मैं सोनागाछी के लोगों के बारे में जान रहा हूं…

भारतीय टीवी कलाकार मनीष गोपलानी जी टीवी पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक ‘ये तेरी गलियां’ में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। पेश हैं मनीष से उनके शो को लेकर हुई वार्ता के अंश…

आपके शो ‘ये तेरी गलियां’ से बात की शुरुआत करते हैं। आपका यह शो सवाल उठाता है कि क्या किसी की ‘पृष्ठभूमि’ उसकी तकदीर का फैसला करती है। इस बारे में आपका क्या कहना है?

मुझे यह लगता है कि यह कहानी किसी बैकग्राउंड पर आधारित नहीं है। यह लोगों की विचारधारा और उनकी योग्यता पर निर्भर करता है। यह शो बताता है कि लोग अपने हुनर और योग्यता का इस्तेमाल करते हुए किस तरह अपने क्षेत्र में कामयाबी हासिल करते हैं। हम इस शो में यही दर्शाना चाहते हैं। यह कामर्शियल सेक्स वर्कर्स के साथ-साथ ऐसे हर इनसान को समान अवसर देने के बारे में बात करता है, जो समाज में दबे हुए हैं, ताकि वे अपनी सच्चाई से ऊपर उठकर, अपने बेहतर भविष्य की दिशा में काम करें।

आप समाज का नजरिया कैसे बदलना चाहेंगे। यह शो पृष्ठभूमि के सामाजिक बंधन को तोड़ने में आने वाली मुश्किलों को कैसे दर्शाएगा और इस पर आपकी व्यक्तिगत राय क्या है, जो आपको शूटिंग के दौरान महसूस हुई हो?

दरअसल, बात यह है कि हमने सोनागाछी की सेक्स वर्कर्स के बारे में सिर्फ  कहानियां सुनी हैं, लेकिन हम कभी उस इलाके में नहीं गए हैं। इस शो में हम सोनागाछी और वहां के लोगों की जिंदगी दिखा रहे हैं। वहां रहने वाले लोग हमसे अलग नहीं हैं। उनकी भी एक जिंदगी है, जिसे वे खुशी-खुशी जीना चाहते हैं। उनके बच्चे हैं जो अच्छी जिंदगी जीना चाहते हैं, हंसना चाहते हैं और हर पल का मजा लेना चाहते हैं। सभी का अपना एक सफर है। वहां रहने वाले सभी लोग प्यार करना चाहते हैं और बदले में प्यार पाना भी चाहते हैं। हम ‘ये तेरी गलियां’ के जरिए यही बात कहना चाहते हैं। हम उस इलाके की सकारात्मक बातों पर प्रकाश डालेंगे। इसके अलावा, यह शो दो मासूम बच्चों शांतनु और पुचकी की कहानी है, जो कोलकाता के रेड लाइट इलाके सोनागाछी में पले-बढ़े हैं।

ये तो बहुत सीरियस रोल है। अधिकांश एक्टर जो इस तरह के रोल करते हैं, वह आमतौर पर अपने किरदार में विश्वसनीयता लाने के लिए ऐसे इलाकों में जाने की योजना जरूर बनाते हैं। क्या आपने ऐसा कुछ प्रयास किया था?

मैंने अभी तक शो की शूटिंग शुरू नहीं की है, लेकिन हां शूटिंग शुरू करने से पहले मैं सोनागाछी जरूर जाना चाहूंगा, वहां के लोगों का रहन-सहन समझना चाहूंगा। इन बारीकियों को समझने के बाद अपना किरदार प्रभावी ढंग से पेश करने में मदद मिलेगी।

आपने किस तरह की रिसर्च और तैयारियां की हैं?

इस रोल के लिए मैंने बहुत सारी हिंदी और बंगाली फिल्में देखी हैं। हमारे साथ एक्सपर्ट्स की एक टीम भी लगातार काम कर रही है, जो हमें यह कॉन्सेप्ट समझाने में मदद करती है। यह टीम हमें पॉइंटर्स देती है ताकि हम अपना किरदार बेहतर ढंग से समझ सकें। प्रोडक्शन टीम ने इस शो के सभी कलाकारों के लिए अनेक वर्कशॉप आयोजित किए हैं। इससे मुझे अपनी बोली सुधारने, अपने किरदार की बारीकियां समझने और अपना अभिनय निखारने में बहुत मदद मिली है। हां, मैं इतना जरूर कहना चाहूंगा कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहा हूं और अपनी गलतियों से भी सीख रहा हूं।

-अजय शर्मा, दिल्ली

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