बैंकों में डाका और चोरों का शोर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं चोरी उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर नहीं हो सकती। जाहिर है इसमें आडिटर्ज का उससे भी बड़ा हाथ है। दरअसल अपराधी, नौकरशाही और राजनीतिज्ञों की एक त्रिमूर्ति बन गई है, जो पूरे सिस्टम…

त्रिपुरा के चुनावों में राष्ट्रवादी ताकतों की जीत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं वामपंथियों और राष्ट्रवादियों में अंतिम लड़ाई शुरू हुई, जिसका परिणाम तीन मार्च को सामने आया। सीपीएम अपना यह अंतिम किला नहीं बचा सकी। भाजपा ने उसे बीच चौराहे पर चित्त कर दिया। 2018 के …

नेपाल के चुनावों में साम्यवादी सक्रियता

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं नेपाल का आम आदमी भारत के साथ स्वयं को ज्यादा सहज अनुभव करता है, जबकि साम्यवादी नेतृत्व उसे चीन की गोद में ले जाना चाहता है। नेपाल के मामले में भारत सरकार को वहां की सरकार और आमजन से…

मणिशंकर को भारत की जनता दे जवाब

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं इधर, जब सीमा पर पाकिस्तान के साथ घमासान मचा हुआ है और सेना के शिविरों पर हमले हो रहे हैं, भारतीय सैनिक और पुलिस बल देश की रक्षा के लिए अपना ख़ून बहा रहे हैं , ठीक उसी समय सीमा के…

थरूर की दृष्टि में रोजगार का अर्थ

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं शशि थरूर के मित्र और कांग्रेस के अर्थशास्त्री पी चिदंबरम तो उनसे भी दो कदम आगे जाते हैं। उनका कहना है कि यदि अपनी रेहड़ी पर पकौड़े तल कर बेचना भी रोजगार की श्रेणी में आता है, तब तो…

साम्यवादी खेमे में बढ़ते मतभेद

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं यदि सीताराम की सलाह मान कर त्रिपुरा में कांग्रेस से गलबाहीं की गई, तो केरल में सामान्य जन की बात तो दूर अपने लोगों से आंख मिलाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए त्रिपुरा की लड़ाई अपने बलबूते…

मीरी-पीरी की प्रेरक परंपरा

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं गुरु ग्रंथ साहिब के नाम से कालांतर में प्रसिद्ध होने वाले इस महान ग्रंथ ने देश में एक नए उत्साह का संचार करना शुरू कर दिया। उसके बाद देश के इतिहास की धारा ही बदल गई, लेकिन इसका…

हत्याकांड को दंगा बताने की साजिश

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं सिख समुदाय के सदस्यों को अमानवीय तरीके से मारा जाता रहा और उनको मारने वाले उन्मादी उस वीभत्स कांड पर नाचते रहे। बहुत ही होशियारी और एक सोची-समझी साजिश के तहत इस हत्याकांड को हिंदू-सिख…

संस्कृत में शपथ के मायने

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं हिमाचल प्रदेश विधानसभा का पहला सत्र होगा, तो सभी नवनिर्वाचित सदस्य शपथ ग्रहण करेंगे। आशा करनी चाहिए कि बड़ी संख्या में सदस्य संस्कृत में शपथ लेंगे। संस्कृत भाषा में शपथ लेना केवल…

तीन तलाक को तलाक की शुरुआत

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं अनेक शताब्दियों से मुस्लिम मजहब स्वीकार कर चुकी महिलाओं को इस नए मजहब में तीन तलाक का दंश झेलना पड़ रहा था। यह मानवीय गरिमा को कलंकित करने वाला तो था ही, साथ ही संविधान में दिए गए…

मोदी की नीतियों पर चुनावी मुहर

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं गुजरात का यह चुनाव कोई साधारण चुनाव नहीं था। अनेक देशी-विदेशी शक्तियां मोदी की इस विश्वसनीयता को भेद कर देश को पुनः उसी पुराने रास्ते पर ले जाना चाहती थीं, लेकिन गुजरात की जनता ने इस…

‘राहुल बने अध्यक्ष’ में खबर क्या थी

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए हैं, इसमें भला खबर क्या है? अध्यक्ष तो वह उसी दिन बन गए थे, जिस दिन पैदा हुए थे। राजा के घर जब बेटा पैदा होता है, तो प्रजा को पता ही होता है कि…

बाबर की विरासत ढो कौन रहा है

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं कपिल सिब्बल की कलाबाजी से यह स्पष्ट हो गया है कि राम मंदिर के मसले को लटकाए रख कर इस देश में सांप्रदायिक तनाव कौन बनाए रखना चाहता है। क्या सोनिया गांधी इस पर कुछ कहेंगी? कपिल सिब्बल…

गुजरात वाया उत्तर प्रदेश

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं राहुल गांधी किसी भी तरह वंश का सहारा लेकर सत्ता के शिखर पर पहुंचने की जल्दी में है। वह किसलिए सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं, इसका उनको पता नहीं है। उनका सारा दावा केवल एक तर्क पर…

सवाल तो स्वाभिमान के प्रतीकों का है

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं पद्मावती विदेशी मुगल आक्रांताओं के खिलाफ भारतीय संघर्ष का प्रतीक हैं। वह नारी सम्मान का प्रतीक बन चुकी हैं। रानी पद्मावती ऐतिहासिक पात्र है या काल्पनिक पात्र है, यह बहस का विषय है ही…