रोप-वे फीस पर निवेशकों को सात साल छूट

परियोजनाओं के लिए रि-टेंडरिंग का फैसला, सरकार 33 साल वसूलेगी अपने हिस्से की राशि

शिमला— हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने राज्य में रोप-वे परियोजनाओं के निर्माण के लिए निवेश खींचने के लिए बड़े फैसले लिए हैं। इसके तहत परियोजनाओं के निर्माण के तुरंत बाद कलेक्शन फीस सरकार को देने से छूट दी गई है। पहले सात सालों तक निवेशकों को छूट रहेगी। राज्य सरकार अपने हिस्से की राशि शेष 33 सालों में वसूल करेगी। पहले चरण में यह लाभ नए क्षेत्रों में प्रस्तावित रोप-वे परियोजनाओं को मिलेगा। इसके अलावा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा। इसमें लोक निर्माण विभाग, वन एवं पर्यटन विभाग के सचिव शामिल होंगे। यह समिति प्रतिमाह सभी रोपवे (निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित) परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेगी। पर्यटन विभाग से एक अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया जाएगा। मंत्रिमंडल ने अपने पारित फैसले में कहा कि किसी भी रोप वे परियोजना को लगाए जाने से पूर्व सरकार के विभाग अपने स्तर पर एक मत होकर यह निर्णय लेंगे। परियोजना के लिए किन विभागों के अनापत्ति प्रमाण पत्र चाहिए तथा उनके प्राप्त करने के बाद ही निवेशकों से निविदा/बिड मंगवाई जाएगी। यह भी निर्णय लिया गया कि सरकार में मंत्रिमंडल स्तर की अनुमति के बाद कोई अन्य विभाग या दूसरी संस्थाएं बिना वजह निर्माण कार्य में बाधा नहीं डालेगी।  जाहिर है कि रोप-वे परियोजनाओं के निर्माण के लिए बैंक सात से 10 वर्ष की अदायगी अवधि के लिए ऋण देते हैं। साथ ही परियोजना पर कार्य प्रारंभ होने के तुरंत बाद के वर्षों में ही निवेशक को आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस कारण कैबिनेट ने निर्णय लिया कि परियोजना शुरू होने के बाद से सात वर्ष की अवधि के लिए वार्षिक कन्सेशन फीस नहीं ली जाएगी। परियोजना कन्सेशन की अवधि 40 वर्ष ही रखी जाएगी और बाद के 33 वर्षों के लिए वार्षिक कन्सेशन फीस के आधार पर ही बोली मंगवाई जाएगी। प्रथम चरण में इस छूट का लाभ ऐसी रोप-वे के लिए दिया जाएगा, जो वित्तीय रूप से सक्षम नहीं है। इसके अलावा नए क्षेत्रों में प्रस्तावित और लंबे समय से निवेशकों की कम दिलचस्पी से लटकी परियोजनाओं को इसका लाभ मिलेगा। सरकारी-निजी सहभागिता (पीपीपी) में बनने वाली रोप वे परियोजनाओं के लिए हिमाचल प्रदेश एरियल रोप-वे अधिनियम 1968 की धारा तीन से छह तक की प्रक्रिया से अधिसूचना जारी करके छूट प्रदान की जाएगी।

एक ही जनसुनवाई

परियोजना निर्माण के लिए केवल एक ही जन सुनवाई का प्रावधान किया गया है। निवेशक को किसी भी संस्था से अलग से स्वीकृतियां प्राप्त न करनी पड़ेंगी। हिमाचल प्रदेश  रोपवे एक्ट 1968 की धारा 6(3) में जन सुनवाई भी इसके साथ ही की जाएगी।

तीन संस्थाओं का पैनल

हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग अपने स्तर पर डिजाइन एवं ड्राइंग वैट करने के लिए तीन या चार विशेषज्ञ संस्थाओं का पैनल बनाएगा। परियोजना प्रारूपों को वैट करने की दर निर्धारित करेगा, जिसके बाद निजी निवेशक स्वयं प्रारूप आदि वैट करवा लेंगे, ताकि अधिनियम की धारा सात में स्वीकृति दी जा सके।

स्विस चैलेंज विधि से टेंडर

सरकार द्वारा प्रस्तावित रोप-वे परियोजनाओं के अतिरिक्त भी निवेशकों से अन्य आकर्षक रोप-वे परियोजनाएं हेतु प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे। सरकार नई परियोजनाओं के लिए स्विस चैलेंज विधि से निविदाएं मंगवा सकती है। इसलिए निर्णय लिया गया है कि इस विधि से भी रोप-वे के लिए प्रस्ताव मंगवाए जाएंगे।

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