स्टेट खेलेंगे मंडी के दस शतरंज खिलाड़ी

मंडी -राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता के लिए मंडी जिला के पांच-पांच छात्र-छात्राएं अपनी दिमागी पैंतरों से मात दंेगे। हटगढ़ में आयोजित जिलास्तरीय शतरंज प्रतियोगिता से उक्त खिलाडि़यों का चयन राज्य स्तरीय के लिए हुआ है। स्पर्धा के लिए मंडी जिला के विभिन्न खंडों से छात्रा वर्ग में पायल ठाकुर, करुणा ठाकुर, गुंजन, शैलजा और स्नेह ठाकुर का चयन हुआ है, जबकि छात्र वर्ग में दुर्लभ, चेतन, गौरव, सक्षम और प्रशांत बेहतर प्रदर्शन करने पर चयनित हुआ है। पहली बार स्कूली खेलों में शामिल शतरंज गेम की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता नवंबर माह में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गोहर मेें आयोजित की जाएगी। इस प्रतियोगिता के लिए चयनित मंडी जिला के खिलाडि़यों का प्रशिक्षण कैंप 10-12 नवंबर तक  लगेगा। बता दें कि अंडर-14 छात्र- छात्रा वर्ग की जिलास्तरीय शतरंज प्रतियोगिता राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हटगढ़ में आयोजित की गई। समापन समारोह में मुख्यातिथि के रूप में प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक केडी शर्मा ने की। स्पर्धा में 13 खंडों के करीब 130 खिलाड़ी व 30 अधिकारियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के मुख्य संचालक हंस राज ठाकुर ने मुख्यातिथि के समक्ष तीन दिवसीय प्रतियोगिता की विस्तृत रिपोर्ट पेश की। इस अवसर पर प्रधानाचार्य परविंदर ठाकुर, मीडिया प्रभारी राज कुमार, मुख्य ऑरविटर राज कुमार शर्मा, मनसा राम शर्मा, नैना देवी, प्रधानाचार्य एसपी शर्मा भीम सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।

चुनौती लेने की आदत

शतरंज में सामने वाले खिलाड़ी की चुनौती का सामना करना पड़ता है। चेस खेलते-खेलते यह शुमार हो जाता है। इसलिए जो बच्चे चेस खेलते हैं, उनमें लाईफ के चैलेंजेस को आसानी से फेस करने की क्षमता विकसित हो जाती है।

शह और मात के खेल से तेज होता है दिमाग

शतरंज खेलने वाले बच्चों का दिमाग अन्य बच्चों के मुकाबले दिमाग ज्यादा तेज होता है। इसीलिए चेस खेलने वाले बच्चे जो भी काम करते हैं,  उनका प्रदर्शन अच्छा होता है। कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है। शतरंज में हर चाल समझदारी से चलनी पड़ती है। वह विरोधी की चाल को समझना पड़ता है, उसके मकसद को भांपना होता है। चेस प्लेयर्ज में रियल लाइफ में भी सोच-समझकर डिसीजन लेने की आदत विकसित होती है।

 

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