जीरो बजट खेती को एक्शन प्लान तैयार

शिमला— शून्य लागत कृषि पद्धति हिमाचल में कृषि व बागबानी की तस्वीर बदलेगी। हिमाचल में शून्य लागत प्राकृतिक कृषि पद्धति को लागू करने की तैयारी है। राज्य सरकार ने इसके लिए एक्शन प्लान तैयार कर दिया है, जिसको धरातल पर लागू करने के लिए इस पद्धति के जन्मदाता पद्मश्री सुभाष पालेकर पूरा सहयोग करेंगे। सुभाष पालेकर की इस पद्धति को देश में करीब 50 लाख किसान परिवार अपना रहे हैं। देश में इन किसानों की इससे हालत सुधरी है। श्री पालेकर इन दिनों हिमाचल के दौरे पर हैं। इस कृषि पद्धति लागू करने को लेकर उन्होंने प्रदेश सरकार के अधिकारियों के साथ बैठकें की हैं। सुभाष पालेकर और हिमाचल में शून्य लागत कृषि पद्धति के परियोजना निदेशक राकेश कंवर ने गुरुवार को इस खेती को राज्य में लागू करने की योजना के बारे में जानकारी दी। राकेश कंवर ने कहा है कि राज्य की सभी 3226 पंचायतों में ऐसे इच्छुक परिवारों का चयन किया जाएगा, जो कि खेती पर ही निर्भर है। इन परिवारों के युवा शिक्षित सदस्यों को इस खेती के बारे में ट्रेनिंग दी जाएगी और ये अन्य को प्रशिक्षण देने के लिए मास्टर ट्रेनर के तौर पर काम करेंगे। राकेश कंवर ने कहा कि सितंबर और अक्तूबर माह में प्रदेश के विभिन्न जगहों पर तीन से चार बड़े शिविर आयोजित किए जाएंगे। सरकार ने गत छह माह में सोलन, पालमपुर व मंडी में भी ऐसे जागरूकता शिविर लगाए हैं। इनमें से प्रत्येक शिविर में 600-700 लोगों शिरकत की। इनमें शामिल अधिकतर लोगों ने इस खेती को अपनाया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में करीब पांच लाख लोगों ने इस खेती को अपनाकर इनमें अपनी आय को बढ़ाया है, जो कि अधिकतर लघु व सीमांत किसान हैं।

उत्पादन ज्यादा दाम भी अच्छे

शून्य लागत प्राकृतिक कृषि पद्धति के जन्मदाता पद्मश्री सुभाष पालेकर ने कहा कि इस खेती की लागत शून्य है, जबकि उत्पादन ज्यादा है और इनके दाम भी अच्छे मिलते हैं। यही वजह है कि देश में अब तक ऋण न चुकाने के कारण सात लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं और इनमें एक भी किसान इस खेती को अपनाने वाला नहीं है। इस खेती के लिए राजस्थान, पंजाब व हरियाणा से देसी गउओं को यहां लाया जाएगा। देसी गाय के गोबर व मूत्र को इस खेती के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

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