जिन्ना को लेकर उठा नया विवाद

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं एक वक्त ऐसा आया जब अंग्रेजों को महसूस हुआ कि जिन्ना को भारत की राजनीति में उतारा जाए। कई साल बाद वे जब लंदन से लौटे, तो वे बिल्कुल बदले हुए थे। स्वभाव और मानसिकता में नहीं, वह तो उनका…

आक्रांताओं के इरादे जानते थे अंबेडकर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं कहा जाता है कि अंबेडकर ने अपनी पुस्तक ‘थाट्स आन पाकिस्तान’ में मुसलमानों के मनोविज्ञान और अन्य मजहबों को लोगों पर उनके दृष्टिकोण को लेकर कुछ ऐसी सख्त टिप्पणियां की थीं कि प्रकाशन से…

कठुआ-जज लोया में एक ही स्क्रिप्ट

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं मुख्य मीडिया घरानों ने सभी को बताया कि ध्यान रखना चाहिए लड़की मुसलमान थी। उन्होंने लड़की का नाम भी बता दिया। अब मामला सीधा-साधा हिंदू  मुसलमान का बन सकता था। यह ठीक है कि उच्चतम…

बंगाल में पंचायत चुनाव ममता स्टाइल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं शायद आम जनता के इसी दबाव के चलते प्रदेश के चुनाव आयोग ने नामांकन पत्र दाखिल करने की तारीख बढ़ा दी। उसके बाद सरकार का दबाव बढ़ा होगा तो अगले दिन आयोग ने वह अधिसूचना वापस भी ले ली।…

मेघालय विधानसभा में हिंदी से तूफान

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं किसी को भी मेघालय विधानसभा में इन भाषाओं में बोलने का अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए? यदि खासी या गारो मेघालय विधानसभा में नहीं बोली जाएंगी, तो क्या हिमाचल विधानसभा में बोली जाएंगी?…

पश्चिम बंगाल में हिंसा का तांडव

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं ममता बनर्जी की मंशा दोषियों को सजा दिलवाने में इतनी नहीं है। उनकी मंशा इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का राजनीतिक लाभ उठाने की लगती है। ममता बनर्जी को आने वाले चुनावों में मुसलमानों के…

कश्मीरी हिंदुओं को दो सियासी हक

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं राज्य सरकार और भारत सरकार दोनों ही उनकी इस मांग की अवहेलना करती रही हैं, लेकिन जब आतंकवाद के कारण कश्मीर से विस्थापित हिंदुओं को देश के किसी भी हिस्से में रहते हुए भी, जम्मू-कश्मीर की…

बैंकों में डाका और चोरों का शोर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं चोरी उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर नहीं हो सकती। जाहिर है इसमें आडिटर्ज का उससे भी बड़ा हाथ है। दरअसल अपराधी, नौकरशाही और राजनीतिज्ञों की एक त्रिमूर्ति बन गई है, जो पूरे सिस्टम…

त्रिपुरा के चुनावों में राष्ट्रवादी ताकतों की जीत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं वामपंथियों और राष्ट्रवादियों में अंतिम लड़ाई शुरू हुई, जिसका परिणाम तीन मार्च को सामने आया। सीपीएम अपना यह अंतिम किला नहीं बचा सकी। भाजपा ने उसे बीच चौराहे पर चित्त कर दिया। 2018 के …

नेपाल के चुनावों में साम्यवादी सक्रियता

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं नेपाल का आम आदमी भारत के साथ स्वयं को ज्यादा सहज अनुभव करता है, जबकि साम्यवादी नेतृत्व उसे चीन की गोद में ले जाना चाहता है। नेपाल के मामले में भारत सरकार को वहां की सरकार और आमजन से…

मणिशंकर को भारत की जनता दे जवाब

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं इधर, जब सीमा पर पाकिस्तान के साथ घमासान मचा हुआ है और सेना के शिविरों पर हमले हो रहे हैं, भारतीय सैनिक और पुलिस बल देश की रक्षा के लिए अपना ख़ून बहा रहे हैं , ठीक उसी समय सीमा के…

थरूर की दृष्टि में रोजगार का अर्थ

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं शशि थरूर के मित्र और कांग्रेस के अर्थशास्त्री पी चिदंबरम तो उनसे भी दो कदम आगे जाते हैं। उनका कहना है कि यदि अपनी रेहड़ी पर पकौड़े तल कर बेचना भी रोजगार की श्रेणी में आता है, तब तो…

साम्यवादी खेमे में बढ़ते मतभेद

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं यदि सीताराम की सलाह मान कर त्रिपुरा में कांग्रेस से गलबाहीं की गई, तो केरल में सामान्य जन की बात तो दूर अपने लोगों से आंख मिलाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए त्रिपुरा की लड़ाई अपने बलबूते…

मीरी-पीरी की प्रेरक परंपरा

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं गुरु ग्रंथ साहिब के नाम से कालांतर में प्रसिद्ध होने वाले इस महान ग्रंथ ने देश में एक नए उत्साह का संचार करना शुरू कर दिया। उसके बाद देश के इतिहास की धारा ही बदल गई, लेकिन इसका…

हत्याकांड को दंगा बताने की साजिश

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं सिख समुदाय के सदस्यों को अमानवीय तरीके से मारा जाता रहा और उनको मारने वाले उन्मादी उस वीभत्स कांड पर नाचते रहे। बहुत ही होशियारी और एक सोची-समझी साजिश के तहत इस हत्याकांड को हिंदू-सिख…