हंसाने के लिए मजबूर कर देगा सीरियल ‘नमूने’

सोनी सब पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक ‘नमूने’ में परेश गनात्रां  एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। पेश हैं परेश से उनके शो को लेकर हुई वार्ता के प्रमुख अंश…

अपने किरदार के बारे में बताएं?

वह बहुत ही मजेदार किरदार है। आपको कहीं भी ऐसा इनसान नहीं मिलेगा, जो लोग निःस्वार्थ होते हैं, हमेशा मदद करना चाहते हैं और जरूरत से ज्यादा करते हैं। यह किरदार साधारण सा है, बिना किसी परत के। ऐसे किरदार निभाना अच्छा लगता है, क्योंकि उसके लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं होती है। आपको बस मुस्कराना है और अपनी लाइनें बोलनी हैं।

कॉमेडी में आपकी प्रेरणा कौन हैं?

कई सारे हैं, महबूब साहब से लेकर चार्ली चैपलिन और जॉनी लीवर साहब तक। मैं न केवल उनसे प्रेरणा लेता हूं, बल्कि वह जिस तरह से किरदारों गढ़ते हैं उनसे भी सीखता हूं।

क्या कोई चुनौती थी?

एक ही चुनौती का सामना करना पड़ा कि पीएल देशपांडे वाकई बहुत बड़ा नाम हैं। पिछले कई सालों में उन्होंने जिस तरह का काम किया और उनके द्वारा लिखे गए चंदू जैसे किरदार के साथ न्याय कर पाना, जो कि पहले ही लोगों के दिलों में अपनी जगह बना चुका है- आप ऐसी गुस्ताखी नहीं कर सकते कि उसे स्क्रिप्ट के अनुसार न निभाएं।  आप किरदार और अपने अभिनय से बाहर नहीं जा सकते।

आप कुछ एपिसोड की शूटिंग कर चुके हैं? वह कैसे रहे?

वह शानदार रहे क्योंकि ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति को निभा पाना काफी मुश्किल है, जो कि हमेशा अच्छा बने रहना चाहता है। क्रिएटिव, लेखक, निर्देशक और कलाकारों की टीम में ऐसे लोग हैं जो हमेशा अधिक और बेहतर काम करना चाहते हैं। एक कलाकार के तौर पर आपको लगता है कि आप बेहतर कर सकते हैं। इस शो में लोग सुझाव देने के लिए स्वतंत्र हैं

आपने पहले थियेटर किया है और आप पीएल देशपांडे से वाकिफ  हैं। क्या आप पर उनके द्वारा लिखे गए किरदारों को निभाने का दबाव था?

मैंने बताया, यह एक चुनौती थी। मैं दबाव में नहीं था, क्योंकि मुझे लगता है कि एक कलाकार के तौर पर आपको कोई भी किरदार निभाने के लिए तैयार रहना चाहिए। कोई किरदार अच्छी तरह लिखा गया है तो आपको जिम्मेदारी महसूस होती है, खासतौर से जबकि वह पीएल देशपांडे द्वारा लिखा गया हो।

आप चंदू से कितना बेहतर जुड़ पाए हैं?

आंशिक रूप से हां। चंदू कुछ ज्यादा ही स्वार्थरहित हैं और वास्तविक जीवन में मैं इतना स्वार्थरहित नहीं हूं। आज के समय में दोस्त, परिचित और जानने-पहचाने वाले लोग और रिश्ते ज्यादातर लेन-देन पर टिके हैं।

सोनी सब पर लौटकर कैसा महसूस हो रहा है?

सच कहूं तो मैं सोनी सब से कहीं नहीं गया। आखिरी शो जो मैंने किया था, वह ‘चिडि़याघर’ था, जो कि पहली अक्तूबर को बंद हुआ था। इसके बाद मैंने दो फिल्में कीं। सोनी टीवी एक घर की तरह है। मैं कहीं नहीं गया।

क्या खास वजह है जो आपको इस भूमिका के लिए प्रेरित किया?

 मुझे फोन आया और पीएल देशपांडे पर शो के बारे में बताया तो मैंने किरदार के बारे में पूछे बिना हां कर दिया और मैंने उसे निभाने के लिए हामी भर दी। यह उनका काम, उनका व्यक्तित्व है। पीएल देशपांडे के नाम से इसे मजेदार बना दिया।

क्या दर्शक आपके अलग पहलू को देख पाएंगे?

हां, आप देखेंगे कि परेश अलग होने की कोशिश कर रहा है, चंदू के रूप में नहीं बल्कि एक कलाकार के रूप में। यही बात मेरे लिए महत्त्व रखती है।

— अजय शर्मा, दिल्ली

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