सुप्रीम कोर्ट के जजों की स्वतंत्र नियुक्ति

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं वर्तमान दूसरे शंकराचार्य, देश की सबसे बड़ी ट्रेड यूनियन अथवा सबसे बड़ा व्यापारिक संगठन-इन सस्थाओं के अध्यक्षों का कालेजियम बनाया जा सकता है। इस कालेजियम को जिम्मेदारी दी जाए कि…

वैश्विक परिदृश्य में पिछड़ रहे हैं हम

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं सरकार को चाहिए कि बीमार सार्वजनिक बैंकों का एक झटके में निजीकरण कर दे। इनमें दो लाख करोड़ निवेश करने के स्थान पर इन्हें बेचकर 20 लाख करोड़ की रकम अर्जित करे और इस रकम को तकनीकी…

अर्थव्यवस्था की विरोधाभासी चाल

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक  एवं टिप्पणीकार हैं गहराई से पड़ताल करने पर पता लगता है कि देश में आने वाला विदेशी निवेश संकटग्रस्त घरेलू कंपनियों को खरीदने के लिए अधिक और नए निवेश करने के लिए कम आ रहा है। जैसे यदि मान लीजिए…

बिटकॉयन को बंद करना होगा

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक  एवं टिप्पणीकार हैं बिटकॉयन उसी प्रकार है जैसे किसी ओलंपिक मेडल को कोई व्यक्ति लाखों रुपए देकर खरीदने को तैयार हो सकते हैं। सरकार द्वारा जारी किए गए नोट की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार…

देश के सामने नए वित्त वर्ष की चुनौतियां

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक  एवं टिप्पणीकार हैं हमें एक करोड़ नए रोजगार हर वर्ष बनाने होंगे। सरकारी बैंकों का विलय प्राफिट में चल रहे बैंकों में करने से बैंक कर्मियों के स्वभाव में कोई अंतर नहीं पड़ता है। इसलिए सरकारी…

इन्कम टैक्स के दायरे का सच

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक  एवं टिप्पणीकार हैं सरकार का प्रयास है कि इन्कम टैक्स की अधिकतम दरों में कटौती की जाए। इसका प्रभाव देखिए। इन्कम टैक्स की अधिकतम दर में कटौती से अमीरतम लोगों को लाभ होगा, क्योंकि यदि आज वे अपनी आय…

व्यापार आसान, फिर अर्थव्यवस्था ढीली क्यों?

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं व्यापार करना आसान होने के बावजूद देश में विदेशी निवेश की मात्रा बढ़ने के स्थान पर घट रही है। देश की अर्थव्यवस्था मूलतः छोटे उद्योगों द्वारा संचालित होती है। छोटे उद्योगों से ही…

मंदी में क्यों उछल रहा सेंसेक्स

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं सामान्य परिस्थिति में विदेशी निवेश में वृद्धि का अर्थ देश में नईं फैक्टरियों की स्थापना होता है, जैसे सुजूकी ने गुरुग्राम में कार बनाने की फैक्टरी लगाई। परंतु इस समय सीधा…

नीयत ठीक, पर नीतियों में बदलाव जरूरी

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं नीति का सही होना ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। नीति सही होती है तो नेता की भ्रष्टता खप जाती है। परंतु नीति गलत होती है तो ईमानदारी ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। अतः हमें नेता की नीतियों…

सामाजिक सुरक्षा नहीं, रोजगार सबसिडी दीजिए

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं उद्यमों पर टैक्स लगाकर रोजगार गारंटी कार्यक्रम चलाया गया। इससे वेतन में वृद्धि हुई। टैक्स और ऊंचे वेतन के दबाव में रोजगार बंद होने लगे। नव-बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिए…

सरकार उसी की जो दूध पीए

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए जीएसटी तथा मेक इन इंडिया लाभप्रद है। घरेलू बड़ी कंपनियों के लिए जीएसटी एवं जनधन लाभप्रद हैं, परंतु मेक इन इंडिया हानिप्रद है। कुल मिलाकर इन पर…

पर्यावरण संभाल के पैमाने पर फिसलन

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं प्रधानमंत्री ने वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम में भारत को वैश्विक निवेश खोलने के लिए धारदार अपील की थी। आपसे मेरा अनुरोध है कि उतने ही धारदार तेवर से अपने ही फूड कारपोरेशन से कहिए कि…

किसान की संतान को शहर लाइए

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं संपूर्ण विश्व ने समझ लिया है कि कृषि कांप रही है और किसानों को वहां से निकाल लिया है। हम अनायास ही किसान को उसी दलदल मे धकेल रहे हैं। हमें कृषि में श्रम की गिरती जरूरत को देखते…

वित्तीय घाटा बढ़ने दीजिए

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं वित्तीय घाटे पर नियंत्रण करने के मंत्र के पीछे सोच थी कि मेजबान सरकार भ्रष्ट होने से सरकारी निवेश पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसलिए सरकारी निवेश घटाओ और निजी निवेश बढ़ाओ।…

आरक्षण से लूट का बंटवारा

डा. भरत झुनझुनवाला लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं पूर्व में सरकारी कर्मियों के वेतन आम जनता की आय के समकक्ष थे। संभवतः भ्रष्टाचार की आय भी कम थी। तब सरकारी नौकरी से दलित को विशेष व्यक्तिगत लाभ नहीं मिलता था। वह अपने पद का…