गोरों से आजादी मिली…गरीबी से अभी बाकी

इस वर्ष 15 अगस्त को देश जहां 72वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देश अंग्रेजों की गुलामी से तो आजाद हो गया, लेकिन अभी भी देश राजनीतिक द्वेष, जातपात, भ्रष्टाचार, धर्म की जंजीरों में जकड़ा हुआ है। हिमाचल में युवाओं के लिए आजादी के क्या मायनें हैं। वे आजादी को किस प्रकार देखते हैं। इसे लेकर युवाओं के विचार जाने तो इन्होंने यूं बेबाकी से रखें अपने विचार…

राजनेताओं से अब भी गुलाम

संतोषगढ़ में गणपति जिम के संचालक दिलीप डोजी का कहना है कि हम अंग्रेजों से तो मुक्त हो गए, लेकिन कुछ राजनेताओं ने अपने स्वार्थों के लिए अब इंडिया को अपना गुलाम बना लिया है। भारत को अभी भी ऐसे लोगों से आजादी लेनी बाकी है।

बुराइयों का अंत नहीं

दुलैहड़ के युवक मंडल के प्रधान नितीश शर्मा का कहना है कि भारत आजाद तो है फिर भी झूठ फरेब की राजनीति ने जनता के अधिकारों को उनके वंचित करके रख दिया है। भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों का भी अभी तक अंत नहीं हुआ है।

अफसरशाही ने जकड़ा

पूबोवाल के युवक दीपक शर्मा का कहना है कि अफसरशाही की जंजीरों ने अभी तक भारत को जकड़ रखा है। इससे आम जनता के अधिकार दब रहे हैं। अफसर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को प्रताडि़त करते रहते हैं, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है।

सख्ती से लागू हों नियम

सलोह के चंदन शर्मा ने कहा कि आजाद भारत में संवैधानिक अधिकारों व कर्त्तव्यों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। ऐसी व्यवस्थाओं में कई प्रकार की कमियां देखने को मिलती हैं। कमियों के सुधार से ही भारत को पूरी तरह से आजाद माना जाएगा।

जात-पात ने बांटा देश

पंडोगा गांव के विकास राणा ने कहा कि राजनीतिज्ञों ने देश के धर्म संप्रदाय को जातिपाति में बांटकर रख दिया है। आरक्षण देने से हर वर्ग एक दूसरे से भेदभाव कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी गरीब हो तो उसे आर्थिक आधार पर आरक्षण देना चाहिए।

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