कश्मीर को लेकर कांग्रेस में एकता

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं अलबत्ता सोज ने यह नहीं कहा कि कांग्रेस में छोटे लोग कौन थे, जिन्होंने कश्मीर के मसले पर नेहरू को आगे नहीं बढ़ने दिया। सोज को पूरा यकीन है कि यदि तुच्छ मन वाले कांग्रेसी नेहरू को न…

जम्मू-कश्मीर सरकार का अंत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं बुखारी और औरंगजेब की हत्या के बाद महबूबा मुफ्ती को कोई साहसिक निर्णय लेना था। उसकी पार्टी को अब कौन सा रास्ता चुनना है, अलगाववादियों की सहानुभूति से सीटें जीतने का पुराना रास्ता या…

नागपुर में प्रणब मुखर्जी का संबोधन

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं मुखर्जी ने कहा कि लोकतंत्र में सभी राष्ट्रीय महत्त्व के प्रश्नों पर लोक संवाद ही समाधान का सर्वश्रेष्ठ तरीका है। किसी भी समाज में मत भिन्नता तो होगी ही। सहमत होना या असहमत होना मानव…

अंबेडकर ने समझाया रिलीजन और धर्म का अंतर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं उन्होंने मजहब या रिलीजन शब्द की परिधि निश्चित करते हुए लिखा कि मजहब का अर्थ है-‘ईश्वर में विश्वास, आत्मा में विश्वास, ईश्वर की पूजा, आत्मा का सुधार, प्रार्थना इत्यादि करके ईश्वर को…

चुनाव नतीजों के स्पष्ट संकेत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं इन चुनावों का एक संकेत स्पष्ट है। खासकर उत्तर प्रदेश में। वहां भाजपा बनाम सभी शेष दलों के बीच मुकाबला था, लेकिन जीत का अंतर इतना नहीं था, जिसका यह अर्थ निकले कि चुनाव एकतरफा हो गया…

कर्नाटक चुनावों के निहितार्थ

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं कर्नाटक ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार को उखाड़ने के इस अभियान में कर्नाटक भी मोदी के साथ है। सोनिया कांग्रेस सरकार ने लोगों की क्षेत्रीय भावनाओं को उभारने के लिए जम्मू-कश्मीर की…

मोदी सरकार के चार साल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं पिछले सत्तर साल में राजनीतिज्ञों ने अपने चाल, चरित्र और चेहरे के बल पर आम जनता का विश्वास ही नहीं खोया, बल्कि व्यवस्था के प्रति एक निराशा भी उत्पन्न की। सब एक थैली के चट््टे-बट्टे…

जिन्ना को लेकर उठा नया विवाद

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं एक वक्त ऐसा आया जब अंग्रेजों को महसूस हुआ कि जिन्ना को भारत की राजनीति में उतारा जाए। कई साल बाद वे जब लंदन से लौटे, तो वे बिल्कुल बदले हुए थे। स्वभाव और मानसिकता में नहीं, वह तो उनका…

आक्रांताओं के इरादे जानते थे अंबेडकर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं कहा जाता है कि अंबेडकर ने अपनी पुस्तक ‘थाट्स आन पाकिस्तान’ में मुसलमानों के मनोविज्ञान और अन्य मजहबों को लोगों पर उनके दृष्टिकोण को लेकर कुछ ऐसी सख्त टिप्पणियां की थीं कि प्रकाशन से…

कठुआ-जज लोया में एक ही स्क्रिप्ट

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं मुख्य मीडिया घरानों ने सभी को बताया कि ध्यान रखना चाहिए लड़की मुसलमान थी। उन्होंने लड़की का नाम भी बता दिया। अब मामला सीधा-साधा हिंदू  मुसलमान का बन सकता था। यह ठीक है कि उच्चतम…

बंगाल में पंचायत चुनाव ममता स्टाइल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं शायद आम जनता के इसी दबाव के चलते प्रदेश के चुनाव आयोग ने नामांकन पत्र दाखिल करने की तारीख बढ़ा दी। उसके बाद सरकार का दबाव बढ़ा होगा तो अगले दिन आयोग ने वह अधिसूचना वापस भी ले ली।…

मेघालय विधानसभा में हिंदी से तूफान

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं किसी को भी मेघालय विधानसभा में इन भाषाओं में बोलने का अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए? यदि खासी या गारो मेघालय विधानसभा में नहीं बोली जाएंगी, तो क्या हिमाचल विधानसभा में बोली जाएंगी?…

पश्चिम बंगाल में हिंसा का तांडव

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं ममता बनर्जी की मंशा दोषियों को सजा दिलवाने में इतनी नहीं है। उनकी मंशा इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का राजनीतिक लाभ उठाने की लगती है। ममता बनर्जी को आने वाले चुनावों में मुसलमानों के…

कश्मीरी हिंदुओं को दो सियासी हक

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं राज्य सरकार और भारत सरकार दोनों ही उनकी इस मांग की अवहेलना करती रही हैं, लेकिन जब आतंकवाद के कारण कश्मीर से विस्थापित हिंदुओं को देश के किसी भी हिस्से में रहते हुए भी, जम्मू-कश्मीर की…

बैंकों में डाका और चोरों का शोर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं चोरी उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर नहीं हो सकती। जाहिर है इसमें आडिटर्ज का उससे भी बड़ा हाथ है। दरअसल अपराधी, नौकरशाही और राजनीतिज्ञों की एक त्रिमूर्ति बन गई है, जो पूरे सिस्टम…