गरीब गुरबत से निकले… यही असली आजादी

 देश की आजादी के बाद भले ही भारत वर्ष अन्य देशों की तर्ज पर

विकास की दिशा में आगे बढ़ा हो, परंतु देश के युवाओं को आजादी के 69 वर्ष बाद अभी भी देश व प्रदेश की सरकारों से उनके विचारों के अनुसार सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। अभी भी देश का युवा अन्य देशों की तर्ज पर रोजगार के नाम पर सड़कांे पर भटक रहा है। देश के युवाओं की नजर में आजादी के मायने क्या हैं इस बात को लेकर ‘दिव्य हिमाचल’ ने जिला के युवाओं से राय ली तो अलग-अलग विचार युवाओं ने प्रस्तुत किए…

अपने तरीके से जी रहे जीवन

विनोद कुमार का कहना है कि आजादी के बाद हम अपने तौर तरीकों से अपना जीवन व्यतीत कर सकते हैं, आजादी के बाद हम अपने रोजगार व स्वरोजगार के लिए स्वतंत्र हैं और अपनी काबिलीयत के अनुसार रोजगार पाकर देश व अपना विकास कर सकते हैं।

स्वतंत्रता सेनानियों के कर्जदार

अवनेश कुमार का कहना है  कि आजादी दिलाने के लिए हम स्वतंत्रता सेनानियों के हमेशा कर्जदार रहेंगे। उन्होंने बताया कि आजाद होने के कारण ही हम स्वतंत्र हैं और अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जी सकते हैं।

अपने कर्त्तव्यों को समझकर करें काम

रजत कुमार का कहना है कि आजादी के लिए जिन वीर योद्धाओं ने अपना लहू बहाया था आज की पीढ़ी उसे भूलाती जा रही है। साथ ही हमें अपने कर्त्तव्यों को समझकर अपना काम सही करना चाहिए तभी देश आगे बढ़ेगा।

आज भी राजनीतिज्ञों के गुलाम

रमन शर्मा का कहना है कि आजादी तो मिल गई है , लेकिन आज भी हम एक तरह से गुलाम ही हैं। आज के दौर में राजनीतिज्ञों के हम गुलाम बनकर रह गए हैं। हम मत का प्रयोग कर हम नेताओं को विकास करने के लिए चुनते हैं, लेकिन असल में वे लोग ही भष्ट्राचार करते हैं।

भ्रष्टाचार देश के लिए धब्बा

अमित कुमार का कहना है कि ब्रिटिशों से तो हम आजाद हो गए हैं, लेकिन अव्यवस्था और भ्रष्टाचार से हम गुलामी की जिंदगी जी रहे हैं। हमारे आसपास जनता से जुड़े कार्यों में सर्वाधिक भ्रष्टाचार होता है जो कि देश पर एक धब्बा साबित हो रहा है।

अपना देश छोड़ विदेशों में कर रहे नौकरी

अभिषेक शर्मा का कहना है कि आजादी के साथ बापू गांधी ने अंखड भारत का सपना देखा था, लेकिन हम युवा इस सपने को अलग तरीके से साकार कर रहे हैं। आज का युवा देश में सब कुछ होने के बावजूद भी विदेशों में ब्रिटिशों का गुलाम बनने के लिए लाखों रुपए खर्च कर रहा है।

 

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