हीमोफीलिया…डर कर नहीं, अब डटकर

आईजीएमसी में 16 बच्चों का चल रहा इलाज, 100 एक्सट्रा टीके मंगवाए

शिमला – हिमाचल में हर तरह की बीमारी छोटे बच्चों को अपनी चपेट में ले रही है। हीमोफीलिया भी उसमें से एक है, जो ज्यादातर बच्चों को अपने लपेटे में ले रही है। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में इन दिनों 16 ऐसे बच्चों का इलाज चल रहा है, जो हीमोफीलिया की बीमारी से ग्रसित हैं, जिनकी स्थिति सामान्य नहीं है। हालांकि हीमोफीलिया के मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के इलाज में कोई बाधा न आए इसके लिए हीमोफीलिया के मरीजों के लिए एक्सट्रा सौ इंजेक्शन मंगवा दिए हैं। जैसे ही अस्पताल में नया कोई मामला हीमोफीलिया का आता है तो उनका इलाज फ्री में किया जाएगा। इससे पहले आईजीएमसी में हीमोफीलिया की दवाइयों का एक्सट्रा स्टॉक नहीं रखा जाता था, लेकिन अब अस्पताल के स्टोर में एक्सट्रा स्टॉक मंगवाना पड़ेगा। अगर हीमोफीलिया के मरीजों को तुरंत इलाज नहीं मिलता है तो प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हीमोफीलिया के मामले बरसात में और बढ़ जाते हैं। इस बीमारी के ज्यादा फैलने का कारण यह बताया जाता है कि बरसात में रक्त बहाव की मात्रा अधिक बढ़ जाती है। चिकित्सकों के अनुसार हीमोफिलिया एक अनुवांशिक बीमारी है, जो माता-पिता से होने वाले बच्चे में जा सकती है। यह बीमारी पुरुषों में ज्यादा देखने को मिलती है। आईजीएमसी के चिकित्सकों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति हीमोफीलियर से पीडि़त होता है, और उन्हें थोड़ी बहुत चोट लग जाती है, तो ऐसे में मरीजों का खून बहना नहीं रुकता। चिकित्सकों के अनुसार हीमोफीलिया की बीमारी घातक भी हो जाती है। कहा जाता है कि इस बीमारी से छोटे बच्चों की जान को ज्यादा खतरा रहता है। हैरानी की बात है कि जहां पहले हीमोफीलिया के दो से चार मामले ही सामने आते थे वहीं, अब पिछले एक महीने से 16 मासूमों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल में पहली बार हीमोफीलिया के इंजेक्शन फ्री में मरीजों को दिए जा रहे हैं, जबकि इससे पहले आईजीएमसी में मरीजों को टेस्ट और इलाज के लिए चार से पांच हजार रुपए खर्च करने पड़ते थे।

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