मूल संसदीय सिद्धांत तोड़ती भारतीय शासन प्रणाली

समय आ गया है कि हम भारतीय अपनी सरकार की प्रणाली पर एक कठोर नई दृष्टि डालें। सिद्धांतों में कमजोर और हमारी आवश्यकताओं के विपरीत एक शासन प्रणाली के आधार पर भारत समृद्ध व शक्तिशाली महान राष्ट्र नहीं बन सकता... भारतीय शासन व्यवस्था संसदीय…

बिटकॉयन को बंद करना होगा

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक  एवं टिप्पणीकार हैं बिटकॉयन उसी प्रकार है जैसे किसी ओलंपिक मेडल को कोई व्यक्ति लाखों रुपए देकर खरीदने को तैयार हो सकते हैं। सरकार द्वारा जारी किए गए नोट की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार…

अब यह मोदी की भाजपा है!

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी में अब सर्वेसर्वा बन गए हैं। उन्होंने अपने नजदीकी साथी अमित शाह को पार्टी के अध्यक्ष पद पर प्रतिस्थापित कर दिया है। लेकिन चार साल के शासन के बाद भी यह पता…

बंगाल में पंचायत चुनाव ममता स्टाइल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं शायद आम जनता के इसी दबाव के चलते प्रदेश के चुनाव आयोग ने नामांकन पत्र दाखिल करने की तारीख बढ़ा दी। उसके बाद सरकार का दबाव बढ़ा होगा तो अगले दिन आयोग ने वह अधिसूचना वापस भी ले ली।…

सलमान खान केस में न्याय की विफलता

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं सलमान पर अपराध सिद्ध हुआ है, इसके बावजूद लोगों ने उनका स्वागत इस तरह किया मानो वे उनके कारनामे का अभिनंदन कर रहे हों। यह एक महत्त्वपूर्ण मामला है, न केवल इसलिए कि…

राष्ट्रमंडल खेलों में हिमाचली सपूत का पदक

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं राष्ट्रीय टीम  के हिमाचल प्रदेश से विकास ठाकुर एकमात्र खिलाड़ी हैं, जो 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेकर देश के लिए पदक जीत चुके हैं। अन्य राज्यों की तरह हिमाचल को भी चाहिए कि वह अपने…

कुआं, खाई और भारतीय मतदाता

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं समाज बंट रहा है।  लोगों में निराशा है। देखना यह बाकी है कि विपक्षी दलों की एकजुटता का भविष्य क्या रहता है। फिर भी यह सच है कि सारी चुनौतियों के बावजूद इस एक सच को नहीं भुलाया जा…

देश के सामने नए वित्त वर्ष की चुनौतियां

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक  एवं टिप्पणीकार हैं हमें एक करोड़ नए रोजगार हर वर्ष बनाने होंगे। सरकारी बैंकों का विलय प्राफिट में चल रहे बैंकों में करने से बैंक कर्मियों के स्वभाव में कोई अंतर नहीं पड़ता है। इसलिए सरकारी…

कश्मीरी पंडितों का असमंजस

कुलदीप नैयर लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं मैं उनसे इस बात पर सहमत हूं क्योंकि यह कोई हिंदू-मुसलमान का सवाल नहीं है और न ही इसे इस तरह का सवाल बनाया जाना चाहिए। सभी राजनीतिक दलों को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी…

सेवा एवं बलिदान की मिसाल

अनुज कुमार आचार्य लेखक, बैजनाथ से हैं पिछले 15 वर्षों से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस फोर्सेज के भूतपूर्व जवान अपने हकों और मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। केंद्रीय अर्द्धसैनिक के अंतर्गत सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एनडीआरएफ और एसएसबी…

मेघालय विधानसभा में हिंदी से तूफान

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं किसी को भी मेघालय विधानसभा में इन भाषाओं में बोलने का अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए? यदि खासी या गारो मेघालय विधानसभा में नहीं बोली जाएंगी, तो क्या हिमाचल विधानसभा में बोली जाएंगी?…

एयर इंडिया के पुनर्जीवन का फलसफा

प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं हाल में एयर इंडिया के मुखिया के रूप में एक नागरिक प्रशासक को नियुक्त किया गया, लेकिन कुछ ही महीनों में उसे इससे आरामदायक पद  मिल गया तथा वह रेलवे में शिफ्ट हो गया।…

खेलों में कब आएगी लोकतंत्र की बहार

भूपिंदर सिंह लेखक, राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक हैं देश में खेलों के पिछड़ने का बहुत बड़ा कारण खेल संघों पर लगातार कई टर्म तक व्यक्ति विशेष का कब्जा भी एक प्रमुख कारण है। पहली टर्म में तो ये पदाधिकारी काफी रुचि दिखाते हैं, मगर बाद में…

समृद्धि ही बचा सकती है दंगों से

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं जब समय कठिन होता है तो उत्तेजना की नहीं, बल्कि धैर्य और सम्मति की आवश्यकता होती है। हमारे देश में जनतंत्र की हालत यह है कि शासन-प्रशासन में जनता की भागीदारी कहीं भी नहीं है। देश…

हिंदू राष्ट्र या अखंड भारत नहीं, महासंघ से बनेगी बात

हिंदू राष्ट्र व अखंड भारत, दोनों अभियान असफल होने की आशंका है। अखंड भारत का पुनर्निर्माण पहुंच से परे, और हिंदू राष्ट्र अंततः आत्मघाती लगता है। एक वृहद् भारत के निर्माण की अभिलाषा सफल होने के यदि अवसर हैं तो वे समान विचार वाले देशों का एक…