सदाशिव मंदिरःग्रामीणों में बैठकों का दौर

 जोल —सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल सदाशिव मंदिर का सरकार द्वारा अधिग्रहण करने की मुहर लगने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मंदिर के अधिग्रहण को लेकर गांव बही(तलमेहड़ा) में ग्रामीणों की बैठकों का दौर जारी रहा। वहीं सरकारीकरण को लेकर भी चर्चाओं का माहौल गर्म रहा। इस ऐतिहासिक मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। श्रद्धालुओं को सुविधाएं देने के लिए वर्ष 1989 से ग्रामीणों द्वारा कमेटी का गठन किया गया है। तत्कालीन समय से कमेटी के प्रतिनिधि ही मंदिर का रखरखाव कर रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए ठहरने व लंगर आदि की व्यवस्था भी की गई है। बताया जा रहा है कि मंदिर पांडवों के इतिहास काल से जुड़ा हुआ है। इस प्राचीन मंदिर में पांडवों ने शिवलिंग को अज्ञातवास के दौरान स्थापित किया था। जिसके चलते इस मंदिर का महत्त्व बरकार है। बताया जा रहा है कि प्रदेश सरकार की करीब 22 कनाल भूमि पर यह मंदिर बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार मंदिर को सरकारी भूमि पर होने का हवाला देकर सरकार से इसके अधिग्रहण करने की मांग उठाई। जिस पर अब मौजूदा सरकार ने इस मंदिर को अधिग्रहण करने की मुहर लगा दी है। सरकार द्वारा इसे सरकारी दायरे में लेने के लिए तमाम औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। जिसके बाद मंदिर सरकार के अधीन हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थलों व इतिहास में सदाशिव मंदिर का नाम उल्लेखित है। जिसे पांडवकाल समय से स्थापित बताया जाता है। इस मंदिर में हिमाचल, पंजाब, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा से श्रद्धालुआ नतमस्तक होने आते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी होती हैं। सदाशिव मंदिर कमेटी के पूर्व प्रधान राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि ग्रामीणों की लंबे समय से मांग रही है कि सदाशिव मंदिर को सरकारी दायरे में लिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस प्राचीन मंदिर को सरकारी दायरे में लेने का फैसला लेकर ऐतिहासिक फैसला किया है। जिससे अब श्रद्धालुओं को सरकारी तर्ज पर हर सुविधा उपलब्ध हो पाएगी। जिससे कुछ लोगों की मनमानी पर भी अंकुश लग पाएगा। उन्होंने इसके लिए पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर का आभार जताया है। वहीं इस संबंध में मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन प्रवीण शर्मा ने इस प्राचीन मंदिर को सरकारी दायरे में लेने पर विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि यह ताना-बाना राजनीतिक प्रतिशोध की साजिश के अंतर्गत रचा गया है। जिसके चलते श्रद्धालुओं की आस्था व विश्वास को लेकर अधिग्रहण मामले की लड़ाई हर उचित मंच पर लड़ी जाएगी।

 

You might also like