों से आए अनुयायिओं का गुरु पूजा को तांता लग गया। बारिश के बावजूद तीर्थ श्रीरेणुकाजी में गुरु पूर्णिमा की आस्था बरकरार रही तथा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड आदि राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं, शिष्यों ने अपने-अपने गुरुजनों की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान आदि उदासीन बड़ा अखाड़ा निर्वाण आश्रम में महंत श्री रणेंद्र मुनि जी महाराज ने अनुयायियों को गुरु-शिष्य परंपरा की महत्त्वता बताई। वहीं संतों के प्रवचन का दौर चला। वहीं ब्रह्मचारी आश्रम में स्वामी दयानंद भारती ने अनुयायिओं को आशीर्वाद दिया, जबकि सन्यास आश्रम में मोहन पुरी ने शिष्यों को गुरु पूर्णिमा का मर्म समझाया। इसके अलावा दग्योन्न ब्रह्मचारी आश्रम में बाल ब्रह्मचारी स्वामी बालानंद जी के दर हजारों शिष्यों और अनुयायियों का तांता लगा। जंगल के बीच इस क्षेत्र में बाल ब्रह्मचारी जी का आलौकिक प्रताप फैला है। इस दौरान अखाड़ा आश्रमों में विशाल भंडारों का भी दौर चला, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। उधर पंडित नितेश शर्मा ने बताया कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह गुरु और शिष्य के आदर्श को बताता है। आज के दिन चारों वेदों के ज्ञाता वेद व्यास का पूजन किया जाता है। आज के दिन ही महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था और उनके ही सम्मान में गुरु पूर्णिमा का पुण्य त्योहार मनाया जाता है। आज के दिन अपने माता-पिता बड़े भाई बहन के पूजन का भी विधान है, क्योंकि बच्चों के सबसे पहले गुरु उनके माता-पिता ही हैं। भविष्य पुराण के अनुसार आज के दिन तीर्थ स्थान में स्नान करके गुरु की पूजा करनी चाहिए। आज के दिन पितरों का तर्पण करने का भी बड़ा महत्त्व होता है। आज के दिन फल-फूलों से और मामला पहनाकर गुरु की पूजा करनी चाहिए। वस्त्र और दक्षिणा देने का भी विधान है।

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