जनभावना, जनहित और सिस्टम

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं हमारी सरकारें अकुशलता की प्रतिमूर्तियां हैं। असंवेदनशील नौकरशाही और जनता से कटे नेतागणों की सरकार किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि खुद एक समस्या है। प्रशासन और सरकारें तभी प्रभावी…

सरकार से हो भ्रष्टाचार मुक्ति की शुरुआत

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यदि आनुपातिक प्रतिनिधित्व की प्रणाली लागू हो जाए, तो यह चुनाव सुधार की ओर एक बड़ा कदम होगा और हर जायज-नाजायज तरीके से वोट खरीदने की आवश्यकता ही समाप्त हो जाएगी। सिस्टम यदि मजबूत…

नोटबंदी से खत्म नहीं हुआ कालाधन

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं पिछले चार वर्षों में हमने लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदलते देखा है। नरेंद्र मोदी विकास के नाम पर नेता बने थे। गुजरात माडल उनके नजरिए का प्रतीक था। मोदी ने बहुत से अच्छे काम किए,…

भाजपा को अब काम ही दिलाएगा वोट

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं कर्नाटक की क्षणिक जीत के बाद मोदी और शाह खुद को फिर से अजेय साबित करने में लगे ही थे कि सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी आशाओं पर पानी फेर दिया। अंततः कर्नाटक हाथ से निकल गया। उसके बाद…

मजबूत सिस्टम रोकेगा भ्रष्टाचार

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं यदि सिस्टम मजबूत हो, बेईमानी पर तुरंत सजा होती हो, तो ये लोग बेईमानी की कोशिश नहीं करते। लेकिन यदि वे यह देखें कि बेईमानी करने वाला फल-फूल रहा है, उसे कोई सजा नहीं मिल रही, बल्कि…

मोदी को जनता के सवाल बूझने होंगे

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं जो लोग पहले कहते थे कि मोदी ही अकेले विकल्प हैं और मोदी ये कर देंगे वो कर देंगे, बाद में कहने लग गए कि मोदी अकेला क्या कर लेगा, कुछ और पूछो तो जवाब मिलता है कि कांग्रेस ने क्या…

फिसल पड़े तो हर-हर गंगे!

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं 15 तारीख को कर्नाटक विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद से ही दुखद घटनाक्रम बना, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। जब-जब भी ऐसा हुआ है, तत्कालीन सत्ताधारी दल ने उसका लाभ उठाने की…

सर्वेक्षणों ने गिराई विश्वसनीयता

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं जब चुनाव परिणाम किसी एक दल को बहुमत नहीं देते तो या गठबंधन अस्तित्व में आकर सत्ता पर काबिज हो जाता है और फिर गठबंधन में शामिल दलों की आपसी खींचतान के किस्से रोज सामने आते हैं।…

आओ देश को जिताएं

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं जिन नेताओं ने बेईमानी से देश को लूटा है और अकूत संपत्ति बना ली है, उनके विरुद्ध कार्रवाई होना अच्छा है और जनता सदैव उसका स्वागत करेगी, लेकिन जानबूझ कर बेटी की शादी जैसे समारोह के…

षड्यंत्र की रणनीति का नया दौर

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं भाजपा में जहां किसी को मनमर्जी से कुछ भी बोलने की इजाजत नहीं है, वहां अब ऐसा क्यों होने लगा है? तो जवाब यह है कि यह भाजपा की रणनीति का हिस्सा है कि बेतुके लेकिन संवेदनशील मुद्दों…

बिना विजन के विपक्ष का क्या औचित्य

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं विपक्ष के पास रचनात्मक विपक्ष की भूमिका को लेकर कोई ‘विजन’ नहीं है। यदि कहीं दंगा हो जाए तो विपक्ष का नेता सहानुभूति जताने के लिए वहां पहुंच जाता है, लेकिन क्या विपक्ष ऐसी कोई…

जनता, जनप्रतिनिधि और जनतंत्र

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं एक मजबूत जनतंत्र के लिए हमें अपने जनप्रतिनिधियों पर ‘जनप्रतिनिधि वापसी विधेयक’, ‘गारंटी विधेयक’, ‘जनमत विधेयक’ और ‘जनप्रिय विधेयक’ लाने के लिए दबाव बनाना है। इन कानूनों के अस्तित्व…

कुआं, खाई और भारतीय मतदाता

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं समाज बंट रहा है।  लोगों में निराशा है। देखना यह बाकी है कि विपक्षी दलों की एकजुटता का भविष्य क्या रहता है। फिर भी यह सच है कि सारी चुनौतियों के बावजूद इस एक सच को नहीं भुलाया जा…

समृद्धि ही बचा सकती है दंगों से

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं जब समय कठिन होता है तो उत्तेजना की नहीं, बल्कि धैर्य और सम्मति की आवश्यकता होती है। हमारे देश में जनतंत्र की हालत यह है कि शासन-प्रशासन में जनता की भागीदारी कहीं भी नहीं है। देश…

मोदी या सिस्टम, किसे बदलें ?

पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं मोदी ने बहुत से नारे दिए, लेकिन उन्हें जल्दी ही समझ आ गया कि नौकरशाही से लड़ना और घाटे के सरकारी उपक्रमों को बंद करना जनहित का कार्य तो हो सकता है, पर फिर अगला चुनाव जीतना तो दूर,…